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उत्तर प्रदेश में घातक जाल के चंगुल से फंसी मादा तेंदुए

Gargachary Times 6 January 2026, 21:33 74 views
Mathura
उत्तर प्रदेश में घातक जाल के चंगुल से फंसी मादा तेंदुए
फराह। उत्तर प्रदेश वन विभाग और वाइल्डलाइफ एसओएस के संयुक्त अभियान में उत्तर प्रदेश के हापुड़ स्थित हवीशपुर बिगास गांव से एक मादा तेंदुए को सफलतापूर्वक बचाया गया। मादा तेंदुआ सरसों के खेत में लोहे के जाल में फंसी हुई मिली थी, उसका अगला बायां पैर जाल में फंसा हुआ था। खेत में काम कर रहे स्थानीय किसानों ने सबसे पहले संकटग्रस्त तेंदुए को देखा। उन्होंने तेंदुए को दर्द और पीड़ा में देखकर तुरंत वन विभाग को सूचित किया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, वाइल्डलाइफ एसओएस की रैपिड रिस्पांस यूनिट को उनकी आपातकालीन हेल्पलाइन पर तुरंत सूचित किया गया। वन विभाग के अधिकारियों के साथ वन्यजीव संरक्षण संस्था के आठ विशेषज्ञ बचाव दल और एक पशु चिकित्सक तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। लगभग चार घंटे तक चले इस बचाव अभियान में तेंदुए की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सावधानीपूर्वक योजना और सटीकता की आवश्यकता थी। सभी आवश्यक सावधानियों और प्रोटोकॉल का पालन करते हुए, तेंदुए को सफलतापूर्वक जाल से मुक्त करने के बाद उसे एक सुरक्षित पिंजरे में रखा गया। टीम ने मौके पर ही तत्काल चिकित्सा जांच करने के पश्च्यात उसको आवश्यक उपचार भी प्रदान किया। तेंदुए को लगभग एक दिन तक चिकित्सा निगरानी और उपचार में रखा गया। स्वस्थ घोषित होने पर, उसे उत्तर प्रदेश के शिवालिक स्थित बड़कला वन क्षेत्र में वापस छोड़ दिया गया। मेरठ ज़ोन के वन संरक्षक, आदर्श कुमार आई.एफ.एस, ने कहा, “शिकारी अक्सर जंगली जानवरों को पकड़ने के लिए खेतों के अंदर और आसपास गुप्त रूप से ऐसे जाल बिछाते हैं, जिससे अनजान किसानों और जानवरों को खतरा होता है। किसानों की त्वरित प्रतिक्रिया और हमारी टीम तथा वाइल्डलाइफ एसओएस की संयुक्त कार्रवाई से जानवर को बिना किसी नुकसान के सुरक्षित बचा लिया गया। वन विभाग इस तरह के किसी भी मानव-वन्यजीव संघर्ष को हल करने के लिए प्रतिबद्ध है।” वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ, कार्तिक सत्यनारायण ने कहा, “इस तरह के बचाव अभियान समय पर सूचना देने के महत्व को उजागर करते हैं। लोहे के जाल में पैर फंसा होने के कारण तेंदुए को असहनीय दर्द हुआ होगा, और हमें राहत है कि उसे बचा लिया गया और वापस जंगल में छोड़ दिया गया जहाँ वह अब फिर से फल-फूल सकेगी।” वाइल्डलाइफ एसओएस के डायरेक्टर कंज़रवेशन प्रोजेक्ट्स, बैजूराज एम.वी. ने कहा, “शिकारियों द्वारा ऐसे जालों का अवैध उपयोग पूरे भारत में वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है। ये क्रूर उपकरण वज़न पड़ते ही अत्यधिक बल के साथ बंद होने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत इनका उपयोग प्रतिबंधित है। इस अभियान की सफलता वाइल्डलाइफ एसओएस और उत्तर प्रदेश वन विभाग दोनों की दक्षता और तत्परता को दर्शाती है।” चिकित्सा संबंधी जानकारी देते हुए, वाइल्डलाइफ एसओएस के वन्यजीव पशु चिकित्सा अधिकारी, डॉ. राहुल प्रसाद ने कहा, “मादा तेंदुए के अगले बाएं पैर पर मामूली चोटें आई थीं। उसे मौके पर ही दर्द निवारक दवाओं सहित आवश्यक उपचार दिया गया। उसकी भूख और गतिविधि पर बारीकी से नजर रखने के बाद, उसे मानव बस्तियों से दूर जंगल में वापस छोड़ दिया गया।” स्वभाव से तेंदुए शर्मीले जानवर होते हैं और उनकी प्राथमिक प्रवृत्ति मनुष्यों से संपर्क में आने से बचना है। उनके प्राकृतिक आवास पर अनियंत्रित अतिक्रमण के कारण तेंदुए लुप्त होते जंगलों में अपना ठिकाना खोजने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं। इसके चलते वे मानव बस्तियों के करीब पालतू जानवरों और कुत्तों जैसे शिकार की तलाश करने के लिए विवश हो जाते हैं। भारतीय तेंदुआ पैंथेरा पार्डस फुस्का अनुसूची I की प्रजाति का जानवर है, जिसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत संरक्षित किया गया है और इसे आई.यू.सी.एन रेड डेटा सूची में 'वल्नरेबल' श्रेणी में रखा गया है।
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