Loading...

सैंपऊ नगर पालिका परिक्षेत्र में नियमों को दरकिनार कर काटी जा रहीं अनेकों अवैध कालोनियां

Gargachary Times 27 January 2026, 20:32 628 views
Dholpur
सैंपऊ नगर पालिका परिक्षेत्र में नियमों को दरकिनार कर काटी जा रहीं अनेकों अवैध कालोनियां
सैंपऊ: ग्राम पंचायतों को नगर पालिका में सरकार द्वारा क्रमोनत किए जाने पर लोगों को विकास होने की आशा थी किंतु अब धीरे-धीरे लोगों की समस्याएं बढ़ती ही जा रही हैं। पालिका और प्रशासन में बैठे कर्मचारियों के मिली भगत से सरकारी जमीनों पर अवैध रूप से कब्जा कर उन्हें बेचने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। नियम एवं कानूनों को धता बताते हुए खुलेआम प्रशासन की नाक के नीचे नई कालोनियां दिनों दिन काटी जा रही हैं। जिनमें सरकार द्वारा निर्धारित नियमों का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन भू माफियाओं और जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारियों की सह से किया जा रहा है। नगर पालिका घोषित होने के बाद उपखंड मुख्यालय सैंपऊ में हालत दिनों दिन बिगड़ते जा रहे हैं। यहां तक कि सरकारी जमीनों को भी कर्मचारियों को मिली भगत से हथियाने का काम भू माफियाओं द्वारा किया जा रहा है। जमीनों के बढ़ते भावों के चलते जमीनों की कीमतें आसमान छू रही हैं। क्या कहते हैं नियम : भू राजस्व अधिनियम 1956 की धारा 91 के अनुसार कृषि भूमि को अकृषि भूमि में रूपांतरित करने के बाद प्लाटिंग करने का नियम है। नगर पालिका क्षेत्र में नगर पालिका अधिनियम 2009 के अनुसार कालोनियां काटने हेतु कोलोनाइजर का लाइसेंस सक्षम अधिकारी से टाउन प्लानिंग की अनुमति अनिवार्य है। कॉलोनी के क्षेत्रफल की 40% भूमि सड़कों एवं सुविधाओं जिनमें पार्क, पानी, बिजली के लिए छोड़ने एवं 60% क्षेत्रफल पर प्लाटिंग का प्रावधान है। एक एकड़ से अधिक की योजना होने पर 15% जमीन आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षित करने का प्रावधान है। जिम्मेदारों की उदासीनता और मिली भगत : सरकारी उदासीनता एवं कर्मचारियों को मिली भगत होने से किसी भी नियम का पालन नहीं किया जा रहा है। सरकार जहां एक ओर सरकारी जमीनों को खाली कराने की कार्यवाहियों का डिंडोरा पीटती है वहीं दूसरी ओर सैंपऊ में सरकारी जमीनों को जिसकी लाठी उसकी भैंस की तर्ज पर अतिक्रमण करने एवं बेचने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। विभाग भी इस प्रकरण में कम जिम्मेदार नहीं है। नियमों एवं कानूनों को धता बताते हुए विभागीय कर्मचारी इस प्रकार के प्रकरणों को ठंडे बस्ते में डालकर अपने चहेतों को भरपूर लाभ पहुंचा रहे हैं तथा सरकार को लाखों रुपए की चपत लग रही है। नहर की पटरी पर अतिक्रमियों का डेरा : कस्बे में निकलने वाली माइनर की दोनों पटरियां अतिक्रमणकारियों द्वारा अतिक्रमण किए जाने से पगडंडी बन चुकी हैं। सरकारी रिकॉर्ड में आम रास्ते लोगों द्वारा बंद किये जा रहे हैं। कॉलोनी में पहुंचने के रास्ते अतिक्रमणकारियों द्वारा बंद किए जाने से सरकारी रास्ता होने के बावजूद उन्हें दूसरे रास्तों से अपने घरों को पहुंचना पड़ रहा है। सैंपऊ माइनर पर वर्षों से लोग कब्जा जमाए बैठे हैं तथा वहां अपने-अपने व्यापारिक प्रतिष्ठानों को संचालित कर रहे हैं। आलम यह है कि बसों के इंतजार में खड़े यात्रियों को बैठने तक की जगह नहीं मिलती तथा आए दिन जाम लगा रहता है। पिछले दिनों प्रमुखता से समाचार पत्रों में मुद्दा उठाये जाने के बाद भी प्रशासन के कानों में जू तक नहीं रेंगी है। लोगों का आरोप है कि पटवारी के लगातार चक्कर लगाने के बावजूद दाखिला खारिज तक नहीं किए जाते जब कि भूमाफियाओं के काम लगातार बिना किसी रूकावट के होने से किसानों में आक्रोश व्याप्त है। समय रहते इस समस्या के समाधान बाबत प्रशासनिक स्तर पर कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी तब तक अतिक्रमणकारियों एवं भू माफियाओं द्वारा राम नाम की लूट में लूट की जाती रहेगी।
Follow Samachar24