राया नगर पंचायत: भ्रष्टाचार की जांच में 'मायाजाल', ईओ पर जांच को गुमराह करने का आरोप
Gargachary Times
5 February 2026, 18:29
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Mathura
नगर पंचायत राया में विकास कार्यों और सरकारी धन के बंदरबांट का मामला अब 'तारीख पर तारीख' और 'जवाब पर जवाब' के मकड़जाल में फंसता नजर आ रहा है। वार्ड सभासद अमित अग्रवाल द्वारा मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल (IGRS) पर की गई शिकायतों के बाद स्थानीय प्रशासन में खलबली तो मची है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल 'कागजी लीपापोती' का खेल जारी है।
भ्रामक सूचनाओं का 'शतरंज'
सभासद अमित अग्रवाल ने सीधा हमला बोलते हुए अधिशासी अधिकारी (EO) पर जांच को भटकाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, "यह आश्चर्यजनक है कि एक ही बिंदु पर की गई शिकायतों के जवाब में विभाग हर बार अलग-अलग और परस्पर विरोधी आंकड़े पेश कर रहा है।" जानकारों की मानें तो यह प्रशासनिक रणनीति जांच को लंबा खींचने और साक्ष्यों को कमजोर करने का एक सोचा-समझा प्रयास है।
अंधेरे में सिस्टम: पारदर्शिता की उड़ी धज्जियां
विकास कार्यों के टेंडर, खर्च के ब्यौरे और नगर की व्यवस्थाओं को लेकर किए गए सवालों पर ईओ कार्यालय की चुप्पी और भ्रामक रिपोर्ट शासन की 'जीरो टॉलरेंस' नीति को चुनौती दे रही है। जिलाधिकारी और उपजिलाधिकारी स्तर से जांच शुरू होने के बावजूद, निचले स्तर के अधिकारियों द्वारा तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करना इस बात का संकेत है कि 'सिंडिकेट' की जड़ें काफी गहरी हैं।
जनता की नजर, प्रशासन की साख दांव पर
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, नगर की जनता में भी रोष पनप रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अगर चुने हुए प्रतिनिधि (सभासद) को ही गुमराह किया जा रहा है, तो आम जनता की सुनवाई का स्तर क्या होगा? सभासद अमित अग्रवाल ने साफ कर दिया है कि यदि जवाबदेही तय नहीं हुई और दोषियों को संरक्षण देना बंद नहीं किया गया, तो वे इस मामले को लोकायुक्त और माननीय उच्च न्यायालय की दहलीज तक ले जाएंगे।
न्यूज़ एडिटर के विशेष कॉलम (Sidebars for Impact):
1. 'इनसाइड स्टोरी': आखिर किसे बचा रहे हैं जिम्मेदार?
शासन स्तर से जब जांच के आदेश आते हैं, तो स्थानीय स्तर पर रिपोर्ट को 'गोल-मोल' करना यह दर्शाता है कि भ्रष्टाचार की इस बहती गंगा में कई बड़े चेहरों ने हाथ धोए हैं। ईओ द्वारा दिए गए 'मल्टीपल वर्जन' (Multiple Versions) ही जांच की सबसे बड़ी चुनौती बन गए हैं।
2. मुख्य बिंदु जो जांच के घेरे में हैं:
विकास कार्यों के नाम पर कागजी भुगतान का संदेह।
नियमों को ताक पर रखकर चहेते ठेकेदारों को लाभ।
IGRS की शिकायतों पर गैर-जिम्मेदाराना और भ्रामक रिपोर्टिंग।