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विकास खण्ड मदनपुर में तहसील सिरसागंज की "धरती माता बचाओ 1 निगरानी समिति बैठक आयोजित

Gargachary Times 12 February 2026, 20:05 27 views
Firozabad
विकास खण्ड मदनपुर में तहसील सिरसागंज की "धरती माता बचाओ 1 निगरानी समिति बैठक आयोजित
विकास खण्ड मदनपुर के सभागार कक्ष में तहसील सिरसागंज की धरती माता बचाओ निगरानी समिति बैठक आयोजित की गयी। बैठक की अध्यक्षता श्री धर्मवीर भारती उप जिलाधिकारी, सिरसागंज द्वारा की गयी। बैठक में श्री सुमित कुमार चौहान जिला कृषि अधिकारी/उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी, शिकोहाबाद, श्री राजेश कुमार जिला प्रबंधक इफको कंपनी श्री प्रदीप कुमार यादव, प्रतिनिधि, मै0 यारा फर्टीलाइर्स लि0, श्री राज कुमार, उर्वरक सहायक एवं थोक एवं फुटकर उर्वरक विक्रेता बन्धुओं द्वारा प्रतिभाग किया गया। श्री सुमित कुमार, जि0कृ0अ0 द्वारा वर्तमान समय में किसानों द्वारा रासायनिक उर्वरकों के बढते प्रयोग को कम करने तथा उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग के बारे में जागरूकता को बढाये जाने पर बल देते हुये विस्तारपूर्वक बताया गया। विक्रेताओं को बताया गया कि किसानों को सही समय व सही विधि के अनुसार आवश्यक पोषक तत्वों की सही मात्रा में रासायनिक उर्वरक प्रयोग में लाने के लिये समझाया जाये। बताया गया कि प्रत्येक सप्ताह में एक दिन निर्धारित कर दुकान से जुडे कृषकों को एकत्र कर जागरूकता गोष्ठी आयोजित की जाये। इसमें वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने तथा रासायनिक उर्वरकों के अन्धाधुन्ध प्रयोग को कम करने, इनके दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी करायें। इनके स्थान पर वैकल्पिक उपायों जैसे जैविक खाद में गोबर की खाद, कम्पोस्ट खाद, वर्मी कम्पोस्ट, हरी खाद में ढैंचा, सनई, लोबिया जैसी फसलों को जोतकर मिट्टी में मिलाना तथा जैब उर्वरक (बायो-फर्टीलाइजर्स) राइजोबियम, एजोटोवेक्टर, फॉस्फेट साल्युबिलाइजिंग बैक्टीरिया (पी0एस0बी0) में प्रयोग के बारे में बताया गया। बैठक में बताया गया में किसानों को फसल चक्र अपनाने के लिये प्रेरित किया जाये। इसमें दलहनी फसलों को फसल चक्र में शामिल करना एवं एक ही खेत में विभिन्न फसलें उगाने को कहा गया। बताया गया कि किसानों को फसल अवशेष को जलाना नहीं चाहिये, अपितु इसको मिट्टी में मिलाकर कम्पोस्ट खाद के रूप में प्रयोग किया जाना चाहिये। यदि किसान सन्तुलित उर्वरकों का प्रयोग करेगा तो इससे वह अधिक एवं गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त कर सकेगा, जिसका बाजार विक्रय मूल्य अच्छा प्राप्त होगा। इससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है। पर्यावरण संरक्षित रहता है। इससे लागत में कमी व लाभ में वृद्धि होगी। विक्रेताओं को बताया गया कि शासन के निर्देशानुसार कृषक को उनकी जोत वही एवं फसल में संस्तुत मात्रा के अनुसार ही उर्वरक विक्रय की जाये। इसका सम्पूर्ण विवरण विक्रय पंजिका में अंकित किया जाये। आगामी सत्र से किसानों को फार्मर रजिस्ट्री के आधार पर उसमें अंकित कृषित भूमि के आधार पर उर्वरक प्राप्त हो सकेगी। अतः यह आवश्यक है कि किसान की फार्मर रजिस्ट्री पूर्व में की गयी है। यदि फार्मर रजिस्ट्री नहीं है, तब विक्रेता को किसान की फार्मर रजिस्ट्री बनाने हेतु प्रशिक्षण दिया गया। विकेताओं को फार्मर सहायक यूपी एप्प डाउनलोड कराकर फार्मर रजिस्ट्री करने का तरीका समझाया गया, जिससे कि वह दुकान पर आने पर किसानों की फार्मर रजिस्ट्री कर सके। अन्त में सभी का धन्यवाद ज्ञापित कर बैठक समाप्त की गयी।
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