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गोमती पुनरुद्धार की ऐतिहासिक पहल, ‘ क्लीन गोमती 2026’ से तय होगा स्वच्छ और अविरल भविष्य

Gargachary Times 20 February 2026, 21:19 48 views
Lucknow
गोमती पुनरुद्धार की ऐतिहासिक पहल, ‘ क्लीन गोमती 2026’ से तय होगा स्वच्छ और अविरल भविष्य
राज्य परिवर्तन आयोग, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आज लखनऊ में राज्यस्तरीय कार्यशाला “Revitalizing the Lifeline: Clean Gomti 2026” का आयोजन किया गया। माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व एवं राज्य परिवर्तन आयोग के मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्री मनोज कुमार सिंह के निर्देशन में आयोजित इस कार्यशाला ने गोमती नदी के पुनरुद्धार की दिशा में एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी पहल की ठोस नींव रखी। इस व्यापक और बहुआयामी कार्यशाला का उद्देश्य गंगा की प्रमुख सहायक नदी गोमती को प्रदूषण मुक्त, स्वच्छ, सतत और जीवनदायिनी स्वरूप में पुनर्स्थापित करने हेतु एक समग्र, वैज्ञानिक, व्यावहारिक और दीर्घकालिक रणनीति तैयार करना रहा, ताकि नीति निर्माण से लेकर जमीनी क्रियान्वयन तक एक सुदृढ़, समन्वित और प्रभावी कार्ययोजना विकसित की जा सके। कार्यशाला में नीति निर्माण, वित्तीय रणनीति, तकनीकी समाधान, संस्थागत ढांचा, संचालन प्रणाली और नागरिक सहभागिता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन मंथन हुआ। इसमें राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ, उद्योग प्रतिनिधि, शिक्षाविद, पर्यावरणविद, सामाजिक संगठन और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी की। उद्घाटन सत्र में मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्री मनोज कुमार सिंह ने स्वागत संबोधन एवं विषय प्रवर्तन प्रस्तुत करते हुए गोमती नदी के पुनरुद्धार की आवश्यकता, वर्तमान चुनौतियों और दीर्घकालिक समाधान की दिशा पर प्रकाश डाला। इसके पश्चात राज्यसभा सांसद एवं प्रख्यात पर्यावरणविद् संत बलबीर सिंह सीचेवाल, ‘वाटरमैन ऑफ इंडिया’ के रूप में विख्यात तरुण भारत संघ के संस्थापक श्री राजेन्द्र सिंह तथा भारतीय सेना के सेंट्रल कमांड के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल नवीन सचदेवा ने नदी संरक्षण को राष्ट्रीय प्राथमिकता बताते हुए इसे जनआंदोलन का स्वरूप देने पर बल दिया। विशेष संबोधन में लखनऊ नगर निगम की महापौर श्रीमती सुषमा खर्कवाल ने शहरी स्तर पर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, सीवेज नियंत्रण और नागरिक सहभागिता के माध्यम से गोमती को स्वच्छ एवं निर्मल बनाने के लिए नगर निगम की प्रतिबद्धता दोहराई। विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं ने एक स्वर में कहा कि गोमती का संरक्षण केवल पर्यावरणीय दायित्व नहीं बल्कि सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक उत्तरदायित्व भी है। गोमती सदियों से अवध क्षेत्र की जीवनरेखा रही है और इसके पुनर्जीवन से पारिस्थितिक संतुलन, जनस्वास्थ्य, आजीविका, पर्यटन, कृषि और जैव विविधता को व्यापक लाभ मिलेगा। कार्यशाला के प्रारंभिक सत्र में गोमती नदी की वर्तमान स्थिति का वैज्ञानिक और तकनीकी विश्लेषण प्रस्तुत किया गया। इसमें जल प्रवाह की कमी, गाद जमाव, नदी तल की बिगड़ती संरचना, तटों पर अतिक्रमण, घरेलू सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट के अनियंत्रित प्रवाह जैसे प्रमुख कारणों की विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि लखनऊ महानगर क्षेत्र में गोमती प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण वर्षा जल नालियों में लगातार मिश्रित होता सीवेज है, जो बिना उपचार के सीधे नदी में प्रवाहित हो रहा है। इसके चलते जल गुणवत्ता में गंभीर गिरावट आई है, जिससे जलीय जीवन, मानव स्वास्थ्य और नदी की स्वच्छता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इस अवसर पर राज्य परिवर्तन आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री मनोज कुमार सिंह ने कहा कि, “गोमती नदी उत्तर प्रदेश की जीवनरेखा है और इसके संरक्षण व पुनरुद्धार के लिए एक समग्र, वैज्ञानिक तथा दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाना अत्यंत आवश्यक है। ‘Revitalizing the Lifeline: Clean Gomti 2026’ कार्यशाला का आयोजन इसी उद्देश्य से किया गया है, ताकि नीति-निर्माण, वित्तीय प्रबंधन, तकनीकी नवाचार और जनसहभागिता को एक साझा मंच पर लाकर ठोस एवं व्यवहारिक कार्ययोजना तैयार की जा सके। उन्होंने कहा कि गोमती के प्रदूषण की समस्या केवल पर्यावरण से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि यह जनस्वास्थ्य, आजीविका, जैव विविधता और भावी पीढ़ियों के भविष्य से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है। इसीलिए राज्य परिवर्तन आयोग द्वारा विभिन्न विभागों, तकनीकी विशेषज्ञों, औद्योगिक संगठनों, सामाजिक संस्थाओं एवं नागरिक समाज को एकजुट कर एक समन्वित रणनीति विकसित की जा रही है। श्री मनोज कुमार सिंह ने कहा कि इस कार्यशाला के माध्यम से जो सुझाव, तकनीकी समाधान एवं रणनीतिक बिंदु सामने आए हैं, उन्हें राज्य स्तरीय कार्ययोजना में सम्मिलित कर चरणबद्ध तरीके से क्रियान्वित किया जाएगा, ताकि आने वाले समय में गोमती को स्वच्छ, निर्मल, अविरल एवं सतत प्रवाहयुक्त बनाया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि यह अभियान केवल सरकारी प्रयास तक सीमित न रहकर जन-आंदोलन का रूप ले — इसी उद्देश्य से जनसहभागिता, व्यवहार परिवर्तन और जागरूकता कार्यक्रमों पर विशेष बल दिया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी हितधारकों के समन्वित प्रयासों से ‘Clean Gomti 2026’ का लक्ष्य निश्चित रूप से समयबद्ध तरीके से प्राप्त किया जा सकेगा और गोमती नदी पुनः अपने प्राकृतिक वैभव के साथ प्रदेश की पहचान बनेगी।” सामाजिक और आर्थिक प्रभावों पर चर्चा करते हुए विशेषज्ञों ने कहा कि प्रदूषित नदी जल से जलजनित रोगों में वृद्धि, मछुआरों और किसानों की आजीविका पर संकट, भूजल स्तर में गिरावट और जैव विविधता का क्षरण जैसी गंभीर समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं। यह स्थिति न केवल वर्तमान पीढ़ी, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी गंभीर चुनौती बनती जा रही है। वित्तीय सत्र में गोमती पुनरुद्धार परियोजना के लिए आवश्यक संसाधनों के आकलन और दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता पर व्यापक चर्चा हुई। राज्य बजट, केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं, बहुपक्षीय वित्तीय संस्थानों, निजी निवेश, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) फंड और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के माध्यम से संसाधन जुटाने की संभावनाओं पर गंभीर विचार-विमर्श किया गया। इसके साथ ही Finance+ मॉडल प्रस्तुत किया गया, जिसमें वित्तीय निवेश के साथ-साथ तकनीकी नवाचार, कुशल प्रबंधन और जनसहभागिता को जोड़ते हुए एक समग्र विकास मॉडल अपनाने पर बल दिया गया। संस्थागत ढांचे और संचालन रणनीति से जुड़े सत्र में योजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु एक मजबूत और केंद्रीकृत तंत्र विकसित करने पर सहमति बनी। प्रतिभागियों ने सुझाव दिया कि एक समर्पित केंद्रीय एजेंसी का गठन किया जाए, जो योजना के समन्वय, निगरानी और समयबद्ध कार्यान्वयन को सुनिश्चित कर सके। इसके अंतर्गत औद्योगिक अपशिष्ट, घरेलू कचरा और सीवेज प्रबंधन के लिए आधुनिक तकनीकों को अपनाने, प्रमुख नालों और औद्योगिक इकाइयों की सख्त निगरानी तथा प्रदूषण नियंत्रण मानकों को कठोरता से लागू करने पर जोर दिया गया। तकनीकी समाधान से संबंधित सत्र में अपशिष्ट जल को एक देयता नहीं, बल्कि आर्थिक संसाधन के रूप में विकसित करने की अवधारणा पर व्यापक सहमति बनी। विशेषज्ञों ने कहा कि आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट तकनीकों और जल पुनर्चक्रण प्रणालियों के माध्यम से अपशिष्ट जल का पुनः उपयोग कर जल संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इस अवसर पर VA TECH WABAG, SUEZ India तथा AlphaMERS जैसी अग्रणी कंपनियों ने “वन सिटी वन ऑपरेटर” मॉडल, अत्याधुनिक सीवेज शोधन तकनीक, जल पुनर्चक्रण एवं स्मार्ट मॉनिटरिंग प्रणालियों पर आधारित नवाचार प्रस्तुत किए, जिन्हें प्रतिभागियों ने अत्यंत उपयोगी और व्यवहारिक बताया। नागरिक समाज की भूमिका पर केंद्रित सत्र में यह स्पष्ट किया गया कि बिना जनसहभागिता के कोई भी नदी पुनरुद्धार अभियान सफल नहीं हो सकता। सोशल एंड बिहेवियर चेंज कम्युनिकेशन (SBCC) के माध्यम से लोगों की सोच और व्यवहार में परिवर्तन लाने, स्वच्छता की आदतों को बढ़ावा देने और नदी संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देने पर विशेष बल दिया गया। “रिवर्स ऑफ इंडिया” और “पॉन्ड्स ऑफ इंडिया” जैसे अभियानों से जुड़े विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि जब स्थानीय समुदाय स्वयं आगे आकर जिम्मेदारी लेते हैं, तब नदी और तालाबों का पुनर्जीवन स्थायी रूप से संभव हो पाता है। समापन सत्र में स्टेट ट्रांसफार्मेशन कमीशन के मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्री मनोज कुमार सिंह ने पूरे दिन की चर्चाओं का सार प्रस्तुत करते हुए कार्यशाला के उद्देश्यों, प्राप्त सुझावों तथा आगे की कार्ययोजना की रूपरेखा रखी। इसके पश्चात तरुण भारत संघ के संस्थापक एवं ‘वाटरमैन ऑफ इंडिया’ श्री राजेन्द्र सिंह ने दिनभर के मंथन से निकले महत्वपूर्ण निष्कर्षों को साझा करते हुए नदी पुनरुद्धार के लिए सामुदायिक सहभागिता, पारंपरिक ज्ञान और सतत जल प्रबंधन को अनिवार्य बताया। मुख्य संबोधन में भारतीय सेना के सेंट्रल कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल नवीन सचदेवा ने राष्ट्रीय और पर्यावरण सुरक्षा के आपसी संबंध को रेखांकित करते हुए स्वच्छ नदियों को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताया। इस अवसर पर पंचायती राज विभाग, नगर विकास विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और अन्य राज्य स्तरीय विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर एकीकृत कार्ययोजना लागू करने पर रणनीतिक सहमति बनी। सभी प्रतिभागियों ने इस बात पर बल दिया कि विभागीय तालमेल, तकनीकी दक्षता, वित्तीय पारदर्शिता और सामाजिक सहभागिता के समन्वय से ही गोमती को पुनः उसकी प्राकृतिक, स्वच्छ और अविरल धारा में लौटाया जा सकता है। “Revitalizing the Lifeline: Clean Gomti 2026” गोमती नदी को स्वच्छ, निर्मल और पुनर्जीवित बनाने की दिशा में एक मजबूत आधार प्रदान करेगा और आने वाले वर्षों में यह प्रयास न केवल पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बनेगा, बल्कि उत्तर प्रदेश के सतत विकास मॉडल को भी नई दिशा देगा। इस राज्यस्तरीय कार्यशाला में श्री संत बलबीर सिंह सीचेवाल (माननीय सांसद, राज्यसभा), श्रीमती सुषमा खारखवाल (महापौर, लखनऊ नगर निगम), श्री मनोज कुमार सिंह (मुख्य कार्यकारी अधिकारी, स्टेट ट्रांसफार्मेशन कमीशन, उत्तर प्रदेश सरकार), भारतीय सेना के सेंट्रल कमांड के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल नवीन सचदेवा, एवीएसएम, एसएम, श्री अक्षत वर्मा, आईएएस (अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी, स्टेट ट्रांसफार्मेशन कमीशन, उत्तर प्रदेश सरकार), श्री राजेन्द्र सिंह (वाटरमैन ऑफ इंडिया, संस्थापक – तरुण भारत संघ), लेफ्टिनेंट जनरल नवीन सचदेवा, एवीएसएम, एसएम (चीफ ऑफ स्टाफ, सेंट्रल कमांड, भारतीय सेना), श्रीमती सुमिला गुल्यानी (प्रैक्टिस मैनेजर, वाटर साउथ एशिया, विश्व बैंक), श्री डेविड मैल्कम लॉर्ड (लीड वाटर स्पेशलिस्ट, विश्व बैंक), एवं सुश्री लॉरा सस्टरसिक (प्रोग्राम डायरेक्टर वाटर, जीआईज़ेड) सहित अन्य राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों ने प्रतिभाग किया।
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