बरसाना में गूंजा लठ्ठमार होली का जयघोष, गोपिकाओं ने हुरियारों पर बरसाईं प्यार भरी लाठियां
Gargachary Times
25 February 2026, 18:43
67 views
Mathura
जी हां… ब्रज की धरती बरसाना आज फिर उसी दिव्य और विश्व प्रसिद्ध लठामार होली के रंग में डूबी नजर आई, जिसकी परंपरा श्री राधा-कृष्ण के युग से चली आ रही है।
बरसाना की गोपिकाओं ने नंदगांव के हुरियारों पर प्यार भरी लाठियां बरसाईं और पूरा ब्रज जयकारों से गूंज उठा।
बरसाना में लठामार होली का भव्य आयोजन हुआ। नंदगांव के हुरियारे परंपरागत वेशभूषा में सबसे पहले पीली पोखर पहुंचे। सिर पर रंग-बिरंगी पगड़ी, हाथों में ढाल और मन में उत्साह लिए हुरियारे राधारानी की नगरी में होरी खेलने के लिए सजधज कर तैयार दिखे।
पीली पोखर से एकजुट होकर सभी हुरियारे राधारानी मंदिर पहुंचे, जहां समाज गायन की मधुर धुनों के बीच भक्ति रस बहा। राधारानी से अनुमति लेने के बाद हुरियारे रँगीली गली की ओर बढ़े—और यहीं से शुरू हुआ ब्रज का सबसे अनोखा रंगोत्सव।
रँगीली गली में जैसे ही नंदगांव के हुरियारे पहुंचे, बरसाना की सखियों ने उन्हें घेर लिया। ढाल संभाले हुरियारे और हाथों में लाठियां लिए गोपिकाएं—और फिर शुरू हुई प्यार भरी लाठियों की बरसात।
हर वार के साथ गूंजता “राधे-राधे”… हर ठहाके के साथ झूमता ब्रज। ऐसा दृश्य मानो स्वयं भगवान कृष्ण अपने ग्वाल-बालों के संग साक्षात होली खेल रहे हों।
चारों ओर से बरसती लाठियों और उड़ते गुलाल के बीच श्रद्धालु रोमांचित नजर आए। देश-विदेश से आए लाखों भक्त इस अलौकिक परंपरा के साक्षी बने और खुद को धन्य मानते दिखे।
बरसाना की लठामार होली सिर्फ एक उत्सव नहीं… यह प्रेम, परंपरा और आस्था का अद्भुत संगम है। यहां लाठियां भी प्यार की भाषा बोलती हैं और ढालें भी मुस्कुराते हुए वार सहती हैं।
ब्रज की यह अनोखी परंपरा आज भी उसी उत्साह और भव्यता के साथ जीवित है, जो सदियों पहले थी।
बरसाना की रँगीली गलियों में आज फिर इतिहास जीवंत हो उठा।
राधारानी के जयकारों और लाठियों की गूंज के बीच पूरा ब्रज रंग और रस में डूब गया।
बरसाना की लठामार होली ने एक बार फिर साबित कर दिया—
होली अगर देखनी हो, तो बरसाना की देखो।