अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव वृन्दावन 2026 का भव्य शुभारंभ
Gargachary Times
28 February 2026, 18:15
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Mathura
वृन्दावन: भगवान श्रीकृष्ण की पावन लीला-स्थली वृन्दावन में आज अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव – वृन्दावन 2026 का भव्य शुभारंभ कुंभ मेला क्षेत्र, देवराहा बाबा घाट पर दीप प्रज्वलन एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुआ। तीन दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में देश-विदेश से पधारे योगाचार्यों, आयुर्वेदाचार्यों, प्राकृतिक चिकित्सकों एवं आध्यात्मिक वक्ताओं की गरिमामयी उपस्थिति रही।
दीप प्रज्वलन समारोह में पद्मश्री सम्मानित इदा ऋषि पुत्र मनुआबा संस्थान के सचिव एवं अंतरराष्ट्रीय योगगुरु डॉ. बालमुकुंद शास्त्री, जूलिया बोरियोली, सुचित्रा पारेख, एलेना डे मार्टिन, डॉ. राधेश्याम मिश्रा, एम्मा लीफ, डॉ. सुब्रमणियन आनंद वेंकटा, वैद्य प्रभु दयाल गोगिया, तथा डॉ. विशाल बोधि सहित अन्य विशिष्ट अतिथियों ने सहभागिता की।
संस्थान के प्रबंधक एवं कार्यक्रम समिति के अध्यक्ष आचार्य डॉ. धर्मनाथ शास्त्री, सचिव डॉ. बालमुकुंद शास्त्री, वेणु गोपाल, डॉ. बालकृष्ण शास्त्री (नेचुरोपैथ), राधा किनकरी, सुमित सहित आयोजन समिति के अन्य सदस्य भी मंचासीन रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक आह्वान से हुआ। स्वागत उद्बोधन में डॉ. बालमुकुंद शास्त्री ने कहा कि वृन्दावन की आध्यात्मिक ऊर्जा में आयोजित यह महोत्सव योग को केवल शारीरिक अभ्यास तक सीमित नहीं रखता, बल्कि इसे जीवन-दर्शन, वैश्विक शांति एवं सांस्कृतिक समन्वय का माध्यम बनाता है। उन्होंने कहा,
"योग भारत की अमूल्य धरोहर है, जो आज विश्व को स्वास्थ्य, संतुलन और शांति का संदेश दे रही है। यह महोत्सव विश्व के साधकों को एक मंच पर लाकर आध्यात्मिक संवाद को सशक्त करेगा।"
संस्थान के प्रबंधक आचार्य डॉ. धर्मनाथ शास्त्री ने अपने संबोधन में कहा कि यह आयोजन योग, आयुर्वेद एवं भारतीय ज्ञान परंपरा को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने का प्रयास है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे योग को दैनिक जीवन में अपनाकर राष्ट्र निर्माण में योगदान दें।
उद्घाटन सत्र के पश्चात डॉ. राधेश्याम मिश्रा द्वारा अवेयरनेस का ब्रेथ विषय पर ध्यान सत्र आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में साधकों ने सहभागिता की। योग सत्रों में पारंपरिक आसन, प्राणायाम एवं संतुलन तकनीकों का अभ्यास कराया गया।
विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत योग मुद्रा कला एवं वैदिक मंत्रोच्चार ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बालिनी नृत्य एवं ब्रज लोक नृत्य की मनोहारी प्रस्तुतियाँ दी गईं, जिससे आयोजन को अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक स्वरूप प्राप्त हुआ।