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खुराफात करे और मजे काटे, यह ईश्वरीय व्यवस्था में नहीं, ईश्वरीय व्यवस्था को भूलने के कारण ही झेलनी पड़ती हैं परेशानियां-अपर मुख्य सचिव समाज कल्याण

Gargachary Times 28 February 2026, 18:56 78 views
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खुराफात करे और मजे काटे, यह ईश्वरीय व्यवस्था में नहीं, ईश्वरीय व्यवस्था को भूलने के कारण ही झेलनी पड़ती हैं परेशानियां-अपर मुख्य सचिव समाज कल्याण
अपर मुख्य सचिव समाज कल्याण एवं सैनिक कल्याण विभाग तथा महानिदेशक उपाम उ.प्र. शासन एल. वेंकटेश्वर लू ने कलैक्ट्रेट सभागार में विकसित उत्तर प्रदेश-समर्थ उत्तर प्रदेश 2047 संकल्प से समृद्धि तक नशा मुक्त भारत अभियान के तहत कर्मयोग, मद्य निषेध एवं विकसित भारत पर आधारित संगोष्ठी में कर्मयोग पर चर्चा करते हुए कहा कि कर्म मानव सेवा का आधार है और आत्मविकास का भी माध्यम है, चरित्र निर्माण कर्म से ही होता है और मेहनत का कोई विकल्प नहीं, मानव सभ्यता की वर्तमान प्रगति हमारे पूर्वजों के निरंतर कर्म का परिणाम है, जिसके कारण आज मानव समाज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग तक पहुंच सका है। उन्होने भारतीय संस्कृति, ऋषि परंपरा और जीवन दर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत भूमि केवल भौगोलिक इकाई नहीं बल्कि ज्ञान, तप, अनुशासन और मानव उत्थान की महान परंपरा की धरोहर है, यहां हजारों वर्षों से मानव जीवन को श्रेष्ठ बनाने के लिए गहन चिंतन हुआ और ऐसे जीवन सिद्धांत विकसित किए गए हैं, जिनसे व्यक्ति वर्तमान जीवन को भी सुखमय बना सकता है और भविष्य को भी सार्थक दिशा दे सकता है। उन्होंने कहा कि आज के समय में समाज के सामने सबसे बड़ी चुनौती मन की चंचलता, बढ़ती अधीरता, क्रोध और अनियंत्रित इच्छाओं का विस्तार है, व्यक्ति का मन स्थिर क्यों नहीं रहता और क्रोध क्यों उत्पन्न होता है, इस प्रश्न का उत्तर भारतीय दर्शन बहुत स्पष्ट रूप से देता है। उन्होंने बताया कि क्रोध का मूल कारण कामना अर्थात इच्छाएं हैं, जब व्यक्ति किसी वस्तु, सुख या उपलब्धि की तीव्र इच्छा करता है और वह पूरी नहीं होती या उसकी पूर्ति में बाधा आती है, तब मन में क्रोध उत्पन्न होता है। उन्होंने शास्त्रीय सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि विषयों का निरंतर चिंतन मोह पैदा करता है, मोह से कामना और कामना से क्रोध उत्पन्न होता है, यही आगे चलकर व्यक्ति के विवेक को कमजोर कर देता है। महानिदेशक उपाम ने कहा कि आज का युवा बाहरी आकर्षणों से घिरा हुआ है, मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया के माध्यम से निरंतर नई-नई जानकारियां और दृश्य सामने आते रहते हैं, जिससे मन विचलित होता है, तकनीक स्वयं में समस्या नहीं है बल्कि उसका उपयोग किस उद्देश्य से किया जा रहा है, यह महत्वपूर्ण है यदि वही मोबाइल शिक्षा, ज्ञान और सकारात्मक प्रेरणा के लिए उपयोग किया जाए तो वह विकास का साधन बन सकता है लेकिन यदि उसका उपयोग केवल मनोरंजन, गलत सामग्री या नशे जैसी आदतों को बढ़ाने के लिए किया जाए तो यह व्यक्ति के मानसिक और सामाजिक संतुलन को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति जन्म से बुरी आदतों वाला नहीं होता, वातावरण, मित्र मंडली, सामाजिक प्रभाव और निरंतर दोहराव से आदतें विकसित होती हैं, इसलिए सुधार की प्रक्रिया भी धैर्यपूर्ण और संवाद आधारित होनी चाहिए, व्यक्ति को अपमानित करने या भयभीत करने के बजाय उसे आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करना अधिक प्रभावी उपाय है। उन्होंने कहा कि निःस्वार्थ सेवा से व्यक्ति के भीतर संवेदनशीलता और आत्मबल का विकास होता है, समाज सेवा केवल दूसरों की सहायता नहीं बल्कि स्वयं के व्यक्तित्व निर्माण का माध्यम भी है। उन्होने कहा कि प्रत्येक कर्म का परिणाम निश्चित होता है, अच्छे और बुरे कार्यों का प्रभाव जीवन में अवश्य दिखाई देता है यदि व्यक्ति इस सत्य को समझ लें तो वह अपने कर्तव्यों का पालन ईमानदारी और समर्पण से करने लगता है। उन्होंने कहा कि ईमानदार शिक्षक, जिम्मेदार पुलिस अधिकारी, संवेदनशील डॉक्टर और नैतिक व्यापारी मिलकर ही स्वस्थ समाज का निर्माण करते हैं। जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने अपर मुख्य सचिव का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आपके प्रेरणादायी उद्गार हॉल में उपस्थित सभी अधिकारियों, कर्मचारियों, युवाओं के जीवन मंे बदलाव लाने का कार्य करेंगे। उन्होने कार्यक्रम में उपस्थित युवाओं का आव्हान करते हुए कहा कि वह मंच का लाभ उठाकर ज्ञान, संवाद और आत्मचिंतन के माध्यम से अपने जीवन को बेहतर बनाएं। उन्होने कहा कि समाज का विकास तभी संभव है, जब प्रत्येक व्यक्ति अपने भीतर सुधार लाने का प्रयास करंे और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाएं। उन्होने कहा कि यदि कोई व्यक्ति केवल कुछ समय के लिए भी आपके सानिध्य में रह लें, तो वह स्वयं को समृद्ध अनुभव करता है, आपके जीवन को निकट से देखने मात्र से ही व्यक्ति को अनुशासन, संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा की गहन शिक्षा प्राप्त होती है, केवल आपके शब्दों से ही नहीं बल्कि उनके मौन से भी शिक्षा मिलती है। उन्होंने कहा कि अपर मुख्य सचिव ने अपने जीवन और आचरण से यह दिखाया है कि किस प्रकार भौतिक जीवन और आध्यात्मिक दृष्टि के बीच संतुलन स्थापित किया जा सकता है, आपने कर्मफल सिद्धांत को अत्यंत सरल और सहज शब्दों में समझाया तथा निष्काम कर्म के वास्तविक अर्थ को व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से स्पष्ट किया, आपके विचारों में दर्शन की गहराई के साथ-साथ प्रशासनिक अनुभव की वास्तविकता भी दिखाई देती है, जो श्रोताओं को सीधे जीवन से जोड़ती है। उन्होने कहा कि यहां उपस्थित सभी लोगों के मन में एक समान भाव अवश्य उत्पन्न हुआ होगा कि जब वह इस सभागार में प्रवेश कर रहे थे और अब जब उनके उद्बोधन को सुनकर बाहर जाएंगे, तो स्वयं के भीतर एक सकारात्मक परिवर्तन का अनुभव करेंगे, ऐसा प्रतीत होता है कि आपके विचार केवल सुनने तक सीमित नहीं रहते बल्कि व्यक्ति को बेहतर मनुष्य बनने की प्रेरणा देते हैं और आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करते हैं, निश्चित रूप से यहां उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति यह अनुभव कर रहा होगा कि वह अपने जीवन में कुछ सकारात्मक बदलाव लाने का संकल्प लेकर जा रहा है। पुलिस अधीक्षक गणेश प्रसाद शाहा ने कहा कि भगवद्गीता का ज्ञान अत्यंत गहन होते हुए भी जीवन के लिए अत्यंत सरल और उपयोगी है, गीता हमें सिखाती है कि जगत और समाज की समस्त व्यवस्थाओं का केंद्र व्यक्ति स्वयं है, व्यक्ति ही समाज, राष्ट्र निर्माण की मूल इकाई है और व्यक्ति की उत्तरजीविता केवल कर्म के माध्यम से ही संभव है, बिना कर्म के व्यक्ति की कल्पना नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि जब हम कर्म की बात करते हैं तो कर्म कई प्रकार के हो सकते हैं, किंतु सबसे महत्वपूर्ण यह है कि व्यक्ति वर्तमान में क्या कर रहा है, अधिकांश लोग भविष्य की चिंता में उलझे रहते हैं जबकि वास्तविकता यह है कि आज किए गए कर्म ही भविष्य में परिणाम के रूप में सामने आते हैं यदि वर्तमान कर्म सकारात्मक, अनुशासित और नैतिक होंगे तो भविष्य स्वतः उज्ज्वल होगा जबकि गलत कर्मों का परिणाम नकारात्मक रूप में प्राप्त होगा। अध्यक्ष भारतीय चरित्र निर्माण संस्था रामकृष्ण गोस्वामी, राज्य मद्य निषेध अधिकारी आर.एल. राजवंशी, अपर पुलिस अधीक्षक अरूण कुमार ने संगोष्ठी मंे समाज निर्माण, युवा पीढ़ी के चरित्र विकास, मानसिक संतुलन, नैतिक मूल्यों, स्वस्थ जीवनशैली तथा जिम्मेदार नागरिकता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार व्यक्त किये। इस दौरान अपर जिलाधिकारी श्यामलता आनंद, उपायुक्त एन.आर.एल.एम. शौकत अली, जिला विकास अधिकारी अजय कुमार, परियोजना निदेशक डी.आर.डी.ए. सत्येंद्र कुमार, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी, गु्रप कैप्टन आर.के. शर्मा, जिला समाज कल्याण अधिकारी अशोक कुमार, पूर्व सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल सुरेश चन्द्र यादव सहित अन्य अधिकारी, कर्मचारी विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाचार्य, छात्र-छात्राएं आदि उपस्थित रहे।
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