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उत्तर प्रदेश वन विभाग और वाइल्डलाइफ एसओएस द्वारा संयुक्त अभियान में अपंग 'भीख मांगने वाले' हाथी को सुरक्षित बचाया

Gargachary Times 6 March 2026, 20:48 117 views
Mathura
उत्तर प्रदेश वन विभाग और वाइल्डलाइफ एसओएस द्वारा संयुक्त अभियान में अपंग 'भीख मांगने वाले' हाथी को सुरक्षित बचाया
उत्तर प्रदेश वन विभाग ने वाइल्डलाइफ एसओएस के सहयोग से एक महत्वपूर्ण बचाव अभियान में उत्तर प्रदेश के मऊ जिले से 26 वर्षीय नर हाथी को सफलतापूर्वक बचाया। अब इस हाथी का नाम वीर रखा गया है। हाथी ने बीते कई साल सड़कों पर भीख मांगने और धार्मिक जुलूसों में भाग लेने में बिताए, जिससे उसका पूरा जीवन कठोर श्रम, लगातार दुर्व्यवहार और शारीरिक दुर्बलता से भरा रहा। वाइल्डलाइफ एसओएस की विशेष बचाव टीम मथुरा स्थित हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र में इस हाथी को सुरक्षित लेकर आई है। वीर की हालत गंभीर बताई जा रही है। पशु चिकित्सकों द्वारा किए गए आकलन से पता चला है कि उसका बायां अगला पैर बुरी तरह मुड़ा हुआ है, जो जोड़ों में गठिया के संदेह, दाहिने पैर में जकड़न, बाएं पैर में तेज दर्द और सूजन, और चारों पैरों में अत्यधिक खराबी के कारण है। यह संभवतः कठोर और गर्म सड़कों पर वर्षों तक चलने, सवारी कराने और भारी बोझ ढोने का परिणाम है। हाथी की इस खराब स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए, वन विभाग के महत्वपूर्ण सहयोग से बचाव अभियान चलाया गया। उत्तर प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) और चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन, वन संरक्षक और प्रभागीय वन अधिकारी, मऊ से आवश्यक अनुमतियाँ प्राप्त करने के बाद, पशु चिकित्सक, देखभालकर्ता, चालक और सहायक कर्मचारियों से युक्त वाइल्डलाइफ एसओएस की टीम ने अभियान को सुरक्षित और कुशलतापूर्वक प्रबंधित करने के लिए स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर काम किया। वीर की यात्रा वाइल्डलाइफ एसओएस केंद्र तक 600 किलोमीटर से अधिक लंबी थी, जहाँ उसे खीरा, मटर, केला, फूलगोभी, पीपल के पत्ते जैसे ताजे फल और सब्जियां तथा मटर के पौधे, केले के तने और बरसीम जैसे चारे से अच्छी तरह पोषित किया गया। तीन दिवसीय व्यापक बचाव अभियान के बाद, वीर मथुरा स्थित भारत के पहले और एकमात्र विशेष हाथी अस्पताल में सुरक्षित पहुँच गया है, जो उन्नत निदान और उपचार सुविधाओं से सुसज्जित है। एलिफेंट हॉस्पिटल कैंपस में, वीर को उसकी स्थिति के अनुरूप एक व्यापक उपचार कार्यक्रम मिलेगा, जिसमें जोड़ों की सूजन, दर्द कम करना, घावों की देखभाल, पोषण संवर्धन और दीर्घकालिक सहायता को लक्षित किया जाएगा, और यह सब वाइल्डलाइफ एसओएस की विशेषज्ञ पशु चिकित्सा टीम की चौबीसों घंटे निगरानी में होगा। वाइल्डलाइफ एसओएस की पशु चिकित्सा सेवाओं के उप निदेशक, डॉ. एस. इलयाराजा ने बताया*, "वीर गंभीर रूप से टखने की कमजोरी (एंकिलोसिस), बाएं पैर में असहनीय दर्द और अंगों की गंभीर क्षति से पीड़ित है, ये सभी समस्याएं वर्षों के जबरन श्रम और दुर्व्यवहार का परिणाम हैं। हमारी तत्काल प्राथमिकता उसकी स्थिति को स्थिर करना, उसके दर्द को कम करना और हाथी अस्पताल में एक व्यवस्थित उपचार प्रक्रिया शुरू करना है।" मऊ के प्रभागीय वन अधिकारी, प्रभाकर पांडे आई.एफ.एस. ने कहा*, “शहरी सड़कों पर लंबे समय तक चलने के कारण हाथी को काफी तकलीफ हो रही थी। हाथी के स्वास्थ्य और भविष्य को ध्यान में रखते हुए यह बचाव अभियान आवश्यक था। हमें विश्वास है कि उसे वाइल्डलाइफ एसओएस द्वारा संचालित हाथी अस्पताल में सभी आवश्यक चिकित्सा सहायता मिलेगी।” वाइल्डलाइफ एसओएस की सह-संस्थापक और सचिव, गीता शेषमणि ने कहा*, "वीर के जैसी कहानी हमने कई बार देखी है, एक हाथी जो वर्षों की गुलामी से टूट चुका है। हमें राहत है कि वह आखिरकार सुरक्षित हाथों में है, और आशा है कि उसका बचाव भारत भर में हाथियों के लिए व्यापक जागरूकता और कार्रवाई को प्रेरित करेगा, जिसकी उन्हें तत्काल आवश्यकता है।" वाइल्डलाइफ एसओएस के डायरेक्टर कंज़रवेशन प्रोजेक्ट्स, बैजूराज एम.वी, ने टिप्पणी की, “वीर ने कई स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद लंबी यात्रा तय की। हमारी एम्बुलेंस में उसे पूरी यात्रा के दौरान आराम देने की सभी सुविधाएं मौजूद थीं। फिर भी, अपनी लंबी यात्रा पूरी करने के बाद वीर को अभी आराम और देखभाल की सख्त जरूरत है।” वीर का बचाव वाइल्डलाइफ एसओएस के चल रहे 'बेग्गींग एलीफैंट अभियान' का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य 2030 तक ऐसे 300 हाथियों का पुनर्वास करना और उन्हें दीर्घकालिक चिकित्सा देखभाल और आश्रय प्रदान करना है।
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