साठ फीट ऊंचे चंदन के रथ पर निकले ठाकुर गोदा रंगमन्नार, उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
Gargachary Times
13 March 2026, 18:46
87 views
Dharam
दावन। उत्तर भारत में दक्षिण भारतीय स्थापत्य शैली के प्रतीक विश्वप्रसिद्ध श्री रंगनाथ मंदिर के ब्रह्मोत्सव में शुक्रवार को आस्था का चरमोत्कर्ष देखने को मिला। चैत्र कृष्णपक्ष की नवमी तिथि पर ठाकुर गोदा रंगमन्नार भगवान लगभग पौने दो सौ वर्ष प्राचीन और साठ फीट ऊंचे विशालकाय चंदन के रथ पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देने निकले। इस भव्य दृश्य का साक्षी बनने के लिए समूचे वृंदावन में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा।
वैदिक परंपराओं के अनुसार, उत्सव का शुभारंभ तड़के ब्रह्म मुहूर्त में हुआ। ठाकुर रंगनाथ भगवान अपनी पत्नियों—श्रीदेवी और भूदेवी—के साथ निज गर्भगृह से पालकी में विराजमान होकर निकले। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 'मेष लग्न' के शुभ मुहूर्त में जैसे ही ठाकुर जी ने अपने दिव्याकर्षक रथ पर आसन ग्रहण किया, पूरा मंदिर परिसर 'भगवान रंगनाथ की जय' के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा।
मंदिर के मुख्य पुरोहित विजय किशोर मिश्र ने वैदिक रीति-रिवाज और मंत्रोच्चारण के साथ भगवान का विधि-वत पूजन-अर्चन संपन्न किया।
लगभग एक घंटे तक चली पूजा प्रक्रिया के पश्चात परंपरा के अनुसार 'सात कूपे' के धमाके और 'काली' के विशेष स्वर ने रथ प्रस्थान का संकेत दिया। संकेत मिलते ही भक्तों का उत्साह दोगुना हो गया। साठ फीट ऊंचे इस भारी-भरकम रथ को खींचने और ठाकुर जी की एक झलक पाने के लिए हजारों श्रद्धालुओं के बीच होड़ मच गई।
भ्रमण करते हुए रथ दोपहर के समय 'बड़ा बगीचा' पहुँचा, जहाँ भगवान ने कुछ समय विश्राम किया। इसके उपरांत रथ पुनः मंदिर के लिए रवाना हुआ। रथ घर पहुँचने पर ठाकुर जी को पालकी में विराजमान कर बगीची ले जाया गया। यहाँ भीषण गर्मी से राहत और शीतलता प्रदान करने के उद्देश्य से रंगीन फव्वारे चलाए गए, जिसका आनंद ठाकुर जी के साथ-साथ वहां उपस्थित भक्तों ने भी लिया।