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संविदा कर्मी की मौत पर परिजनों का भारी हंगामा, फीडर घेरकर शव के साथ धरने पर बैठे ग्रामीण

Gargachary Times 20 March 2026, 20:04 70 views
Agra
संविदा कर्मी की मौत पर परिजनों का भारी हंगामा, फीडर घेरकर शव के साथ धरने पर बैठे ग्रामीण
आगरा/आंवलखेड़ा। विद्युत वितरण उपखंड खंदौली। आंवल खेड़ा नयावास फिटर पर तैनात संविदा कर्मी इसरार खान की करंट की चपेट में आने से हुई मौत के बाद आज आवल खेड़ा क्षेत्र में भारी तनाव और आक्रोश देखने को मिला। शुक्रवार को इसरार का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव नयावास पहुँचते ही परिजनों और ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया। आक्रोशित भीड़ ने आवल खेड़ा नयावास स्थित बिजली घर (फीडर) को घेर लिया और शव को जमीन पर रखकर धरने पर बैठ गए। लाईन मेन इसरार खान करंट लगने से गेहूं के खेत में गिर गए खेत में तड़पते रहे, विभाग पर लापरवाही का आरोप परिजनों का आरोप है कि इसरार खान की जान विभाग की घोर लापरवाही के कारण गई है। हादसे के वक्त वह पोल पर काम कर रहे थे, तभी हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ गए और पास के गेहूं के खेत में जा गिरे। काफी देर तक वह वहीं तड़पते रहे, जिसके बाद ग्रामीणों की सूचना पर विभागीय कर्मचारी जागे। आनन फानन में उन्हें पहले आगरा गोयल हॉस्पिटल में भर्ती कराया जहां हालत गंभीर होने पर उन्हें नोएडा रेफर कर दिया, जहाँ इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। 6 बच्चों के सिर से उठा पिता का साया इसरार खान अपने परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे। वह अपने पीछे पत्नी शबाना और 6 मासूम बच्चों को छोड़ गए हैं, जिनमें सोनम (17), सुहाना (15), शिफा (13), सोफिया (11) और दो छोटे बेटे तैमूर (9) व तौफिक (7) शामिल हैं। आंवल खेड़ा क्षेत्र व गांव में मातम का माहौल है और हजारों की संख्या में लोग अंतिम विदाई देने उमड़ पड़े हैं। अधिकारियों का आश्वासन: 7.5 लाख मुआवजा और पत्नी को पेंशन हंगामे और घेराव की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और विद्युत विभाग के आला अधिकारी मौके पर पहुँच गए। परिजनों और अधिकारियों के बीच काफी देर तक चली वार्ता। मौके पर पहुँचे एसडीओ (SDO) ने परिजनों को शांत कराते हुए निम्नलिखित घोषणाएं की: * 7.5 लाख रुपये का मुआवजा: पीड़ित परिवार को 31 मार्च 2026 तक साढ़े सात लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि दे दी जाएगी। * पारिवारिक पेंशन: मृतक की पत्नी की पेंशन की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करने का आश्वासन दिया गया है। अधिकारियों के ठोस आश्वासन और मुआवजे की समय सीमा तय होने के बाद परिजन और ग्रामीण शांत हुए और शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने को राजी हुए।
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