टाइगर रिजर्व निर्माण विस्थापन के नाम से भयभीत है सैकड़ो परिवार
Gargachary Times
21 March 2026, 20:44
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Dholpur
सुन चुके जब हाल मेरा लेके अंगड़ाई कहा।
किस तरह का दर्द हाकिम तेरे अफ़साने में है।।
शायर की यह पंक्तियां धौलपुर टाइगर रिजर्व क्षेत्र में आने वाले हजारों लोगों के हाल पर सटीक बैठ रही हैं जहां सरकार आदमियों को विस्थापित कर आदमखोरों के स्वच्छंद विचरण का इंतजाम करने पर तुली हुई है टाइगर रिजर्व का ताना-बाना बुनकर आदमियों की बस्ती को उजाड़ने का मानव पूरा मन बना चुकी है उधर इस क्षेत्र में सैकड़ो बरसों से रह रहे हजारों परिवार भविष्य को लेकर चिंता में देखे जा सकते हैं तथा उनके मन में विस्थापन के भयसे अनेक आशंकाओं ने जन्म ले लिया है कहनेन को तो यह प्रदेश का पांचवा टाइगर रिजर्व होगा जिसमें धौलपुर एवं करौली के एक सौ आठ गांवों को चिन्हित किया गया है तथा यहां रह रहे लोगों के विस्थापन पर सरकार ने मंथन शुरू कर दिया है टाइगर रिजर्व बनने पर यहां रह रहे लोगों को भविष्य की चिंताएं सताने लगी हैं
इस टाइगर रिजर्व को बनाने का सफर 2022 में शुरू हुआ जब प्रदेश सरकार ने प्रदेश में पांचवा टाइगर रिजर्व बनाने का मन बनाया तथा इसका मसौदा तैयार कर प्रस्ताव राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण को भेजा गया प्राधिकरण ने इसे विकसित करने की मंजूरी फरवरी 2023 में दी अगस्त 2023 में देश के 54 विभाग संरक्षण क्षेत्र की अंतिम स्वीकृति मिलने पर यह स्पष्ट हो गया किस क्षेत्र में टाइगर रिजर्व बनना निश्चित है
ऐतिहासिक तौर पर देखें तो इस क्षेत्र में हमेशा से ही बाघों का मूवमेंट देखा गया है टाइगर रिजर्व रणथंबोर रामगढ़ मिस्त्री एवं मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व से बने विस्तृत टायगर लैंडस्केप से जुड़ा हुआ है चंबल नदी उसे टाइगर रिजर्व की पूर्वी सीमा का निर्धारण करती है मध्य प्रदेश के राष्ट्रीय उद्यान के निकट उपस्थित टाइगर रिजर्व के होने से इन क्षेत्रों के बीच जानवरों की आवाज आई को सुगमता प्रदान करेगी चंबल के बीहड़ किनारे पाए जाने वाली भूगोल की विशेषताओं के कारण भी इसे टाइगरों के अनुकूल माना गया है नदियों के कारण ही सैकड़ो वर्षों से कटाव के कारण भूल भुलैया जैसे स्थान निर्मित हो गए हैं यह विशाल टाइगर रिजर्व 1075 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है इसके कुल क्षेत्र का आधा क्षेत्र 495 किलोमीटर बफर जॉन के रूप में चिन्हित है 1960 के दशक तक चंबल क्षेत्र में भालू एवं जंगली कुत्ते पाए जाते थे एक और जहां सरकार टाइगर रिजर्व को वन्य जीवों के लिए जीवनदायक मान रही है वहीं दूसरी ओर क्षेत्र में पीडियो से बसे परिवार जिनकी कई पीढियां ने ऊंची नीची जमीन को समतल बनाकर जीविकोपार्जन के लिए खेती योग्य बनाया टापूओ को समतल किया उसे जमीन को खाली करने का ख्याल आते ही लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं लोगों की चिंता का इजहार बाड़ी विधायक जसवंत सिंह गुर्जर विधानसभा सत्र में कर चुके हैं तो बसेड़ी विधायक संजय की उपस्थिति में कई बार क्षेत्र में पंचायती आयोजित की गई हैं तथा हर हाल में टाइगर रिजर्व नहीं बनने देने का संकल्प लिया गया है किसान जहां टाइगर रिजर्व का विरोध शुरू सही करते आ रहे हैं ऐसे मां के विस्थापन की प्रक्रिया क्या होगी तथा ऐसी जमीन जिसे यह परिवार कई पीढियां से करते आ रहे हैं किंतु रिकॉर्ड मां का नाम दर्ज आज तक नहीं हुआ है ऐसे में क्या सरकार इन जमीनों का मुआवजा कागज किसानों को देगी यह एक चिंता का विषय है आल्हा के राज्य सरकार ने आश्वासन दिया है कि लोगों को उनकी इच्छा के बिना विस्थापित नहीं किया जाएगा तथा वहां रह रहे लोगों का पूरा ख्याल रखा जाएगा देखना यह है कि भविष्य में विस्थापन की प्रक्रिया के लिए राज्य सरकार किया नियम कानून बनाती है फिलहाल तो सरकार टाइगर रिजर्व की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में लगी है दूसरी और क्षेत्र के निवासी अपने क्षेत्रीय विधायकों को अपनी परेशानियों से वाकिफ करा चुके हैं कई बार महापंचायतों मैं अपना विरोध पुरजोर रूप से व्यक्त कर चुके हैं