प्रदेश में 30 मार्च से 15 जून, 2026 तक होगी गेहूं की सरकारी खरीद
Gargachary Times
23 March 2026, 19:38
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Lucknow
उत्तर प्रदेश मंत्रिपरिषद की बैठक के उपरांत कृषि मंत्री श्री सूर्य प्रताप शाही ने प्रेस वार्ता में बताया कि खाद्य एवं रसद विभाग के प्रस्ताव के अनुसार इस वर्ष भारत सरकार द्वारा गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2,585 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। यह मूल्य पिछले वर्ष की तुलना में 160 रुपये प्रति क्विंटल अधिक है। प्रदेश में गेहूं की सरकारी खरीद 30 मार्च, 2026 से प्रारम्भ होकर 15 जून, 2026 तक चलेगी।
कृषि मंत्री ने जानकारी दी कि राज्य के सभी 75 जनपदों में कुल 6,500 क्रय केंद्र संचालित किए जाएंगे। खरीद प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए कुल 8 एजेंसियां नामित की गई हैं, जिनमें एफ.सी.आई., खाद्य और रसद विभाग की मार्केटिंग शाखा, उत्तर प्रदेश मंडी परिषद, पी.सी.एफ., पी.सी.यू., यू.पी.एस.एस., नेफेड, एन.सी.सी.एफ. और भारतीय राष्ट्रीय उपभोक्ता सहकारी संघ मर्यादित शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, इस बार कृषि उत्पादक संगठनों (FPO) और कृषि उत्पादक कंपनियों (FPC) को भी क्रय एजेंसियों के माध्यम से खरीद की अनुमति दी गई है, बशर्ते उनके खाते में 20 लाख रुपये की धनराशि हो और उनका पंजीकरण एक वर्ष पुराना हो।
सरकार ने किसानों के हित में बड़ा निर्णय लेते हुए उतराई, छनाई और सफाई के मद में 20 रुपये प्रति क्विंटल अतिरिक्त देने का प्रावधान किया है। इस अतिरिक्त व्यय का लगभग 60 करोड़ रुपये का भार मंडी परिषद वहन करेगी। श्री शाही ने बताया कि मुख्यमंत्री जी के निर्देशानुसार गेहूं खरीद का लक्ष्य 30 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर अब 50 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। किसानों को बिचौलियों के प्रभाव से बचाने के लिए संपूर्ण व्यवस्था को ऑनलाइन कर दिया गया है और पंजीकरण हेतु पोर्टल खोल दिए गए हैं।
इस दौरान बताया गया कि इस वर्ष प्रदेश में गेहूं की फसल अत्यंत बेहतर है और कृषि विभाग द्वारा समय पर पर्याप्त बीज उपलब्ध कराए गए थे। खरीद केंद्रों पर किसानों के लिए छाया और पानी जैसी बुनियादी व्यवस्थाओं के निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बटाईदारों और नॉमिनी के माध्यम से भी गेहूं बेचने का विकल्प दिया गया है। कृषि विभाग में पहले से पंजीकृत किसानों को एसएमएस के माध्यम से खरीद सम्बन्धी जानकारी भेजी जाएगी, जिससे आपदा की स्थिति या सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित किया जा सके।