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झारखंड में 'डांसिंग' व्यापार से बचाया गया स्लॉथ भालू, आगरा के संरक्षण केंद्र में मिल रहा गहन उपचार

Gargachary Times 23 March 2026, 19:47 55 views
Mathura
झारखंड में 'डांसिंग' व्यापार से बचाया गया स्लॉथ भालू, आगरा के संरक्षण केंद्र में मिल रहा गहन उपचार
झारखंड के जामतारा में वन विभाग ने अवैध रूप से प्रदर्शन करने वाले भालुओं के व्यापार से एक वयस्क मादा स्लॉथ भालू को बचाया है, जिसकी उम्र लगभग 10-12 वर्ष है। पहले उसे कैद में रखा गया था और प्रदर्शन दिखाने के लिए उसका इस्तमाल किया जाता था। अब उसे आगरा भालू संरक्षण केंद्र में स्थानांतरित कर दिया गया है, जहां अब वह वाइल्डलाइफ एसओएस की विशेष दीर्घकालिक देखभाल में रहेगी। झारखंड के जामतारा जिले में एक भालू को बचाया गया, जब वन विभाग ने कलंदर समुदाय के एक सदस्य को पकड़ा, जो भालू का इस्तेमाल प्रदर्शन के लिए कर रहा था। हस्तक्षेप करने पर पता चला कि भालू को रस्सी और जंजीर से बांधा गया था, जिससे उसे काफी शारीरिक और मानसिक पीड़ा हो रही थी। वन अधिकारियों द्वारा उसे सिज़ करने के बाद, वाइल्डलाइफ एसओएस की रैपिड रिस्पांस यूनिट मौके पर पहुची और भालू को सुरक्षित रूप से आगरा लेकर आई, जिसका नाम अब प्यार से ग्रेसी रखा गया है। कैद में रहने के दौरान भालू के शरीर में गंभीर शारीरिक परिवर्तन हुए हैं। उसके सामने के नुकीले दांत जबरदस्ती निकाल दिए गए थे, जिससे वह काटने में असमर्थ हो गई थी। उसे दस्त, रस्सी से बांधे जाने वाले स्थान के आसपास घाव और चोटों के कारण वह बाईं आंख से देखने में असमर्थ है। इन चुनौतियों के बावजूद, बचाव के दौरान वह अपेक्षाकृत शांत रही और उसका स्वभाव सौम्य और विनम्र बना रहा। वाइल्डलाइफ एसओएस की पशु चिकित्सा सेवाओं के उप निदेशक, डॉ. एस. इलयाराजा ने बताया “हमारे केंद्र में पहुंचने पर भालू शुरू में डरी हुई और झिझकती हुई लग रही थी। हालांकि, उसके व्यवहार में जल्द ही बदलाव के संकेत मिलने लगे – वह अपने पिछले पैरों पर खड़ी होने लगी, गोल-गोल घूमने लगी और जोर-जोर से आवाजें निकालने लगी। ये हरकतें उन भालुओं के व्यवहार से मेल खाती हैं, जिन्हें पहले प्रदर्शन दिखाने का प्रशिक्षण दिया जाता था और लंबे समय तक नकारात्मक और शारीरिक बल प्रयोग के माध्यम से प्रशिक्षित किया जाता था। देखभाल करने वालों ने यह भी देखा कि उसकी थूथन में फंसी रस्सी से उसे असुविधा हो रही थी, जिससे उसकी खाने की क्षमता प्रभावित हो रही थी।” वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ, कार्तिक सत्यनारायण ने कहा*, “हालांकि भारत ने वर्षों पहले ‘नाचने वाले’ भालू की प्रथा को सफलतापूर्वक समाप्त कर दिया था, लेकिन इस तरह के एकलौते मामले हमें याद दिलाते हैं कि खतरा पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। आज जब हम विश्व भालू दिवस मना रहे हैं, तो यह बचाव हमें भालू संरक्षण में निरंतर सतर्कता और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सहयोग की भूमिका की याद दिलाता है। हम यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि इस भालू को वह देखभाल और सम्मान मिले जिससे वह लंबे समय से वंचित रही है।” वाइल्डलाइफ एसओएस के डायरेक्टर कंज़रवेशन प्रोजेक्ट्स, बैजूराज एम.वी. ने बताया, “वर्तमान में भालू को धीरे-धीरे अनुकूल आहार दिया जा रहा है, जिसमें रोटी और दलिया एवं तरबूज और पपीता जैसे फल और आहार पूरक शामिल हैं। देखभालकर्ता विश्वास कायम करने और प्राकृतिक व्यवहार को प्रोत्साहित करने के लिए सकारात्मक कंडीशनिंग तकनीक भी अपना रहे हैं, जिससे उसके दीर्घकालिक पुनर्वास में सहायता मिलेगी। हम भालू के बचाव और पुनर्वास के लिए स्थानांतरण में अमूल्य सहयोग के लिए जामतारा के डी.एफ.ओ के प्रति आभार व्यक्त करते हैं।”
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