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मैं शब्द हूं पुस्तक का लोकार्पण

Gargachary Times 29 March 2026, 20:46 164 views
Mathura
मैं शब्द हूं पुस्तक का लोकार्पण
हिंदी प्रचार सभा, मथुरा के तत्वावधान में वरिष्ठ कवि एवं साहित्यकार श्री निशेश जार की नवीन काव्य कृति "मैं शब्द हूं " का लोकार्पण मथुरा पब्लिक स्कूल के सभागार में आयोजित किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बाल अधिकार संरक्षण आयोग उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष डॉ देवेंद्र शर्मा ने कहा "आज भौतिकवादी परिस्थितियों में मनुष्य संवेदनहीन होता जा रहा हैं। आज सामाजिक रिश्ते खत्म हो रहे हैं। मनुष्य विकृतियों से घिर रहा है। ऐसी स्थिति में कवि में ही वह ताकत है, जो लाखों लोगों को प्रेरित कर सकता है। ऐसी स्थिति में कवियों को इन संवेदनहीन परिस्थितियों को बदलना ही होगा। " उन्होंने कविताओं को सामाजिक समस्याओं को उठाने का एक प्रमुख माध्यम भी बताया। कार्यक्रम के विशिष्ट वक्ता डॉ अनिल गहलोत ने पुस्तक के भावों को अपने शब्दों के रूप में प्रकट किया ।उन्होंने कहा "नई कविता को प्रभावी बनाने के लिए निशेश जार ने उनमें सरलता संप्रेषणनीयता एवं भाव प्रवणता को प्रमुख स्थान दिया है। निशेश जार द्वारा लिखी गई कविताएं प्रकृति के प्रति संवेदना और प्रेम के प्रति समर्पित हैं । कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि श्री संतोष सिंह जी ने निशेश जार द्वारा रचित प्रणीत पुस्तक "मैं शब्द हूं" की संपूर्ण समीक्षा की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता मथुरा के वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि डॉ रमाशंकर पांडे ने की। उन्होंने कहा "जो लिखने के लिए लिखा जाए वह पद्य है और जो कहने के लिए लिखा जाए वह कविता है। कविता मन से तन तक, तन से जीवन तक, जीवन से जीवन के विभिन्न पथों तक उपजे भाव है। " निशेश जार की कविताएं समय के धरातल पर भावनाओं की अद्भुत गहराई है, जिसमें आम आदमी का दर्द, विषाद, दुख, कुंठाएं और अनेक विसंगतियां बंधी हुई हैं । वे समस्त तत्वों को अपने भावों में जोड़कर आम आदमी की पीड़ा को व्यक्त करती हैं।" उन्होंने निशेश जार को आशावादी कवि कहा है, जो इन समस्त दर्द भरे भावों में भी आशा की डोर को पकड़े समाज को दिशा प्रदान कर रहे हैं। " कार्यक्रम का संचालन कवि अनुपम गौतम ने किया। आभार श्री निशेश जार ने व्यक्त किया। कार्यक्रम के द्वितीय चरण में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। काव्य गोष्ठी में कवि राहुल गुप्ता ने अपनी व्यंग्य रचना सुनाई । गीतकार विनीत गौतम ने "आदमी को खुदा कहना अच्छा नहीं लगता" पंक्तियां सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। आचार्य मूलचंद शर्मा ने शारदे वंदना एवं वृंदावन की कवयित्री रेनू उपाध्याय ने अपनी ग़ज़ल "किसी की पीर बेगानी नहीं है, नई कोई कहानी भी नहीं है " सुनाई । गोवर्धन के कवि हरी बाबू ओम ने "मैं भीतर गया मैं भी तर गया, मैं मर गया होता, तो मैं बच गया होता" कविता सुनाकर सभी को आनंदित किया। इस अवसर पर डॉ नीतू गोस्वामी, चित्रांश रजनीश, मनीष चतुर्वेदी, हरी बाबू ओम, विनोद गौड़, अनुपम गौतम, डॉ अंजीव अंजुम, संतोष रिचा , रूपेश धनगर सहित अनेक कवियों एवं कवयित्रियों ने अपने विचार एवं रचनाएं प्रेषित कीं।
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