श्रद्धा पर भारी पड़ा अहंकार: बांके बिहारी मंदिर की परंपराओं से खिलवाड़, नहीं सजा फूल बंगला"
Gargachary Times
30 March 2026, 21:09
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Mathura
वृंदावन। विश्व प्रसिद्ध ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में पिछले कुछ समय से चल रहा प्रशासनिक और आंतरिक विवाद अब ठाकुर जी की प्राचीन परंपराओं को चोट पहुँचाने लगा है। सोमवार को मंदिर के इतिहास में संभवतः पहली बार एक ऐसी स्थिति देखी गई जिसने भक्तों और स्थानीय निवासियों को झकझोर कर रख दिया। पावर कमेटी और गोस्वामी समाज के बीच बढ़ते आपसी मतभेदों के कारण सोमवार को राजभोग सेवा के समय ठाकुर जी का भव्य 'फूल बंगला' नहीं सजाया जा सका।
हैरानी की बात यह है कि जहाँ बांके बिहारी मंदिर में फूल बंगला बनवाने के लिए भक्तों को वर्षों तक अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है, वहीं सोमवार को मंदिर प्रशासन की ओर से यह तर्क सामने आया कि फूल बंगला बनवाने के लिए कोई 'यजमान' उपलब्ध नहीं था। स्थानीय लोगों और जानकारों का मानना है कि यह केवल एक प्रशासनिक बहाना है। असल कारण पावर कमेटी के बढ़ते हस्तक्षेप और गोस्वामी समाज के साथ जारी उनका टकराव है, जिसके चलते सेवा-पूजा की पुरानी पद्धतियों का मानमर्दन किया जा रहा है।
ब्रज की परंपरा में फूल बंगले का विशेष महत्व है, जो ठाकुर जी को शीतलता प्रदान करने के लिए श्रद्धापूर्वक सजाया जाता है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि कमेटी के कुछ निर्णयों के विरोध स्वरूप इस तरह की परिस्थितियाँ उत्पन्न हो रही हैं। यदि यही गति रही, तो आने वाले समय में अन्य उत्सवों और दैनिक रीति-रिवाजों पर भी संकट के बादल मंडरा सकते हैं।
मंदिर से जुड़े पुराने सेवायतों और भक्तों में इस घटना को लेकर गहरा रोष है। चर्चा का विषय यह है कि क्या कमेटी के आपसी अहंकार के बीच ठाकुर जी की सेवा को बलि का बकरा बनाया जा रहा है। करोड़ों की आस्था के केंद्र में 'यजमान न मिलने' जैसी स्थिति आखिर पैदा कैसे हुई। आगामी दिनों में क्या अन्य प्राचीन परंपराओं के साथ भी ऐसा ही समझौता किया जाएगा?
फिलहाल, भक्त इस बात से दुखी हैं कि उनके आराध्य की सेवा में प्रशासनिक खींचतान आड़े आ रही है। अब देखना यह होगा कि मंदिर प्रबंधन और प्रशासन इस स्थिति को संभालने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।