वृंदावन में ‘सखी’ रूप में सजते हैं बजरंगबली, लहंगा-चोली पहन करते हैं युगल सरकार की सेवा
Gargachary Times
1 April 2026, 20:34
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Mathura
वृंदावन। भक्ति और वैराग्य की नगरी श्रीधाम वृंदावन अपने भीतर कई आध्यात्मिक रहस्यों को समेटे हुए है। यहाँ हनुमानजी केवल महावीर या ब्रह्मचारी रूप में ही नहीं, बल्कि एक कोमल हृदय ‘सखी’ के रूप में भी पूजे जाते हैं। वृंदावन स्थित मिथिला कुंज आश्रम में पवनपुत्र हनुमान का ‘चारुशिला सखी’ अवतार भक्तों के आकर्षण और अटूट श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है।
आमतौर पर हनुमानजी को उनके अदम्य बल और शौर्य के लिए जाना जाता है, लेकिन मिथिला कुंज में वे लहंगा-चोली और आभूषणों से सुसज्जित होकर श्री सीताराम युगल सरकार की सेवा में लीन दिखाई देते हैं। इस दिव्य विग्रह के एक हाथ में पूजन की थाली और दूसरे हाथ में चंवर है, जो निकुंज सेवा के प्रति उनके समर्पण को दर्शाता है।
शास्त्रों में वर्णित है यह स्वरूप
मंदिर के महंत महामंडलेश्वर किशोरी शरण महाराज के अनुसार, हनुमानजी के इस स्वरूप की प्राण-प्रतिष्ठा जगतगुरु निंबार्काचार्य श्री राधेश्याम शरण देवाचार्य महाराज द्वारा की गई थी। इस सखी स्वरूप का उल्लेख श्री हनुमत संहिता, अगस्त संहिता और लोमश रामायण जैसे प्राचीन ग्रंथों में भी विस्तार से मिलता है। मान्यता है कि वे यूथेश्वरी श्री चंद्रकला सखी के सान्निध्य में मुख्य सखी के रूप में युगल जोड़ी की नित्य सेवा करते हैं।
भक्तों का विश्वास है कि बजरंगबली के इस स्वरूप के दर्शन करने से न केवल संकटमोचन की कृपा मिलती है, बल्कि भक्त को प्रभु श्री राम और माता जानकी के परम सानिध्य का फल भी सुलभ हो जाता है।
"यह स्वरूप केवल श्रृंगार नहीं, बल्कि सेवा की उस पराकाष्ठा का प्रतीक है जहाँ भक्त अपने आराध्य के सुख के लिए स्वयं को पूरी तरह समर्पित कर देता है।"