अष्टयाम लीला रस पान करने मात्र से हो जाता है प्रभु का सानिध्य - डॉ श्री राजेंद्र दास देवाचार्य
Gargachary Times
3 April 2026, 20:52
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Dharam
वृंदावन। श्री सीता राम जी की निकुंज अष्टयाम लीला उनकी दैनिक दिनचर्या का भाव वर्णन है, जिसकी रस चर्चा मात्र से जीव को प्रभु का वह सानिध्य प्राप्त हो जाता है जो ऋषि मुनियों सहित बड़े बड़े साधकों को भी प्राप्त नहीं हो पाता। उक्त विचार स्थानीय पानी घाट स्थित श्री पहाड़ी बाबा भक्तमाली गौशाला में आयोजित श्री मद्जगदगुरु द्वाराचार्य श्री मलूक दास जी महाराज की 452 वें जयंती महोत्सव के अंतर्गत श्री सीताराम निकुंज अष्टयाम लीला दर्शन एवं रसचर्चा के पंचम दिवस उत्थापनयाम लीला रस चर्चा में बोलते हुए व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि दोपहर के भोजन उपरांत जब श्री सीताराम युगल सरकार विश्राम करते हैं, तो सायंकाल में उनको विश्राम से उठाने, श्रृंगार आदि करने तथा विहार, जल कैली क्रीड़ा का दर्शन एवं रस चर्चा ही उनकी अष्टयाम लीला के उत्थापनयाम की चर्चा एवं लीला दर्शन के माध्यम से उनका भावपूर्ण स्मरण का मूल है। इस अवसर पर राज्यसभा सांसद एवं शिवसेना (उद्धव गुट) नेत्री श्रीमती प्रियंका चतुर्वेदी के साथ साथ गोरेलाल पीठाधीश्वर श्री किशोर प्रवेश दास जू महाराज, अयोध्या वाले महाराज एवं देश के विभिन्न हिस्सों से पधारे सुप्रसिद्ध संत - महंत, श्री रसिक माधव दास जी महाराज, धनंजय दास जी, गंगा दास जी, अनुराग दास जी आदि सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भी कथा एवं लीला का रसास्वादन किया।