महाप्रभु वल्लभाचार्य ने मुगल काल में सनातन धर्म को दी नई संजीवनी: पंडित बिहारी लाल वशिष्ठ
Gargachary Times
14 April 2026, 20:35
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Mathura
वृंदावन। सेवाकुंज स्थित गिरधरनाथ ग्राम में अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा के तत्वाधान में पुष्टिमार्ग के प्रणेता जगद्गुरु महाप्रभु वल्लभाचार्य का प्राकट्य उत्सव धूमधाम से आयोजित किया गया। इस अवसर पर ब्रजमंडल के विप्र जनों ने भारी संख्या में एकत्रित होकर महाप्रभु के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महासभा के ब्रज प्रदेश अध्यक्ष पंडित बिहारी लाल वशिष्ठ ने कहा कि महाप्रभु वल्लभाचार्य ने भगवान श्री कृष्ण एवं यमुना जी की लीलाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया। उन्होंने कहा, महाप्रभु ने श्रीमद्भागवत की 'सुबोधिनी टीका' लिखकर कृष्ण लीलाओं को जन-जन तक पहुँचाया। भगवान श्री कृष्ण के बाद यदि किसी ने ब्रज चौरासी कोस का वैदिक सीमांकन किया, तो वह महाप्रभु वल्लभाचार्य ही थे।
उत्सव के दौरान पुष्टिमार्गीय संप्रदाय के आचार्य श्री हरि सुरेशाचार्य को उनके धार्मिक अवदान के लिए 'सनातन धर्म गौरव सम्मान' से सम्मानित किया गया।
संगोष्ठी में वक्ताओं ने महाप्रभु के योगदान पर विस्तार से चर्चा की। राजेश पाठक एवं प्रदीप गोस्वामी (महामंत्री) ने कहा कि मुगल काल की विषम परिस्थितियों में सनातन धर्म को जीवंत रखने में महाप्रभु की भूमिका अतुलनीय रही।
अजय शर्मा एवं आचार्य गोपाल भैया ने बताया कि महाप्रभु ने वृंदावन में अपनी पहली बैठक स्थापित की और देशभर में 84 बैठकों का निर्माण कर भक्ति का मार्ग प्रशस्त किया।
अनिल कृष्ण शास्त्री ने रेखांकित किया कि समाज को 'मानसी पूजा' का दिव्य संदेश महाप्रभु ने ही दिया, जिससे भक्त अंतर्मन से भगवान से जुड़ सके।
कार्यक्रम का कुशल संचालन ब्रज प्रदेश महामंत्री पं. राजेश पाठक ने किया। इस अवसर पर करुणा शंकर त्रिवेदी, गिरिराज शरण शर्मा, देवेंद्र गौतम, बालो पंडित, श्याम बिहारी चतुर्वेदी, अशोक गोस्वामी, सुनील वशिष्ठ, पूरन पांडे, बृजेश गिरी और राजेश शर्मा सहित अनेक विप्र जन उपस्थित रहे।