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निवर्तमान जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने अपने विदाई समारोह में भावुक उद्बोधन

Gargachary Times 21 April 2026, 20:38 124 views
Mainpuri
निवर्तमान जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने अपने विदाई समारोह में भावुक उद्बोधन
मैनपुरी: जनपद की प्रगति केवल योजनाओं और संसाधनों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उसे वास्तविक गति देने का कार्य वहां कार्यरत अधिकारियों, कर्मचारियों और आमजन के सामूहिक प्रयासों से होता है। उन्होंने अपने लगभग डेढ़ वर्ष के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि जब मैनपुरी में कार्यभार ग्रहण किया था, तब उनके मन में स्वाभाविक रूप से कुछ आशंकाएं थीं, मैनपुरी जनपद से पूर्व में कोई विशेष परिचय नहीं था और एक नए स्थान पर कार्य प्रारंभ करते समय परिस्थितियों को लेकर मन में कई प्रकार के प्रश्न उठते थे हालांकि यहां आने के बाद उन्हें जिस प्रकार का सहयोग, अपनापन और कार्य के प्रति समर्पण देखने को मिला, उसने सभी आशंकाओं को पूरी तरह समाप्त कर दिया। उन्होंने कहा कि मैनपुरी के लोग अत्यंत संवेदनशील, सहयोगी और सकारात्मक सोच रखने वाले हैं, यहां के अधिकारी, कर्मचारी अपने दायित्वों के प्रति गंभीर हैं और अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी ईमानदारी और लगन से करते हैं। उन्होंने कहा कि राजस्व कार्यों, विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और राजस्व वसूली जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में जनपद ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं, जिसका श्रेय पूरी टीम को जाता है। श्री सिंह ने कहा कि कई बार ऐसा होता है कि किसी जनपद की सफलता का श्रेय नेतृत्व को मिल जाता है जबकि वास्तविकता यह होती है कि उस सफलता के पीछे पूरी टीम का योगदान होता है। उन्होंने कहा कि उन्हें जो भी सम्मान और प्रशंसा मिली है, वह उनके अकेले के प्रयासों का परिणाम नहीं, बल्कि सभी अधिकारियों, कर्मचारियों के सामूहिक परिश्रम का प्रतिफल है। उन्होने कहा कि सच्चा लीडर वही होता है, जो हर व्यक्ति में क्षमता देखता है और उसे विकसित करने का प्रयास करता है, किसी अधिकारी, कर्मचारी को यह कहकर अलग कर देना कि वह काम नहीं कर सकता, यह सही दृष्टिकोण नहीं है बल्कि नेतृत्व का कार्य यह है कि वह हर व्यक्ति को अवसर दे, उसे मार्गदर्शन प्रदान करे और उसकी क्षमताओं को उभारे, यदि किसी कर्मचारी से अपेक्षित कार्य नहीं हो पाता, तो यह केवल उस कर्मचारी की नहीं बल्कि नेतृत्व की भी जिम्मेदारी है। उन्होंने स्वीकार किया कि कार्य के दौरान कई बार उनसे कठोर शब्दों का प्रयोग हो जाता है, जिसे वह अपनी कमजोरी मानते हैं, पिछले 15-20 वर्षों से इस कमजोरी को दूर करने पर कार्य कर रहे हैं और निरंतर प्रयासरत् हैं कि अपने व्यवहार को अधिक संतुलित और सकारात्मक बना सकें। उन्होंने कहा कि वह प्रतिदिन यह संकल्प लेते हैं कि सभी से मुस्कुराकर मिलेंगे और किसी को भी अपने शब्दों से आहत नहीं करेंगे लेकिन कभी-कभी वह इस संकल्प में पूरी तरह सफल नहीं हो पाते जिसका उन्हें पछतावा भी होता है। उन्होंने कहा कि एक प्रशासनिक अधिकारी के जीवन में बाहरी चुनौतियों के साथ-साथ आंतरिक संघर्ष भी होते हैं, वास्तविक संघर्ष बाहरी परिस्थितियों से अधिक हमारे भीतर होता है, बाहरी दबाव केवल परिस्थितियां बनाते हैं लेकिन उन परिस्थितियों में हमारा व्यवहार और निर्णय हमारी आंतरिक शक्ति पर निर्भर करता है यदि व्यक्ति मानसिक रूप से मजबूत है और अपने विचारों पर नियंत्रण रखता है तो वह किसी भी कठिन परिस्थिति का सामना कर सकता है। मुख्य विकास अधिकारी नेहा बंधु ने निवर्तमान जिलाधिकारी के कार्यकाल को अत्यंत प्रेरणादायी बताते हुए उनके नेतृत्व, कार्यशैली और व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जिलाधिकारी का स्थानांतरण पूरे जनपद के लिए एक भावनात्मक क्षण है और यह सभी के लिए एक बड़ा झटका है क्योंकि उनके नेतृत्व में जनपद ने निरंतर प्रगति और उत्कृष्टता का अनुभव किया। उन्होने कहा कि जिलाधिकारी के स्थानांतरण की सूचना अप्रत्याशित थी और इसके लिए प्रशासनिक टीम मानसिक रूप से तैयार नहीं थी, जब से स्थानांतरण आदेश प्राप्त हुआ तभी से यह विचार मन में था कि ऐसे अधिकारी के लिए क्या कहा जाए जिनके साथ कार्य करना अपने आप में एक सीखने का अनुभव रहा हो। उन्होंने कहा कि एक प्रशासनिक अधिकारी के रूप में हम सभी यह सीखते हैं कि कार्यों को किस प्रकार बेहतर तरीके से किया जाए लेकिन जिलाधिकारी के साथ कार्य करते हुए यह समझ में आया कि केवल कार्य करना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि उसे गुणवत्ता के साथ करना अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि बच्चों और युवाओं के बीच जिलाधिकारी के प्रति जो सम्मान और जुड़ाव देखने को मिला वह उनकी सच्ची लोकप्रियता का प्रमाण है। अपर जिलाधिकारी श्याम लता आनन्द ने अपने सम्बोधन मंे कहा कि जब उनका स्थानांतरण जनपद में हुआ था, तब प्रारंभ में यहां जॉइन करने से बचने का प्रयास किया, कई दिनों तक यह कोशिश की कि उन्हें यहां कार्यभार ग्रहण न करना पड़े, इसी दौरान उन्हें कई वरिष्ठ अधिकारियों के फोन आए, जिन्होंने जिलाधिकारी के कार्य करने के तरीके और उनके व्यक्तित्व के बारे में बताया, जैसे ही उन्हें जिलाधिकारी के नेतृत्व और कार्यशैली के बारे में जानकारी मिली, उन्होंने तत्काल निर्णय लेते हुए अगले ही दिन जनपद में कार्यभार ग्रहण कर लिया। उन्होने कहा कि जनपद में कार्य करते हुए उन्होंने जिलाधिकारी के व्यक्तित्व के अनेक आयामों को करीब से देखा, जिलाधिकारी केवल एक प्रशासक ही नहीं बल्कि एक अभिभावक, मार्गदर्शक, बड़े भाई और पिता समान व्यक्तित्व के रूप में भी सामने आए, जिस प्रकार परिवार का मुखिया अपने सभी सदस्यों का ध्यान रखता है, उसी प्रकार जिलाधिकारी ने जनपद की जनता, अधिकारियों, कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का परिचय दिया। अपर जिलाधिकारी न्यायिक राजेश चन्द्र, उप जिलाधिकारी घिरोर, किशनी प्रसून कश्यम, गोपाल शर्मा, डिप्टी कलैक्टर ध्रुव शुक्ला, परियोजना निदेशक सत्येन्द्र सिंह, बाल संरक्षण अधिकारी अल्का मिश्रा, विद्याराम यादव एड., किशन दुबे, के.के. मिश्रा ने भी विदाई समारोह में अपने विचार व्यक्त किये, इस दौरान विकास, राजस्व विभाग के कई अधिकारी कलैक्ट्रेट के अनुभाग प्रभारी, जिला सूचना विज्ञान अधिकारी मयंक शर्मा, प्रशासनिक अधिकारी हरेन्द्र सिंह, ई-डिस्ट्रिक मैनेजर सौरभ पाण्डेय, वीरेश पाठक, रोहित दुबे, अनुज कुमार आदि उपस्थित रहे, कार्यक्रम का संचालन वेद प्रकाश श्रीवास्तव ने किया।
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