विकास' के दावों की उतरी धज्जियाँ: राष्ट्रीय राजमार्ग नेशनल हाईवे 321 आगरा-जलेसर मार्ग की दुर्दशा और बदहाली पर नेताओं की चुप्पी पर भड़की जनता!
Gargachary Times
27 April 2026, 21:12
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Agra
संवाददाता विजय सोलंकी आगरा
आगरा/आंवलखेड़ा:
एक तरफ सूबे की सरकार सड़कों को कांच जैसा चमकाने और 'गड्ढा मुक्त' करने का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं राष्ट्रीय राजमार्ग नेशनल हाईवे 321 (आगरा-जलेसर मार्ग) सरकार के इन दावों को मुँह चिढ़ा रहा है। टेढ़ी बगिया से लेकर जलेसर तक की सड़क अब सड़क नहीं, बल्कि मौत का जाल बन चुकी है। यहाँ से गुजरने वाले मुसाफिरों का बस एक ही कहना है— "सफर पर निकल रहे हैं, पता नहीं सही-सलामत लौटेंगे या नहीं।"
नेताओं के 'कोर्ट' वाले बहाने से भड़के ग्रामीण
क्षेत्रीय जनता जब बदहाली पर सवाल करती है, तो सफेदपोश नेताओं और उनके कारिंदों का एक ही रटा-रटाया जवाब मिलता है— "मामला कोर्ट में है।" आगरा जलेसर मार्ग की बदहाली और दुर्दशा को लेकर आज समाज सेवी डॉ. महेश चौधरी और किसान नेता बच्चू चौहान ब्रजेश चौधरी देवेंद्र आदि सहित कई लोगों ने आगरा जिलाधिकारी के नाम ज्ञापन सोपा और मार्ग को गड्ढा मुक्त करने की मांग की है क्या माननीय न्यायालय ने गड्ढों में पैच वर्क करने पर भी रोक लगा रखी है? यह सिर्फ अपनी नाकामियों को छिपाने का एक घटिया बहाना है।
मौत का आंकड़ा: 3 महीने, में 15 लाशें!
सड़क की जर्जर हालत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले 90 दिनों में नाई सराय से उस्मानपुर के बीच करीब 15 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। टेढ़ी बगिया, नादऊ, मुड़ी चौराहा, बास मोहन सहाय और आंवलखेड़ा खांडा जमाल नगर भैंस कनराऊ जिला आगरा व एटा के सराय नीम नगला उम्मेद नगला छोकर गुदाऊ आदि जैसे इलाकों में सड़क के नाम पर सिर्फ 2-2 फिट गहरे गड्ढे बचे हैं।
श्रद्धालुओं का अपमान, प्रशासन मौन
यह मार्ग आस्था का केंद्र भी है। विश्व विख्यात गायत्री शक्तिपीठ और युग ऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य की जन्मभूमि 'आंवलखेड़ा' इसी मार्ग पर है। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु जब यहाँ पहुँचते हैं, तो उन्हें धूल के गुबार और जानलेवा झटके मिलते हैं। क्या यही है उत्तर प्रदेश का पर्यटन और विकास?
सोशल मीडिया पर छिड़ा 'युद्ध', आंदोलन की चेतावनी
नेताओं की कुंभकर्णी नींद तोड़ने के लिए पूर्व प्रधान रूपेंद्र चौहान, वरिष्ठ अधिवक्ता रामप्रकाश चौहान कुशलपाल सिंह, राधाकृष्ण गुप्ता अजय बघेल मनोज चौहान प्रशांत चौहान जितेंद्र चौहान सोहन राणा आलोक शर्मा जैसे युवाओं ने अब सोशल मीडिया पर मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि अगर जल्द ही 'वैकल्पिक व्यवस्था' के तहत पैच वर्क शुरू नहीं हुआ, तो जनता सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेगी, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।