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वृंदावन नगर निगम की अदूरदर्शिता, परिक्रमार्थियों की 'राहत' स्थानीय जनता के लिए बनी 'आफत'

Gargachary Times 18 May 2026, 12:36 23 views
Mathura
वृंदावन नगर निगम की अदूरदर्शिता, परिक्रमार्थियों की 'राहत' स्थानीय जनता के लिए बनी 'आफत'
​वृंदावन। पुनीत शुक्ला श्रीधाम वृंदावन में पावन पुरुषोत्तम मास के शुभारंभ के साथ ही देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और भक्तों का एक अभूतपूर्व सैलाब उमड़ पड़ा है। भीषण गर्मी और तपते पारे के बीच लाखों की संख्या में श्रद्धालु ठाकुर बांके बिहारी के जयकारों के साथ पंचकोशीय परिक्रमा लगा रहे हैं। श्रद्धालुओं की इस अगाध आस्था को देखते हुए मथुरा-वृंदावन नगर निगम ने एक सराहनीय उद्देश्य के साथ कदम उठाया था, लेकिन प्रशासनिक अदूरदर्शिता और योजना की कमी के कारण यह कदम अब स्थानीय निवासियों और आम राहगीरों के लिए गले की हड्डी बन गया है। ​तपती धूप में परिक्रमार्थियों के पैरों को छालों से बचाने के लिए नगर निगम ने मुख्य पक्की सड़क के आधे हिस्से पर बालू (रेत) बिछाकर उस पर पानी का छिड़काव शुरू करवाया। उद्देश्य था कि श्रद्धालु ठंडी रेत पर आसानी से चल सकें। परंतु, धरातल पर यह योजना पूरी तरह फ्लॉप साबित हो रही है, क्योंकि यह 'राहत' अब स्थानीय लोगों के लिए भारी 'आफत' में तब्दील हो चुकी है। ​परिक्रमा मार्ग के दुकानदारों और स्थानीय निवासियों का कहना है कि भीषण गर्मी के कारण सड़क पर छिड़का गया पानी महज कुछ ही मिनटों में सूख जाता है। पानी सूखते ही बालू बेहद महीन धूल में बदल जाती है। जैसे ही क्षेत्र में तेज हवा चलती है या कोई भारी वाहन वहाँ से गुजरता है, यह रेत गुबार बनकर हवा में तैरने लगती है। ​स्थिति यह हो गई है कि इस मार्ग से गुजरने वाले दोपहिया वाहन चालकों और पैदल यात्रियों की आँखों में यह बालू सीधे जाकर चुभ रही है। इसके चलते कई वाहन चालक असंतुलित होकर गिरते-गिरते बचे हैं। राहगीरों का कहना है कि इस अव्यवस्था से फायदा कम और नुकसान अत्यधिक हो रहा है। आँखों में रेत जाने के कारण स्थानीय लोगों का घरों से निकलना और बाजार में पैदल चलना दूभर हो गया है। ​इस पूरे मामले में नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। बुद्धिजीवियों और स्थानीय नागरिकों का स्पष्ट कहना है कि नगर निगम ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने के लिए शॉर्टकट रास्ता चुना। नियमानुसार, वृंदावन के मुख्य परिक्रमा मार्ग के समानांतर एक कच्चा मार्ग (कच्ची परिक्रमा) पहले से स्वीकृत और निर्मित है। नगर निगम को चाहिए था कि पुरुषोत्तम मास शुरू होने से पहले एक विशेष अभियान चलाकर इस कच्चे मार्ग को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त करवाया जाता। इसके बाद उस कच्चे मार्ग पर व्यवस्थित तरीके से बालू डाली जाती।​यदि ऐसा किया गया होता, तो श्रद्धालुओं को भी चलने के लिए एक सुरक्षित और पूरी तरह कच्चा मार्ग मिलता और पक्की सड़क पर यातायात भी सामान्य रूप से चलता रहता। लेकिन अतिक्रमणकारियों पर कार्रवाई करने के बजाय नगर निगम ने चालू डामर और सीसी रोड पर ही बालू डलवा दी, जिसने पूरी यातायात व्यवस्था और जनजीवन को पटरी से उतार दिया है। ​परिक्रमा मार्ग के व्यापारियों का कहना है कि उड़ती हुई बालू के कारण उनकी दुकानों में रखा सामान खराब हो रहा है। ग्राहकों को भी दुकान तक आने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों ने नगर निगम प्रशासन से पुरजोर माँग की है कि:तत्काल प्रभाव से इस उड़ती बालू पर हर आधे घंटे में टैंकरों के माध्यम से पानी का छिड़काव सुनिश्चित किया जाए ताकि धूल न उड़े। ​दीर्घकालिक समाधान के रूप में, तुरंत टास्क फोर्स गठित कर कच्चे मार्ग से अवैध कब्जे हटाए जाएं और रेत को वहाँ शिफ्ट किया जाए।
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