कैबिनेट में 12 प्रस्तावो पर लगी मुहर, ग्रामीण निकायों में ओबीसी आरक्षण के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग बनेगा
Gargachary Times
18 May 2026, 17:35
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लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में लोकभवन में आयोजित कैबिनेट बैठक में प्रदेश के त्रिस्तरीय ग्रामीण निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण के निर्धारण के लिए “उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग” के गठन को मंजूरी दे दी गई। यह आयोग पंचायत चुनावों में पिछड़े वर्गों को आरक्षण प्रदान करने हेतु उनके सामाजिक और राजनीतिक पिछड़ेपन की समकालीन एवं अनुभवजन्य जांच करेगा। कैबिनेट बैठक में कुल 12 प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए और सभी को स्वीकृत कर लिया गया।
कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए वित्त मंत्री सुरेश कुमार ने बताया कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुपालन में प्रदेश सरकार ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को आरक्षण प्रदान करने के लिए “उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग” के गठन को मंजूरी दे दी है। आयोग प्रदेश में पिछड़े वर्गों की स्थिति, उनकी जनसंख्या, सामाजिक प्रतिनिधित्व और पंचायतों में भागीदारी का समकालीन एवं अनुभवजन्य अध्ययन करेगा तथा निकायवार आनुपातिक आरक्षण निर्धारित करने के लिए अपनी संस्तुतियां देगा।
वित्त मंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 तथा उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के तहत पंचायतों में आरक्षण की व्यवस्था लागू है। पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण कुल पदों के 27 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा और यदि जनसंख्या के अद्यतन आंकड़े उपलब्ध नहीं होंगे तो सर्वेक्षण के माध्यम से आंकड़े निर्धारित किए जा सकेंगे। आयोग के गठन को कैबिनेट ने मंजूरी प्रदान की है तथा आयोग का कार्यकाल सामान्य रूप से छह माह का होगा। आयोग प्रदेश की ग्राम पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों और जिला पंचायतों में ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षण तय करने के उद्देश्य से आंकड़ों का अध्ययन करेगा और निकायवार आनुपातिक आरक्षण की संस्तुति देगा। इसके आधार पर आगामी पंचायत चुनावों में आरक्षण व्यवस्था लागू की जाएगी।
कैबिनेट के निर्णय के अनुसार आयोग में कुल पांच सदस्य होंगे, जिन्हें राज्य सरकार नामित करेगी। इनमें एक सदस्य उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश होंगे, जिन्हें आयोग का अध्यक्ष बनाया जाएगा। आयोग में ऐसे व्यक्तियों को शामिल किया जाएगा, जिन्हें पिछड़े वर्गों से जुड़े मामलों का ज्ञान व अनुभव हो।
सरकार ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 243-घ तथा संबंधित अधिनियमों की धाराओं के तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्गों के लिए पंचायतों में आरक्षण का प्रावधान है। पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण कुल पदों के 27 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा। आयोग की रिपोर्ट के आधार पर पंचायतों में आरक्षण का अंतिम निर्धारण किया जाएगा।
लोहिया संस्थान में बनेगा 1010 बेड का अत्याधुनिक इमरजेंसी सेंटर
लखनऊ: कैबिनेट बैठक में डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के नवीन परिसर, शहीद पथ स्थित गोमती नगर विस्तार सेक्टर-7 में 1010 बेडेड मल्टी स्पेशलिटी इमरजेंसी सेंटर अस्पताल, नवीन ओपीडी ब्लॉक एवं टीचिंग ब्लॉक के निर्माण संबंधी परियोजना को मंजूरी प्रदान की गई।
वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 855 करोड़ 4 लाख 34 हजार रुपये की स्वीकृति दी गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के अंतर्गत अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त मल्टी स्पेशलिटी इमरजेंसी सेंटर अस्पताल का निर्माण किया जाएगा, जिसमें कुल 1010 बेड स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही मरीजों की बढ़ती संख्या और बेहतर उपचार व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए एक नया ओपीडी ब्लॉक भी बनाया जाएगा, जिससे प्रदेशवासियों को अधिक सुव्यवस्थित और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी। परियोजना के अंतर्गत 200 सीटों की क्षमता वाला नया टीचिंग ब्लॉक भी विकसित किया जाएगा। इससे चिकित्सा छात्रों को आधुनिक तकनीक और संसाधनों से युक्त शिक्षण वातावरण मिलेगा तथा मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता में और सुधार होगा। इस नई चिकित्सा अवसंरचना के विकसित होने से गंभीर रोगियों को त्वरित और विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा। साथ ही प्रदेश के विभिन्न जिलों से आने वाले मरीजों को भी राजधानी में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिलेगा।
लखनऊ मेट्रो फेज-1बी के लिए त्रिपक्षीय एमओयू को मंजूरी
कैबिनेट बैठक में लखनऊ मेट्रो परियोजना फेज-1बी ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर (चारबाग से वसंतकुंज) के लिए भारत सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पाेरेशन लि. के मध्य त्रिपक्षीय मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) के निष्पादन को मंजूरी प्रदान कर दी गई।
गौरतलब है कि लखनऊ मेट्रो फेज-1बी ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर की डीपीआर को 5 मार्च 2024 को सम्पन्न कैबिनेट की बैठक में स्वीकृति दी गई थी। इसके बाद आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय, भारत सरकार ने 3 सितंबर 2025 को परियोजना की कुल लागत 5801.05 करोड़ रुपये को मंजूरी प्रदान करते हुए परियोजना का अनुमोदन किया था। भारत सरकार द्वारा जारी स्वीकृति पत्र में यह शर्त रखी गई थी कि परियोजना के क्रियान्वयन के लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकार और उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड के बीच त्रिपक्षीय एमओयू किया जाएगा। इसी क्रम में न्याय विभाग द्वारा विधिवत परीक्षण एवं संशोधन के बाद तैयार एमओयू के प्रारूप को अब योगी कैबिनेट ने अपनी मंजूरी दे दी है। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार परियोजना में राज्य सरकार की भूमिका और दायित्वों को भी स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है।
पशु चिकित्सा छात्रों का इंटर्नशिप भत्ता तीन गुना बढ़ा
बैठक में प्रदेश में अध्ययनरत पशु चिकित्सा के छात्रों के इंटर्नशिप भत्ते को 4,000 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 12,000 रुपये प्रतिमाह किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। सरकार के इस निर्णय से प्रदेश के पशु चिकित्सा छात्रों को बड़ा आर्थिक सहारा मिलेगा और उनका मनोबल भी बढ़ेगा।
दुग्ध विकास एवं पशुपालन मंत्री धर्मपाल सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश विशाल जनसंख्या, बड़ी पशुधन संख्या और विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र वाला राज्य है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था में पशुधन की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में पशुओं के स्वास्थ्य संरक्षण, विभिन्न पशु महामारियों के नियंत्रण और उन्मूलन तथा उन्नत नस्लों के संवर्धन में पशु चिकित्सकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार उत्तर प्रदेश पंडित दीन दयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो अनुसंधान संस्थान, आचार्य नरेंद्र देव यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी तथा सरदार वल्लभभाई पटेल यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी में अध्ययनरत पशु चिकित्सा छात्रों को अब बढ़ा हुआ इंटर्नशिप भत्ता मिलेगा।
सरकार के अनुसार वर्तमान में इन छात्रों को 4,000 रुपये प्रतिमाह इंटर्नशिप भत्ता दिया जा रहा था, जिसे अब बढ़ाकर 12,000 रुपये प्रतिमाह किया गया है। इस निर्णय से तीनों विश्वविद्यालयों में अनुमोदित 300 छात्रों को लाभ मिलेगा। पशुपालन मंत्री ने कहा कि हरियाणा, कर्नाटक और केरल जैसे राज्यों में अधिक इंटर्नशिप भत्ता दिए जाने का अध्ययन करने के बाद यह फैसला लिया गया है। प्रस्ताव लागू होने पर सरकार पर लगभग 4.20 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय भार आएगा, जिसकी व्यवस्था विश्वविद्यालयों को दिए जाने वाले शासकीय अनुदान के गैर-वेतन मद से की जाएगी। इससे छात्रों का मनोबल बढ़ेगा, शिक्षा के प्रति रुचि और कार्य के प्रति उत्साह बढ़ेगा तथा समानता के सिद्धांत को भी मजबूती मिलेगी। मंत्री धर्मपाल सिंह ने इसे “समानता के सिद्धांत” के अनुरूप एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।
मीरजापुर में सरदार पटेल एपेक्स यूनिवर्सिटी की स्थापना को मिली मंजूरी
बैठक में उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019 के अंतर्गत निजी क्षेत्र में “सरदार पटेल एपेक्स यूनिवर्सिटी, मीरजापुर” की स्थापना हेतु उसकी प्रायोजक संस्था को आशय पत्र (लेटर ऑफ इंटेंट) जारी किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई।
उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि वाराणसी स्थित एपेक्स वेलफेयर ट्रस्ट, जो बड़े अस्पतालों का संचालन करता है, अब शिक्षा के क्षेत्र में भी प्रवेश कर रहा है। ट्रस्ट द्वारा मीरजापुर में सरदार पटेल एपेक्स यूनिवर्सिटी की स्थापना का प्रस्ताव दिया गया था, जिसकी सभी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं। इसी क्रम में कैबिनेट ने संस्थान को आशय पत्र जारी किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है। प्रस्ताव के अनुसार मीरजापुर जनपद की चुनार तहसील के ग्राम समसपुर में लगभग 50.45 एकड़ भूमि पर इस निजी विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी। यह विश्वविद्यालय ग्रामीण क्षेत्र में उच्च शिक्षा के नए अवसर उपलब्ध कराने के साथ-साथ क्षेत्रीय विकास को भी गति देगा।
मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने बताया कि मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में प्रदेश में उच्च शिक्षा का तेजी से विस्तार होने के साथ उसकी गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। अंग्रेजों के समय से लेकर वर्ष 2017 तक प्रदेश में केवल 14 सरकारी विश्वविद्यालय थे, जबकि वर्ष 2017 के बाद अब तक आठ नए सरकारी विश्वविद्यालय स्थापित किए जा चुके हैं। इसी प्रकार निजी विश्वविद्यालयों की संख्या, जो लंबे समय तक 29 पर स्थिर थी, अब बढ़कर 52 हो गई है। मंत्री ने बताया कि आठ संस्थानों को लेटर ऑफ इंटेंट यानी आशय पत्र भी जारी किए जा चुके हैं।