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स्वस्थ जीवन शैली के स्तंभ हैं शिकंजी सत्तू एवं कांजी

Gargachary Times 25 May 2026, 19:40 48 views
Dholpur
स्वस्थ जीवन शैली के स्तंभ हैं शिकंजी सत्तू एवं कांजी
डा हरिप्रकाश लवानिया धौलपुर भारतीय खानपान में पारंपरिक पेय पदार्थ का एक समृद्ध एवं गौरवशाली इतिहास रहा है आधुनिक युग में जहां डिब्बा बंद एवं केमिकल युक्त शीतल परियों का चलन बड़ा है वहीं भारतीय पारंपरिक प्रिया आज भी स्वास्थ्य स्वाद एवं संस्कृति के अनूठे संगम के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए हैं ऐसे ही पारंपरिक एवं देसी पेयो में शिकंजी सत्तू एवं कांजी शामिल हैं भारतीय परंपरागत पेय शरीर एवं मां को स्फूर्ति प्रदान करते हैं हजारों वर्षों से परंपरागत रूप से बनाए जाने वाले पेय आज भी स्वास्थ्य कर माने जाते हैं पाश्चात्य प्रभाव एवं प्रचार प्रसार ने आधुनिक पीढी को फास्ट फूड एवं बाजारू पेय कोल्ड ड्रिंक की तरफ आकर्षित किया है किंतु इन्हे स्वास्थ्य कर बिल्कुल नहीं कहा जा सकता नींबू की शिकंजी बनाने का चालान प्राचीन समय से ही भारत वर्ष में रहा है नींबू हल्की चीनी पर चुटकी भर काला नमक डालकर बनाई गई शिकंजी शरीर को डिहाईड्रेशन से बचाती है तथा इसमें भी अधिकारगार है तेज गर्मी से बचने एवं शरीर को ठंडा पहुंचने शिकंजी से बेहतर कोई ड्रिंक नहीं हो सकता यह एसिडिटी की में चलना या खाना न पचने की समस्या को दूर करता है गर्मियों में पसीने के साथ कई तत्व बाहर निकल जाते हैं इससे इलेक्ट्रोलाइट भी बाहर निकल जाते हैं शिकंजी इन तत्वों का शरीर में पुनर्भरण करती है नींबू में विटामिन सी प्रचार मात्रा में पाया जाता है जो स्किन को रीजे वोनेट करने में बहुत काम आता है शिकंजी में मौजूद पोटैशियम हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करता है कई शोधों में यह भी सामने आया है की बॉडी हाइड्रेट होने पर शरीर के तनाव को कम करने में मदद मिलती है जिसमें शिकंजी पूरी लाभदायक है शिकंजी से शरीर का इम्यून सिस्टम दुरुस्त रहता है और यह देश में चीनी की जगह गुड का प्रयोग किया जाए से और भी लाभदायक होती है अब नंबर आता है स्वास्थ्य का देसी सुपर फूड कहे जाने वाले सत्तू का बदलते दौर में जब लोग डिब्बा बंद सप्लीमेंट एवं महंगे प्रोटीन पाउडरो की तरफ भाग रहे हैं तब हमारे पारंपरिक खान-पानो में एक ऐसा रत्न छुपा है जो न सिर्फ किफायती है बल्कि सेहत का खजाना भी है मुख्य रूप से भुने हुए चने एवं जोक को पीसकर बनाए जाने वाला यह आता भारतीय व्यंजनों का एक हेमिस्सा रहा है इसे गरीबों एवं मजदूरों का प्रोटीन भी कहा जाता है अपने चमत्कारी फायदाओं के कारण आज हर आधुनिक डाइट चार्ट में सुपर फूड का दर्जा प्राप्त कर चुका है इसमें भरपूर मात्रा में प्रोटीन फाइबर कैल्शियम आयरन और मैग्नीशियम पाया जाता है गर्मियों में या पेट को ठंडक देता है तथा लू से बचाव करता है सत्तू में उच्च मात्रा में अघुलनशील फाइबर होता है जो के हाथों की सफाई करता है एसिडिटी दूर करता है तथा शरीर से वैशाख पदार्थों को बाहर निकलता है सत्तू का ग्लाइसेमिक इंडेक्स बहुत कम होता है इसके सेवन के बहुत देर बाद पेट भरा हुआ रहता है तथा भूख नहीं लगने से वजन कम करने में मदद मिलती है शुगर के मरीजों के लिए नमकीन सत्तू का शरबत एक आदर्श नाश्ता है मांसपेशियों का विकास और इसकी मरम्मत में सत्तू अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है बच्चों से लेकर बुजूरों तक सभी के लिए यह एक बेहतरीन टॉनिक का काम करता है सत्तू की सबसे बड़ी खासियत यह है कैसे पकाने अथवा अन्य मसाले की आवश्यकता नहीं होती कुल मिलाकर सत्तू एक पारंपरिक खाद्य पदार्थ ही नहीं बल्कि स्वस्थ जीवन शैली का स्तंभ है कम लागत में भरपूर पोषण देने वाला सत्तू वाकई मानव जीवन एवं स्वास्थ्य के लिए अनमोल वरदान है भारतीय पेय पदार्थों में एक और नाम आता है कांची का जो न केवल हमारे स्वाद को तृप्त करती है बल्कि शरीर को निरोगी रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है कांची को गाजर चुकंदर पिसी हुई राय काला नमक एवं रिंग और एक चुटकी मिर्च डालकर कांच अमेठी के बर्तन में धूप में रखने का विधान है जिसे चार या पांच दिन बाद सेवन किया जाता है कांची को औषधि पर के तौर पर लेने का वर्णन आयुर्वेद के चरक संहिता एवं अष्टांग हृदय में विस्तार से मिलता है कांजी में प्रोबायोटिक्स इम्यूनिटी बूस्टर के साथ-साथ त्वचा एवं डिटॉक्सीनेशन के लिए विशेष लाभकारी है पाचन तंत्र को ठीक करने में भी इसका महत्वपूर्ण योगदान है आधुनिक युग में एवं भाग दौड़ भरी जिंदगी में जब लोग बाजारू चीजें खाने में ज्यादा रुचि लेने लगे हैं कांजी जैसा पारंपरिक पेय हमारी सेहत के लिए वरदान है अतः हमें चाहिए सत्तू कांजी एवं शिकंजी जैसे पेय न सिर्फ स्वयं उपयोग करें बल्कि बच्चों एवं अन्य लोगों को भी इन्हें लेने के लिए प्रेरित करें ताकि हम अपने पारंपरिक एवं देसी पेयो से लवांवित हो सके
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