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उपखंड कार्यालय बाड़ी और तहसील कार्यालय बाड़ी पर कर्मचारियों ने की मीटिंग, सरकार को दी आंदोलन की चेतावनी

Gargachary Times 26 May 2026, 18:34 100 views
Dholpur
उपखंड कार्यालय बाड़ी और तहसील कार्यालय बाड़ी पर कर्मचारियों ने की  मीटिंग, सरकार को दी आंदोलन की चेतावनी
बाड़ी: अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत) के प्रदेश अध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़ व संगठन के प्रदेश संगठन महामंत्री डा रनजीत मीणा के आह्वान पर आज दूसरे दिन भी कर्मचारियों का तीखा आक्रोश देखने को मिला। राजस्थान सरकार द्वारा कर्मचारी हितों पर किए जा रहे कुठाराघात के विरोध में आज उपखण्ड कार्यालय व तहसील कार्यालय पर कर्मचारियों ने 1 घंटे का सामूहिक कार्य बहिष्कार कर सांकेतिक प्रदर्शन किया। कर्मचारी महासंघ एकीकृत के प्रदेश संगठन महामंत्री डा रनजीत मीणा ने बताया कि सरकार कर्मचारियों के लोकतांत्रिक अधिकारों और सुविधाओं पर लगातार चोट कर रही है। कर्मचारियों की मुख्य मांगों में आरजीएचएस (RGHS) योजना का निजीकरण रोकने बीमा कंपनियों की प्रवेश को रोकने तथा समर्पित अवकाश (सरेंडर लीव) के भुगतान पर लगी अघोषित रोक को तुरंत हटाने सहित महासंघ का 25 सूत्री मांग पत्र शामिल है। देखने को मिल रहा है कि कर्मचारियों को जीपीएफ से पैसा उठाने को लेकर 6–6 महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है जो कि दुखद है कर्मचारियों का खुद का पैसा नहीं उठा पाना कर्मचारियों के साथ कुठाराघात है। इस सामूहिक कार्य बहिष्कार और प्रदर्शन के दौरान विभिन्न कर्मचारी संगठनों के प्रमुख पदाधिकारी और भारी संख्या में कर्मचारी उपस्थित रहे। मीटिंग में मुख्य रूप से कर्मचारी नेता डॉ वीरेंद्र सिंह यादव जिला आयुर्वेद चिकित्सक संघ अध्यक्ष, गोपाल कृष्ण शर्मा आयुर्वेद संघर्ष समिति अध्यक्ष, टीकम सिंह जाट शिक्षक संघ महामंत्री, आईएलआर सुनील कुमार परमार , जितेंद्र सिंह मीणा, हृदेश पाठक, हितेंद्र कुमार व्यास, टीलआई ब्रजराज मीणा, सूचना सहायक प्रकाश सामरिया, वरिष्ठ सहायक सोनू शर्मा कनिष्ठ सहायक महेश कुमार मीणा, अध्यापक अशोक कुमार मीणा सहित अनेक पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया और अग्रिम पंक्ति में रहकर कर्मचारियों की आवाज को बुलंद किया। प्रदर्शन के दौरान सभी पदाधिकारियों ने एक स्वर में सरकार की कर्मचारी-विरोधी नीतियों की घोर निंदा की। नेताओं ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि सरकार जल्द से जल्द कर्मचारी हितों को ध्यान में रखते हुए सकारात्मक कदम उठाए और 25 सूत्री मांग पत्र को पूरा करे, अन्यथा इस आंदोलन को आगे और अधिक तेज व उग्र किया जाएगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन की होगी।
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