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मैनपुरी जिला अस्पताल की हीमोग्लोबिन रिपोर्ट गलत निकली, तीन लैब की जांच में हीमोग्लोबिन स्तर में बड़ा बदलाव,स्वास्थ व्यवस्था पर उठे सवाल

Gargachary Times 27 May 2026, 19:54 55 views
Mainpuri
मैनपुरी जिला अस्पताल की हीमोग्लोबिन रिपोर्ट गलत निकली, तीन लैब की जांच में हीमोग्लोबिन स्तर में बड़ा बदलाव,स्वास्थ व्यवस्था पर उठे सवाल
मैनपुरी के महाराजा तेज सिंह जिला अस्पताल की पैथोलॉजी जांच व्यवस्था पर फिर सवाल उठे हैं। कुरावली थाना क्षेत्र के दुर्गपुर निवासी संजीव सिंह यादव ने जिलाधिकारी को शिकायत दी है। उन्होंने आरोप लगाया है कि जिला अस्पताल की लैब ने उनकी पत्नी की गलत रिपोर्ट तैयार की,जिससे परिवार मानसिक तनाव में आ गया। अस्पताल प्रशासन ने तकनीकी खराबी और ब्लड क्लॉटिंग की संभावना जताई है और लैब टेक्नीशियन से स्पष्टीकरण मांगा है। शिकायत के अनुसार,संजीव सिंह यादव 19 मई 2026 को अपनी पत्नी सुमन देवी को उपचार के लिए महाराजा तेज सिंह जिला अस्पताल ले गए थे। डॉक्टर ने खून की जांच लिखी, जो 20 मई को अस्पताल में कराई गई। 21 मई को मिली रिपोर्ट में सुमन देवी का हीमोग्लोबिन स्तर मात्र 3.6 दर्शाया गया। इस रिपोर्ट से परिवार चिंतित हो गया और उन्होंने तुरंत डॉक्टर जयजयराम से परामर्श किया,जिन्होंने मरीज को तत्काल भर्ती करने की सलाह दी। रिपोर्ट पर संदेह होने पर परिजनों ने उसी दिन निजी सिद्धार्थ पैथ लैब में दोबारा जांच कराई, जहां हीमोग्लोबिन 9.2 पाया गया। इसके बाद एक अन्य निजी लैब, मैनपुरी पैथ लैब में कराई गई जांच में हीमोग्लोबिन 11.5 निकला। तीन अलग-अलग रिपोर्टों में हीमोग्लोबिन स्तर में भारी अंतर सामने आने के बाद परिवार ने जिला अस्पताल की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पीड़ित संजीव सिंह यादव का आरोप है कि जिला अस्पताल की इस कथित लापरवाही के कारण उन्हें और उनके परिवार को मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ी। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों पर आम जनता का भरोसा होता है, लेकिन ऐसी लापरवाही मरीजों की जान जोखिम में डाल सकती है। यादव ने जिलाधिकारी से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की मांग की है। वहीं इस मामले में सीएमएस डॉक्टर धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि मामला संज्ञान में है। उन्होंने कहा कि हाल ही में बिजली ट्रिपिंग और ओवरलोडिंग की वजह से मशीन में तकनीकी दिक्कत आई थी। इसके अलावा कई बार ब्लड में क्लॉटिंग होने से भी रिपोर्ट प्रभावित हो जाती है। फिर भी पूरे मामले में लैब टेक्नीशियन से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा और जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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