बाइसिकल हाई-वे और पर्यावरण संरक्षणः अखिलेश यादव का विजन इंडियाः-राजेन्द्र चौधरी
Gargachary Times
5 June 2026, 20:39
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तेजी से बदलते वैश्विक परिवेश में साइकिलिंग और साइकिल ट्रैक का महत्व बढ़ गया है। दुनिया जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, ऊर्जा संकट और असंतुलित शहरीकरण जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे समय में साइकिलिंग केवल एक परिवहन साधन नहीं रह गई है, बल्कि यह सतत विकास, स्वस्थ जीवनशैली और पर्यावरण संरक्षण का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरी है। अनेक देशों ने साइकिलिंग को अपनी परिवहन नीति का अभिन्न हिस्सा बनाया है। भारत में भी इस दिशा में जागरूकता बढ़ रही है, और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य के लिए यह विषय विशेष महत्व रखता है। उत्तर प्रदेश में दूरदर्शी नेता समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस दिशा में बहुत बड़ा और विजनरी कार्य किया।
अखिलेश यादव द्वारा बनाया गया साइकिल ट्रैक आज फिर चर्चाओं में है। विश्व के विकसित देशों में साइकिल को हरित परिवहन का सबसे प्रभावी साधन माना जा रहा है। नीदरलैंड, डेनमार्क और जर्मनी जैसे देशों में साइकिल ट्रैक का विस्तृत नेटवर्क तैयार किया गया है। इससे न केवल प्रदूषण में कमी आई है, बल्कि नागरिकों के स्वास्थ्य में भी सुधार हुआ है। संयुक्त राष्ट्र और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए साइकिलिंग को बढ़ावा देने की सिफारिश करती हैं। इससे 37 प्रतिशत तक कार्बन उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है। यों तो साइकिल की विकास यात्रा 1866 से शुरू हो गई थी पर आज की साइकिल की निर्माण प्रक्रिया में 1900 के बाद बहुत सुधार किए गए। भारत में विदेश से जापान-इंग्लैंड साइकिल के कलपुर्ज मंगाकर काम चलता था। भारत में साइकिल बनाने का कोई कारखाना नहीं था। 1948 में संसद में यह मामला उठा। 6 अप्रैल 1950 को संसद में व्यापार मंत्री के.सी. त्यागी ने बताया कि एक लाख साइकिलें मंगाना तय हुआ है। 1953 में आगरा में साइकिल बनाने का पहला कारखाना लगा। पांच लाख रुपए की कीमत से मशीनें लगी।
भारत में 1950 में साइकिल की बिक्री में खूब धूम मची। 1951 में विदेशी रेले साइकिल 315 रुपये, रज 300 रुपये, इंडिया 160 रूपये, हरक्यूलिस 236 रूपये, फिलिप्स 230 रुपये और नारमन 224 रुपये में मिलती थी। तब भारत के ग्रामीण और कस्बाई जीवन का साइकिल अभिन्न हिस्सा बन गई थी। किसान, मजदूर, छात्र और छोटे व्यवसायी लम्बे समय तक इसे दैनिक जीवन का साधन बनाते रहे। एक समय शादी-विवाह में और दहेज में साइकिल का अपना अलग महत्व होता था।
साइकिलिंग का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह शून्य प्रदूषण उत्पन्न करती है, कम लागत वाली है और आम नागरिकों के लिए सुलभ है। इसके साथ ही यह सड़क यातायात के दबाव को कम करने और शहरी जीवन को अधिक व्यवस्थित बनाने में सहायता करती है। उत्तर प्रदेश भारत का सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य है। यहां के शहरों और कस्बों में बढ़ते वाहन, ट्रैफिक जाम और प्रदूषण गंभीर चुनौतियां बन चुके हैं। ऐसे में साइकिल ट्रैक और साइकिलिंग संस्कृति को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है।
समाजवादी पार्टी की सरकारों ने समय-समय पर साइकिल को जनसंपर्क और विकास की अवधारणा से जोड़ा है। युवाओं, छात्रों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को सशक्त बनाने के लिए साइकिल को एक उपयोगी साधन के रूप में प्रस्तुत किया गया। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में यह प्रतीक और अधिक प्रासंगिक हो जाता है क्योंकि साइकिल आज पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास का भी प्रतीक बन चुकी है।
आधुनिक शहरों में साइकिल ट्रैक केवल सड़क का एक हिस्सा नहीं बल्कि एक दूरदर्शी शहरी नीति का संकेत होते हैं। उत्तर प्रदेश में 2012 से 2017 तक अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी की सरकार ने साइकिलिंग को पर्यावरण-अनुकूल परिवहन के रूप में बढ़ावा देने के लिए कई पहल शुरू की थीं। इनका उद्देश्य शहरी यातायात का दबाव कम करना, प्रदूषण घटाना और गैर-मोटर चालित परिवहन को प्रोत्साहित करना था।
समाजवादी पार्टी की सरकार में लखनऊ, नोएडा और अन्य शहरों में बड़े पैमाने पर साइकिल ट्रैक विकसित किया गया। लखनऊ और नोएडा में 100 किलोमीटर से अधिक साइकिल ट्रैक बनाए गए थे, जबकि राज्य के अन्य शहरों में लगभग 270 किलोमीटर अतिरिक्त साइकिल ट्रैक विकसित करने की योजना थी। लखनऊ में लगभग 35 किलोमीटर लंबा साइकिल ट्रैक 2015 में शुरू किया गया।
इसके बाद लगभग 31 किलोमीटर अतिरिक्त ट्रैक का निर्माण भी किया गया। इन ट्रैकों को अलग रंगों, संकेतकों और समर्पित लेन के साथ विकसित किया गया था ताकि साइकिल चालकों को सुरक्षित मार्ग मिल सके। आगरा-इटावा बाइसिकल हाई-वे वर्ष 2016 में राज्य का पहला बाइसिकल हाई-वे शुरू किया गया। यह आगरा से इटावा के बीच लगभग 207 किलोमीटर लंबा ग्रीन पथ नाम से बनाया गया। यह बाइसिकल हाईवे आगरा के ताजमहल को इटावा के लायन सफारी से जोड़ता है। यह देश की पहली लंबी दूरी की बाइसिकल हाई-वे परियोजना है। इटावा लॉयन सफारी के पास ग्रीन पथ के उद्घाटन के अवसर पर बड़ी संख्या में साइकिलिंग करने वाले युवा और विशेषज्ञ शामिल हुए थे और उन्होंने अखिलेश यादव के बाइसिकल हाई-वे और विजन की तारीफ की थी।
समाजवादी सरकार की साइकिल ट्रैक परियोजना ‘‘ग्रीन ट्रांसपोर्ट‘‘ को बढ़ावा देने वाली योजना है। समाजवादी पार्टी का मानना है कि इससे ईंधन की खपत और वायु ध्वनि प्रदूषण दोनों कम होंगे तथा लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
इस दृष्टि से समाजवादी पार्टी की सरकार में अखिलेश यादव के निर्देशन में वृक्षारोपण का विश्व रिकॉर्ड बनाया था ताकि साया बना रहे। विश्व पर्यावरण एवं जैवविविधता के साथ हरियाली ही तो जीवन चक्र को नया जीवन देती है।
अखिलेश यादव स्वयं साइकिल यात्राओं और साइकिल अभियानों के माध्यम से युवाओं और पर्यावरण के मुद्दों को जोड़ते रहे। साथ ही समाजवादी पार्टी के चुनाव चिन्ह ‘‘साइकिल‘‘ को आधुनिक, पर्यावरण-अनुकूल और जनसामान्य के परिवहन साधन के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया। सन् 2017 में भाजपा सरकार ने सत्ता में आने के बाद साइकिल ट्रैकों को बर्बाद कर दिया। भाजपा सरकार के अदूरदर्शी फैसलों से समाजवादी सरकार के साइकिल ट्रैक के बढ़ावा देने के कार्यों में तरह-तरह के रोड़े अटकाए गए।
अखिलेश यादव का मानना है कि साइकिलिंग स्वास्थ्य, पर्यावरण और अर्थव्यवस्था तीनों के लिए लाभकारी है तथा विकसित देशों में भी साइकिल-आधारित परिवहन को बढ़ावा दिया जा रहा है। समाजवादी पार्टी की सरकार में अखिलेश यादव की साइकिल ट्रैक परियोजना उत्तर प्रदेश में गैर-मोटर चालित परिवहन को बढ़ावा देने का एक महत्वाकांक्षी प्रयास था, जिसे भाजपा सरकार ने अपनी नासमझी से बेकार कर दिया। आज के बदलते परिवेश में साइकिलिंग और साइकिल की बढ़ती मांग ने साबित कर दिया कि श्री अखिलेश यादव देश के सबसे बड़े दूरदर्शी नेता हैं जिन्होंने एक दशक पहले ही भविष्य में आने वाली चुनौतियों को भांप लिया था और उन्होंने साइकिल ट्रैक बनाकर साइकिलिंग को बढ़ावा देने का कार्य शुरू कर दिया था। विश्व में ऊर्जा संकट के आज के दौर में साइकिलिंग का महत्व बढ़ गया है। इस साल पर्यावरण दिवस पर इसका ऐतिहासिक महत्व और बढ़ गया है। दमघोटू हवा, टैªफिक जाम और पर्यावरण असंतुलन ग्लोबल वार्मिंग से तापमान और ठंड में असहनीय बढ़ोत्तरी को देखते हुए साइकिल सवारी पर फिर लौटना ही अपने जीवन को दीर्घजीवी और संतुलित बनाए रख सकता है।
लेखकः (राजेन्द्र चौधरीः पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव हैं)