कृष्ण-रुक्मिणी विवाह में झूमे श्रद्धालु बल्केश्वर महादेव भक्त मंडल द्वारा आयोजित हो रही है कथा
Gargachary Times
6 June 2026, 20:52
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Dharam
मुकुल शर्मा आगरा
प्रभु पर अविश्वास करने से होता है भक्ति का नाश
-छठवे दिवस
विख्यात कथा व्यास आचार्य इंद्रेश उपाध्याय ने शुक्रवार भागवत कथा के छठवे दिन कहा कि प्रभु पर अविश्वास करने से भक्ति का नाश होता है। विपरीत परिस्थितियों में भी प्रभु पर विश्वास करना चाहिए, तभी प्रभु की कृपा मिल सकती है। उन्होंने श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के विवाह का रोचक प्रसंग सुनाया, जिस पर श्रद्धालु झूम उठे।
बल्केश्वर महादेव भक्त मंडल द्वारा पुरुषोत्तम मास में बल्केश्वर पार्क में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में इंद्रेश जी ने कहा कि हमें प्रभु पर हर हालत में भरोसा करना है। श्रीमद् भागवत पुराण और भक्तमाल में ऐसे अनेक चरित्र आते हैं, जिन्होंने अपने परिवारीजनों को भी खो दिया, फिर भी प्रभु पर अटूट विश्वास रखा।
उन्होंने कहा कि फूल तो मोंगरा, चमेली, पुष्पा के भी होते हैं, लेकिन प्रभु को केवल कमल का फूल ही पसंद है। उसे वे हृदय से लगा कर रखते हैं। उसका कारण है कि कमल का फूल विपरीत परिस्थितियों में उगता होता है।
गोवर्धन उठाने के प्रसंग की चर्चा करते हुए उन्होंने सुनाया-
गिरधर तुम्हरी शरण, गिरिराज धरण, प्रभु तुम्हरी शरण।
उन्होंने कहा कि हमें संतों की सेवा करनी चाहिए। यमुना जी का उद्धार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आगे की कथाओं वे समाजसेवा के विशेष प्रकल्पों को शामिल करेंगे, ताकि कथा क्षेत्र में कुछ सेवा कार्य हो। सेवा के प्रकल्प उस स्थान और समय की जरूरत के हिसाब से होंगे।
रस और रास दोनों का अर्थ अलग-अलग बताते हुए उन्होंने कहरा कि आप मंदिर जाते हैं, वह रस है। आपकी भावना से प्रसन्न होकर ठाकुर जी कभी आपके घर आ जाएं तो वह रास है। अभी हम रस मय हैं। रस से रास की यात्रा को कहते हैं भक्तिपथ। भक्तिपथ का अंत ही रास है।
इस मौके पर महन्त कपिल नागर मुख्य यजमान हरीश अग्रवाल तरूना अग्रवाल नीतेश चेन्स आदर्श नन्दन गुप्त ऋषि अग्रवाल बी डी अग्रवाल टैटू गोयल सुरेन्द्र अग्रवाल मुकुन्द सिंघल अतुल गोयल संजय मंगल अजय मित्तल मौजूद रहे।
प्रेमनिधि मंदिर आगरा के गुप्त बांके बिहारी
इंद्रेश उपाध्याय ने कथा में नाई की मंडी स्थित प्रेमनिधि मंदिर की विस्तृत चर्चा की। कहा कि यह मंदिर आगरा के गुप्त बांके बिहारी हैं। उन्होंने बताया कि घनघोर बारिश की अंधेरी रात में प्रेमनिधि महाराज यमुना का जल लेने व स्नान करने गये थे, तब भगवान श्रीकृष्ण एक बालक के रूप में मशाल लेकर उनके आगे-आगे चले थे। उन्होंने कहाकि प्रभु भले ही साक्षात दर्शन नहीं दें, लेकिन अपने होने की कभी न कभी अनुभूति करा दें तो जीवन का कल्याण होता है।