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वन्यजीव अपराध पर सख्ती के साथ संवेदनशीलता का मंत्र, करुणा से होगा बदलाव: न्यायमूर्ति सत्य वीर सिंह

Gargachary Times 6 June 2026, 21:02 53 views
Mathura
वन्यजीव अपराध पर सख्ती के साथ संवेदनशीलता का मंत्र, करुणा से होगा बदलाव: न्यायमूर्ति सत्य वीर सिंह
फरह। वन्यजीव अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण, तस्करी नेटवर्क को तोड़ने और अपराध से अर्जित आय की जब्ती को लेकर कानूनी व सामाजिक रणनीतियों पर मंथन के लिए शुक्रवार को हिंदुस्तान कॉलेज ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, फरह में एक दिवसीय विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। वाइल्डलाइफ एसओएस ने न्यायपालिका, उत्तर प्रदेश वन विभाग, पुलिस विभाग और जिला प्रशासन के सहयोग से इस कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला का विषय “वन्यजीव अपराध और वन्यजीव अपराध से अर्जित आय की जब्ती” रखा गया। कार्यशाला का उद्घाटन इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सत्य वीर सिंह ने किया। उद्घाटन सत्र में आगरा और मथुरा मंडल के जिला एवं सत्र न्यायाधीश, वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, पुलिस व प्रवर्तन एजेंसियों के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे। अपने मुख्य संबोधन में न्यायमूर्ति सत्य वीर सिंह ने कहा कि वन्यजीव अपराध से निपटने के लिए केवल कठोर दंड पर्याप्त नहीं है। पुनर्वास, जागरूकता और मार्गदर्शन कई बार दंड से अधिक स्थायी और सार्थक परिवर्तन लाते हैं। उन्होंने कहा, “जो समुदाय पहले पशु शोषण से जुड़े थे, उन्हें वैकल्पिक आजीविका देकर मुख्यधारा में लाना ही असली समाधान है।” उन्होंने वाइल्डलाइफ एसओएस की तीन दशक की संरक्षण यात्रा की सराहना करते हुए कहा कि संस्था ने पशु संरक्षण के साथ-साथ उन परिवारों को स्वावलंबी बनाने का काम भी किया है। न्यायमूर्ति ने सभी जीवित प्राणियों के प्रति संवेदनशीलता और संरक्षण को सामाजिक दायित्व बताया। उन्होंने कहा कि अधिकार और कर्तव्य एक-दूसरे से जुड़े हैं। सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के कथन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि “किसी राष्ट्र की न्याय व्यवस्था उसकी कमजोर आबादी द्वारा महसूस की जाने वाली सुरक्षा से परखी जाती है।” उन्होंने हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र में देखी गई एक नेत्रहीन हथनी का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे जीवों के प्रति करुणा ही समाज को मानवीय बनाती है। कार्यशाला में वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक एवं सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने देशभर में चलाए जा रहे प्रमुख संरक्षण अभियानों पर केस स्टडी प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि अवैध तस्करी, भालू नचाना और हाथियों के शोषण जैसे अपराधों के खिलाफ कैसे कानूनी कार्रवाई और सामाजिक हस्तक्षेप को साथ लेकर चला गया। सह-संस्थापक एवं सचिव गीता शेषमणि ने कहा कि वन विभाग, पुलिस, न्यायपालिका और स्वयंसेवी संस्थाओं के बीच संस्थागत समन्वय ही संरक्षण की सफलता की कुंजी है। कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिवक्ता सुशील कुमार शुक्ला, करमबीर सिंह नलवा, कुमार किसलय, विशेष अभियोजक विनय कुमार ओझा, प्रवर्तन निदेशालय के संयुक्त निदेशक दीपक चौहान और कानूनी पत्रकार तरुण नांगिया ने अपने अनुभव साझा किए। वक्ताओं ने वन्यजीव संरक्षण कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन, अपराध से अर्जित संपत्ति की जब्ती और पीड़ित वन्यजीवों के पुनर्वास पर विस्तार से चर्चा की। समापन सत्र को सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता सत्य नारायण वशिष्ठ ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की भूमिका केवल सजा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह समाज में संवेदनशीलता और पर्यावरण के प्रति सम्मान का भाव भी विकसित करती है। उन्होंने उपस्थित न्यायाधीशों और अधिकारियों से अपील की कि वन्यजीव अपराध के मामलों में त्वरित सुनवाई और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। आयोजकों ने बताया कि इस कार्यशाला का उद्देश्य न्यायिक अधिकारियों और प्रवर्तन एजेंसियों की क्षमता बढ़ाना और वन्यजीव अपराध के खिलाफ एकीकृत रणनीति बनाना है। प्रतिभागियों ने इसे वन्यजीव संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया और कहा कि करुणा और कानून का संतुलन ही भविष्य में वन्यजीवों की रक्षा का स्थायी मार्ग बनेगा।
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