परमा एकादशी पर प्रशासन के दावों की खुली पोल, प्रतिबंध के बावजूद परिक्रमा मार्ग में दौड़ते रहे चार पहिया वाहन
Gargachary Times
11 June 2026, 20:48
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Mathura
वृंदावन। पुनीत शुक्ला
पुरुषोत्तम मास की पावन परमा एकादशी पर जहाँ एक तरफ श्रीधाम वृंदावन में लाखों श्रद्धालुओं का सैलाब अपनी आस्था की डुबकी लगा रहा था, वहीं दूसरी तरफ नगर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त नजर आई। पर्व को लेकर मथुरा-वृंदावन जिला प्रशासन और पुलिस द्वारा सुरक्षा व सुगम यातायात के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे थे, लेकिन धरातल पर इन दावों की हवा निकल गई। वीआईपी और बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों के दबाव के आगे प्रशासनिक इंतजाम बौने साबित हुए और पूरे शहर को भीषण जाम से जूझना पड़ा।
यातायात को बिगाड़ने में नगर में अवैध रूप से संचालित हो रहे ई-रिक्शा और ऑटो ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी। जहाँ प्रशासन द्वारा बिना नंबर के अवैध ई-रिक्शा और ऑटो पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की बड़ी-बड़ी बातें कही जा रही थीं, वहीं जमीनी हकीकत इसके उलट रही। परमा एकादशी के मुख्य पर्व पर पूरे शहर की सड़कों और संकरी गलियों में कीड़े-मकोड़ों की तरह बेतरतीब घूमते इन ई-रिक्शों पर लगाम लगाना स्थानीय प्रशासन के बस की बात नहीं रहा।
चौराहों पर तैनात पुलिस के सिपाहियों के सामने से ये ई-रिक्शा चालक बेखौफ होकर गाड़ियां दौड़ाते नजर आए, मानो उन्हें कानून या प्रशासनिक आदेशों का कोई डर ही न हो। नगर में बिना रुट नंबर के दौड़ रहे इन वाहनों के इस हौसले को देखकर अब आम जनता के बीच यह चर्चा आम है कि बिना पुलिस की कथित मिलीभगत और शह के इतने बड़े पैमाने पर इन अवैध ई-रिक्शों का बेधड़क संचालन मुमकिन नहीं है।
इसके अलावा सबसे हैरान करने वाली स्थिति वृंदावन के पंचकोसीय परिक्रमा मार्ग में देखने को मिली, जहाँ नियमों के मुताबिक भारी भीड़ के दौरान वाहनों का प्रवेश पूरी तरह वर्जित होना चाहिए था। इसके बावजूद, लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी के बीच परिक्रमा मार्ग में चार पहिया वाहन खुलेआम फर्राटे भरते हुए दिखाई दिए। नंगे पैर भजन गाते हुए आगे बढ़ रहे भक्तों को इन बेकाबू वाहनों और ई-रिक्शों के कारण न सिर्फ भारी असुविधा का सामना करना पड़ा, बल्कि हर समय किसी बड़ी दुर्घटना की आशंका भी बनी रही। बाहरी राज्यों से आई गाड़ियों की लंबी कतारों ने पैदल चल रहे बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों का रास्ता रोक दिया, जिससे आस्था के इस सफर में श्रद्धालुओं को भारी मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी। प्रशासन ने त्योहार से पहले रूट डायवर्जन और नो-एंट्री के जो खाके खींचे थे, वे केवल कागजों तक ही सीमित रह गए। अब जनमानस के बीच यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या प्रशासन की सारी मुस्तैदी केवल कागजी फाइलों और बैठकों तक ही सीमित रहेगी या कभी धरातल पर भी इसका सख्त असर दिखाई देगा।