वैचारिक एवं रणनीतिक संघर्ष है अशोक गहलोत और सचिन पायलट की अदावत
Gargachary Times
13 June 2026, 21:13
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डा हरिप्रकाश लवानिया धौलपुर
सचिन पायलट एवं अशोक गहलोत की सियासी अदावत राजस्थान की राजनीतिमे एवं कांग्रेस मे ऐसा अध्याय है जिसने न केवल कांग्रेस पार्टी में हलचल मचा दी वरन देश के राजनीतिक विश्लेषको का ध्यान भी दोनों द्वारा समय-समय पर दिए गए बयानों की ओर खिंचा चला आता है हाल ही में 7 जून को राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा दिया गया बयान न सिर्फ मीडिया में बरन राजनीतिक पंडितों के बीच भी चर्चा काबिषय रहा पार्टी आला कमांन भी इस विषय पर लगातार नजर बनाए हुए है मीडिया से बातचीत करते हुए अशोक गहलोत ने 22 सितंबर 2022 का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय जब मुझे कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष बनाने का प्रस्तव आया उस समय सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाने की चर्चा चली थी राजस्थान कांग्रेस के विधायक सचिन पायलट के विरोध में थे आल्हा कमान के विरोध में नहीं थे राजस्थान में मुख्यमंत्री को बदलने के विरोध में थे इस बयान की चर्चाएं मीडिया एवं राजनीतिक पंडितों ने अपने अपने हिसाब से करना शुरू कर दिया दरअसल इन दोनों का मुकाबला दो नेताओं की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा का नहीं बल्कि कांग्रेस के भीतर ओल्ड गार्ड एवं यंग तुर्क के बीच रणनीतिक संघर्ष का प्रतीक बन चुका है
सचिन पायलट के स्वभाव की सहजता एवं बयानों में लिप्त मधुरता लोगों से बातचीत का तरीका तथा सहज भाव से मुलाकात न सिर्फ युवाओं में लोकप्रिय बनाती है बल्कि अन्य लोग भी उनके व्यवहार के कायल हैं पिता राजेश पायलट के मूर्ति अनावरण कार्यक्रम में पिछले दिनों उमडे जन सैलाब के बीच उन्होंने बड़े शहज अंदाज से सभी को साथ लेकर चलने एवं आम जनता की समस्याओं का समाधान बातचीत के जरिए हल करने की बात पर जोर दिया तथा जनता के विकास में राजनीति को हथियार नहीं बनाने की अपील की उन्होंने कहा कि किसी भी समस्या का समाधान बातचीत के जरिए ही निकल सकता है बाद में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के उनके प्रति व्यवहार के बारे में कहा की गहलोत अपने बेटे वैभव की तरह ही मुझसे प्यार करते हैं बाद में मीडिया से बातचीत में अशोक गहलोत ने भी सचिन पायलट की बातों का समर्थन किया जो की पिघलती बर्फ की ओर इशारा करता है
अब थोड़ा पीछे चलकर देखते हैं तो राजस्थान की राजनीति में जादूगर कहे जाने वाले अशोक गहलोत की जमीनी पकड़ एवं उलझे हुए राजनेता की छवि है तथा कांग्रेस में विभिन्न पदों पर रहते हुए तीन बार उन्हें राजस्थान का मुख्यमंत्री बनने का गौरव हासिल हुआ है उनके द्वारा अपने कार्यकाल में चलाई गई योजनाएं बाद की सरकारों द्वारा नाम बदलकर चलाई जा रही हैं अशोक गहलोत के कार्यकाल में विकास के कार्य एवं जनता से जुड़ी लाभकारी योजनाएं खूब चलाई गई
सचिन पायलट एक युवा एवं ऊर्जावान दिवंगत कांग्रेसी नेता राजेश पायलट के पुत्र हैं एवं उन्होंने विदेश से शिक्षा हासिल की है 26 वर्ष की उम्र में पहली बार सांसद बनने एवं संचार तथा सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में राज्य मंत्री तथा कारपोरेट मामले का स्वतंत्र प्रभार संभालने का का उन्हें गौरव हासिल है सचिन पायलट युवाओं में काफी लोकप्रिय हैं सन 2013 में जब कांग्रेस पार्टी सिमट कर 21 सीटों पर आ गई थी उसके बाद कांग्रेस हाई कमान ने उन्हें 2014 में प्रदेश कांग्रेस की कमान दी गई प्रदेश के गांव ढाणी में जाकर लोगों से सीधा संपर्क स्थापित कर 2018 के चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन जोरदार रहा तथा जनता ने कांग्रेस को सरकार बनाने का मौका दिया क्योंकि सचिन पायलट ने पार्टी का मन से काम किया था स्वाभाविक था कि सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनने का विश्वास था किंतु कांग्रेस आलाकमान ने वरिष्ठता को वरीयता देते हुए अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री एवं सचिन पायलट को उपमुख्यमंत्री के साथ-साथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का दायित्व उनको सोपा कुछ दिनों बाद पायलट को लगने लगा के उनकी सरकार बनने के बावजूद जनता से किए गए वादों एवं उनका लागू करने की छूठ उन्हें नहीं मिल पा रही है सन 2020 में सरकार के संकट के समय अशोक गहलोत ने खुलकर पायलट के खिलाफ कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया था हालांकि राहुल गांधी एवं प्रियंका गांधी के हस्तक्षेप के बाद मामला पटरी पर आया किंतु सचिन पायलट के पास अब दोनों पद नहीं थे नेतृत्व एवं वर्चस्व की खीचतान के बीच पायलट ने कांग्रेस की सरकार होते हुए पेपर लीक प्रकरण एवं पिछली वसुंधरा सरकार के कथित भ्रष्टाचार पर कार्यवाही नहीं होने को लेकर धरने में जन संघर्ष यात्रा की शुरुआत की
अशोक गहलोत एवं सचिन पायलट की इस टकराहट ने स्थापित कर दिया है की राजनीति में महत्वाकांक्षा एवं अनुभव का टकराव कितना लंबा हो सकता है जहां अशोक गहलोत ने अपनी कुर्सी बचाने में अपने राजनीतिक अनुभव का सहारा लिया वहीं सचिन पायलट ने अपने धैर्य एवं युवाओं के समर्थन के दम पर अपने आप को राजस्थान के चहेते एवं प्रभावी नेता के रूप में स्वयं को स्थापित करने में सफलता पाई है देखना यह है कि पार्टी आला कमान आगामी समय में क्या रणनीति अपनाते हैं जबकि राजस्थान की कमान एक नए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के हाथों में है
अशोक गहलोत एवं सचिन पायलट की अदावत प्रदेश के इतिहास में सत्ता के संघर्ष के लिए दिलचस्प मिसाल के तौर पर जानी जाएगी