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चंबल बजरी अब बंदूकोन के साए में मजदूरों का मानो सब कुछ चौपट हो गया

Gargachary Times 15 June 2026, 21:03 40 views
Dholpur
चंबल बजरी अब बंदूकोन के साए में मजदूरों का मानो सब कुछ चौपट हो गया
डा हरिप्रकाश लवानिया धौलपुर अजीब मीठासहै मुझ गरीब के खून में भी। जिसे भी मौका मिलता है पीता जरूर है।। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा राजस्थान उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश के मुख्य सचिवों एवं महानिदेशकों की कार्यप्रणाली पर चंबल बजरी दोहन के मामले में की गई कढ़ाई के बाद धौलपुर जिले में चंबल में विद्यमान बजरी लंबे समय बाद बंदूको के साए में चाक चोबन्द सुरक्षा के साथ आराम की नींद फरमा रही है दिन रात चंबल की छाती पर चलने वाला फावड़ा अब चलता दिखाई नहीं देता चंबल के घाटों पर ट्रैक्टर ट्रॉलियों की आवाजे पूरी तरह थम चुकी है चंबल अभ्यारण क्षेत्र में सुप्रीम कोर्ट एवं एनजीटी के आदेशों के बाद अवैध चंबल बजरी खनन पर प्रशासन ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है घड़ियाल डॉल्फिन और नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने के लिए यह कदम बेहद जरूरी भी था लेकिन सालों से आर्थिक चक्र का हिस्सा बन चुके इस अवैध कारोबार के अचानक रुकने से स्थानीय अर्थव्यवस्था एवं आम आदमी की जेब और दिहाडी मजदूरों के चूल्हे पर इसका गहरा एवं सीधा असर पड़ा है चंबल की बजरी अपने गुणो के कारण इमारथम एवं भावनाओं के निर्माण के लिए पहली पसंद मानी जाती है बजरी बंद होने से आम नागरिकों को कई मोर्चों पर जूझना पड़ रहा है वेध एवं अवैध बजरिया आपूर्ति पूरी तरह से टप्प जाने से बाजार को बजरी संकट का सामना करना पड़ रहा है मध्य एवं निम्न मध्यम वर्ग के परिवारों ने जो आशियांने बनाने शुरू किए थे बेवजरी नहीं मिलने या बजट से बाहर होने के कारण अब अन्य नदियों की मिट्टी मिली हुई रेत अथवा निर्माण व काम आने वाली एम् सैण्ड के दाम अचानक आसमान छूने लगे हैं जिससे लोगों के मकान की मजबूती भी खतरे में पड़ रही है तथा कामों की रफ्तार भी धीमी पड़ी है प्रधानमंत्री आवास योजना में बनने वाले जरूरतमंदों के घर भी बजरी संकट के कारण समय पर पूरे नहीं हो पा रहे हैं चंबल नदी के किनारे बसे धौलपुर मुरैना और आसपास के जिलों के डाग क्षेत्र में रोजगार एवं वैकल्पिक साधनों की भारी कमी है ऐसे में एक बड़ी आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष के रूप से इस काम से जुड़ी थी बजरी में लगे ट्रैक्टर ट्रॉलीयो पर लगे मजदूर रातों-रात बेकार हो गए उनके सामने परिवार के पालन पोषण का गंभीर संकट संकट उत्पन्न हो गया है निर्माण कार्यों की गति धीमी होने से राजमिस्त्री पेंटर प्लंबर एवं बेलदार बाहर का रास्ता अपना कर अन्य शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं ईरान अमेरिका युद्ध से बड़े डीजल गैस एवं पेट्रोल के दामों ने आग में घी का काम किया है चंबल बजरी के कारण जिले में ट्रैक्टरों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है कई ट्रैक्टर मालिक इसलिए चिंतित हैं कि बिना बजरी के फाइनेंस कराए ट्रैक्टर की किस्तों के भरने में खासी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है पर्यावरण संरक्षण एवं जलीय जीवों और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए बजरीकाअबैधदोहन रोकना एक जरूरीव आवश्यक कदम है वही रात दिन बिना नंबरी ट्रैक्टर ट्रॉलियों द्वारा की गई दुर्घटना एवं उनकी चपेट में आए लोगों की जान की रक्षा के लिए भी यह दोहन रोकना बेहद जरूरी है पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक 2024 से अधिक 2025 में मामले दर्ज हुए तथा 4 से 5 गुना ज्यादा बजरी का अवैध दोहन हुआ है जो आगामी समय में पर्यावरण संतुलन के विकराल रूप का चित्रण करता है लेकिन स्थानीय स्तर पर मजदूरों के लिए वैकल्पिक रोजगार की कमी तथा आम आदमी के लिए बजरी के सस्ते विकल्पों की अनप्लब्धता ने इस समस्या को काफी संवेदनशील बना दिया है न्यायालय के आदेशों की अनुपालनामे धौलपुर पुलिस एवं वन विभाग द्वारा अस्थाई चौकिया का निर्माण किया गया है तथा दोहन के स्थान पर पुलिस जवान निरंतर निगरानी रख रहे हैं तथा हथियारों से लैस जवानों को तैनात किया गया है जिससे सड़कों पर दिन रात दौड़ते अवैध बजरी के ट्रैक्टर एवं ट्राली से राहत मिली है लोगों का कहना है कि अब तक लाख कोशिशें के बावजूद इस प्रकार का अवैध बजरी पर अंकुश नहीं लगा था पहली बार पुलिस द्वारा की गई कढ़ाई के बाद सड़कों से अवैध बजरी से भरे ट्रैक्टर एवं ट्रॉली पूरी तरह गायब हो चुकी है इस बाबत जानकारों का कहना है कि सरकार को मजदूरों के कौशल विकास की विशेष योजनाएं चलनी चाहिए तथा मनरेगा के कार्य दिवसों की संख्या में वृद्धि करनी चाहिए जिन लोगों ने बैंकों से कर्जा लेकर ट्रैक्टर ट्राली लिए हैं उन्हें किसने चुकाने में कुछ समय की रियायत ब्याज में राहत दिलानी चाहिए तभी मजदूरों को कुछ राहत मिल सकेगी
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