आवलखेड़ा गायत्री शक्तिपीठ परिसर में गायत्री जयंती और गंगा दशहरा पर उमड़ा आस्था का जनसैलाब: 16 कुंडीय यज्ञ से गूँजी जन्मभूमि
Gargachary Times
24 June 2026, 20:51
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Agra
आंवल खेड़ा युगऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी की पावन जन्मस्थली स्थित गायत्री शक्तिपीठ परिसर में गायत्री जयंती और गंगा दशहरा का पावन पर्व अत्यंत श्रद्धा और धूमधाम के साथ मनाया गया। दो दिनों तक चले इस भव्य आध्यात्मिक अनुष्ठान में क्षेत्र के सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्मलाभ अर्जित किया। 16 कुंडीय यज्ञ से हुआ मंगलारंभ
पर्व के विशेष उपलक्ष्य में आयोजन का मुख्य आकर्षण 16 कुंडीय गायत्री महायज्ञ रहा। अलसुबह से ही यज्ञशाला में वेदमंत्रों की गूँज सुनाई दी। आवलखेड़ा सहित आसपास के क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने विधि-विधान के साथ यज्ञ में आहुतियां प्रदान कीं। यज्ञ की अग्नि से वातावरण शुद्ध और सकारात्मक ऊर्जा से भर गया।
अखंड जप और सामूहिक पाठ का दिव्य वातावरण
यज्ञ के साथ-साथ परिसर में सुबह 5 बजे से शाम 5 बजे तक अखंड जप का आयोजन निरंतर चलता रहा। शक्तिपीठ का पूरा वातावरण मंत्रों के स्पंदन से गुंजायमान रहा। श्रद्धालुओं ने पूरी तन्मयता के साथ साधना में भाग लिया।
सायंकाल के सत्र में क्षेत्र की सुप्त आध्यात्मिकता को जागृत करने और जन-कल्याण की भावना के साथ गायत्री चालीसा का सामूहिक पाठ संपन्न हुआ। सामूहिक पाठ के दौरान पूरा परिसर 'ॐ भूर्भुवः स्वः' की गूँज से भक्तिमय हो उठा।
उमड़ा जनसैलाब
युगऋषि की जन्मभूमि पर आयोजित इस कार्यक्रम को लेकर क्षेत्रवासियों में विशेष उत्साह देखा गया। आवलखेड़ा सहित दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से भारी संख्या में श्रद्धालु शक्तिपीठ पहुँचे। गायत्री परिवार के स्वयंसेवकों ने अनुशासित ढंग से व्यवस्थाओं का संचालन किया।
कार्यक्रम के अंत में गायत्री परिवार के सदस्यों द्वारा सभी के सुख-समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना की गई। अंत में प्रसाद वितरण के साथ इस पावन अनुष्ठान का समापन हुआ।
आंवल खेड़ा गायत्री शक्तिपीठ परिसर के व्यवस्थापक जीतेंद्र द्विवेदी ने बताया कि इस भव्य आयोजन ने एक बार फिर आवलखेड़ा की धरा को आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत कर दिया, जिससे क्षेत्र में भक्ति का वातावरण और अधिक प्रगाढ़ हुआ।
आवल खेड़ा युग ऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी की पावन जन्मभूमि की देख रेख कर रहे आंवल खेड़ा निवासी राजेश शर्मा ने बताया कि आज गायत्री जयंती व गंगा दशहरा के शुभ अवसर पर गुरुदेव की पावन जन्मभूमि में भी हजारों श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।