एलआईसी ऑफिस की लाइब्रेरी से घायल मादा सिवेट का रेस्क्यू
Gargachary Times
24 June 2026, 20:55
2 views
Mathura
फरह। आगरा सिकंदरा स्थित जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ऑफिस की लाइब्रेरी में मंगलवार को एक दुर्लभ मादा एशियन पाम सिवेट मिलने से हड़कंप मच गया। कर्मचारियों की सूझबूझ और वाइल्डलाइफ एसओएस की त्वरित कार्रवाई से सिवेट की जान बच गई। इलाज के बाद उसे प्राकृतिक आवास में सुरक्षित छोड़ दिया गया।
घटना उस समय हुई जब ऑफिस कर्मचारियों ने लाइब्रेरी में एक जंगली जानवर को घूमते देखा। तुरंत लाइब्रेरी का दरवाजा बंद कर दिया गया ताकि सिवेट बिल्डिंग में और अंदर न जा सके। इसके बाद कर्मचारियों ने वाइल्डलाइफ एसओएस की आगरा-मथुरा रैपिड रिस्पॉन्स यूनिट हेल्पलाइन 9917109666 पर सूचना दी।
सूचना मिलते ही रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। लाइब्रेरी की तलाशी के दौरान टीम को सिवेट एक टेबल के नीचे डरी-सहमी हालत में छिपी मिली। विशेषज्ञों के अनुसार, अनजान माहौल में घबरा जाने पर यह प्रजाति अक्सर ऐसा ही व्यवहार करती है। टीम ने सावधानी से उसे रेस्क्यू किया। जांच में पता चला कि मादा सिवेट की नाक पर हल्की चोट लगी थी। उसे तुरंत वाइल्डलाइफ एसओएस ट्रांजिट फैसिलिटी ले जाया गया।
वहां वेटरनरी टीम ने 24 घंटे निगरानी में उसका इलाज किया। घाव की ड्रेसिंग की गई और पूरी तरह स्वस्थ होने की पुष्टि के बाद सिवेट को जंगल में उसके अनुकूल स्थान पर छोड़ दिया गया।
एशियन पाम सिवेट वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I के तहत संरक्षित प्रजाति है। मुख्य रूप से निशाचर यह जीव बीज फैलाकर जंगल को पनपने में अहम भूमिका निभाता है। प्राकृतिक आवास घटने और हरियाली कम होने से अब शहरी इलाकों में इनका दिखना आम हो गया है।
वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने कहा, "एलआईसी स्टाफ की तेज और जिम्मेदारी भरी कार्रवाई से रेस्क्यू संभव हुआ। लाइब्रेरी सुरक्षित कर तुरंत सूचना देने से सिवेट टीम के आने तक सुरक्षित रही। शहरों में वन्यजीवों से सामना आम है, समझदारी भरी प्रतिक्रिया ही सबसे सुरक्षित है।"
कंजर्वेशन प्रोजेक्ट्स के डायरेक्टर बैजू राज एम.वी ने बताया, "एशियन पाम सिवेट शर्मीले होते हैं और मर्जी से इंसानी इलाकों में नहीं आते। इनका शहर में आना बढ़ते शहरीकरण और वन्यजीव आवास के टकराव को दिखाता है। समय पर मदद से यह अपने घर लौट गई।"