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वृंदावन में उमड़ा आस्था का सैलाब: ठाकुर राधा दामोदर मंदिर में धूमधाम से मनाया गया जलयात्रा उत्सव

Gargachary Times 30 June 2026, 19:43 44 views
Mathura
वृंदावन में उमड़ा आस्था का सैलाब: ठाकुर राधा दामोदर मंदिर में धूमधाम से मनाया गया जलयात्रा उत्सव
वृंदावन । नगर के सप्त देवालयों में से प्रमुख ठाकुर राधा दामोदर मंदिर में जलयात्रा महोत्सव बड़े ही धूमधाम, श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। ज्येष्ठ मास की भीषण गर्मी से आराध्य देव को शीतलता और राहत प्रदान करने के लिए आयोजित इस भव्य उत्सव में देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं ने ठाकुर जी के अलौकिक दर्शन कर पुण्य लाभ कमाया। मंदिर के सेवायत निताई गोस्वामी ने बताया कि आज के इस उत्सव को मंदिर के सेवायत आचार्य तरुण गोस्वामी महाराज के सानिध्य में मनाया गया है। वही उन्हें बताया कि ब्रज में ठाकुर जी को साक्षात जीवंत स्वरूप मानकर उनकी सेवा की जाती है। वर्तमान में ज्येष्ठ मास की भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान को देखते हुए ठाकुर जी को सुख और शीतलता प्रदान करने हेतु इस विशेष जलयात्रा का आयोजन किया गया। इसके तहत मंदिर परिसर को पूरी तरह से शीतल बनाया गया। मंदिर के गर्भगृह और प्रांगण में आधुनिक पानी के फव्वारे लगाए गए, जिससे गिरती जल की बूंदों ने समूचे वातावरण को दिव्य और खुशनुमा बना दिया। वही उन्होंने बताया कि जलयात्रा के मुख्य आकर्षण में ठाकुर जी का महाअभिषेक शामिल रहा। सेवायत आचार्यों द्वारा ठाकुर राधा दामोदर लाल को भारत की सात पवित्र नदियों के पवित्र जल से स्नान कराया गया। इसके साथ ही विभिन्न प्रकार के मौसमी फलों के रस, सुगंधित केवड़ा, गुलाब जल और गर्मी से राहत प्रदान करने वाली विशेष आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों से युक्त शीतल जल से ठाकुर जी का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भव्य अभिषेक किया गया। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर 'राधा दामोदर की जय' और 'राधे-राधे' के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। अभिषेक के उपरांत ठाकुर जी के समक्ष अत्यंत आकर्षक और भव्य फूलबंगला सजाया गया। रंग-बिरंगे सुगंधित देशी-विदेशी फूलों और शीतल लताओं से सजे इस बंगले में विराजे ठाकुर जी की छवि देखते ही बन रही थी। ठाकुर जी को इस अवसर पर शीतलता प्रदान करने वाले विशेष भोग जैसे कि सत्तू, आम का पना, चंदन का शरबत और मौसमी फल अर्पित किए गए। बाद में इस पावन और शीतल प्रसाद को मंदिर में उपस्थित भारी संख्या में श्रद्धालुओं के बीच वितरित किया गया।वही उन्होंने बताया कि ब्रज की यह अनूठी सेवा परंपरा सदियों पुरानी है, जो भक्त और भगवान के बीच के आत्मीय संबंध को दर्शाती है।
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