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5 लाख पौधों से लौटी हरियाली: वाइल्डलाइफ एसओएस ने बंजर जमीनों को बनाया वन्यजीवों का घर

Gargachary Times 3 July 2026, 20:00 35 views
Mathura
5 लाख पौधों से लौटी हरियाली: वाइल्डलाइफ एसओएस ने बंजर जमीनों को बनाया वन्यजीवों का घर
फरह। वन्यजीव संरक्षण संस्था वाइल्डलाइफ एसओएस ने देशभर में 5 लाख से अधिक देशी पौधे रोपित कर पारिस्थितिक पुनर्स्थापना के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। वन महोत्सव के अवसर पर संस्था ने बताया कि पिछले 5 वर्षों में किए गए वृक्षारोपण से प्राकृतिक आवासों का पुनर्जीवन, जैव विविधता में वृद्धि और दीर्घकालिक पारिस्थितिक स्थिरता को मजबूती मिली है। संस्था ने इस वर्ष मथुरा स्थित हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र में 2,000 से अधिक देशी पौधे लगाए। अभियान में जामुन, अनार, अमरूद, शहतूत, इमली, नीम, गूलर और कटहल जैसे फलदार वृक्षों को प्राथमिकता दी गई, जो स्थानीय जैव विविधता को समृद्ध करते हैं। यह पहल मथुरा के एलिफेंट प्रोजेक्ट, कर्नाटक के बनेरघट्टा भालू बचाव केंद्र, रामदुर्गा वैली हैबिटेट कंजर्वेशन प्रोजेक्ट, महाराष्ट्र के लेपर्ड प्रोजेक्ट और जम्मू-कश्मीर तक फैली है। इन प्रयासों से क्षतिग्रस्त पारिस्थितिक तंत्र पुनर्जीवित हुए, मिट्टी की गुणवत्ता सुधरी, मृदा अपरदन रुका और वन्यजीवों के लिए सुरक्षित आवास विकसित हुए। सबसे उल्लेखनीय परिणाम कर्नाटक की रामदुर्गा घाटी में दिखा, जहां खनन से बंजर हुई भूमि वृक्षारोपण से समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र में बदल गई। भूजल स्तर सुधरने से गर्मियों में भी खेती संभव हुई और ग्रामीण पलायन घटा। मथुरा में वृक्षारोपण से जकोबियन कुक्कू, काला तीतर, इंडियन ग्रे हॉर्नबिल, किंगफिशर जैसी पक्षी प्रजातियां लौटीं। बंगाल मॉनिटर लिजर्ड की उपस्थिति भी दर्ज की गई, जो स्वस्थ तंत्र का संकेत है। सह-संस्थापक एवं सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने कहा, "5 लाख पौधे केवल संख्या नहीं, बल्कि वन्यजीवों और मानव समुदायों के भविष्य को पुनर्जीवित करने की प्रतिबद्धता है। हर पौधा जैव विविधता में निवेश है।" सह-संस्थापक गीता शेषमणि बोलीं, "सफल संरक्षण से वन्यजीवों और समुदायों दोनों को लाभ मिलना चाहिए। हमने वनों पर दबाव कम कर स्थानीय आजीविका सशक्त की।" डायरेक्टर कंजर्वेशन प्रोजेक्ट्स बैजू राज एम.वी.ने कहा, "देशी वृक्ष मिट्टी की उर्वरता बढ़ाते हैं, भूजल पुनर्भरित करते हैं और वन्यजीवों को भोजन-आश्रय देते हैं। मथुरा में बढ़ी जैव विविधता इसका प्रमाण है।
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