आगरा में प्लास्टिक-तार के जाल में फंसा 8 फीट का अजगर, सर्जरी के बाद बची जान
Gargachary Times
13 July 2026, 20:33
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Mathura
फरह। प्लास्टिक कचरा और लापरवाही से फेंका गया तार वन्यजीवों के लिए जानलेवा बन रहा है। इसका उदाहरण शनिवार को आगरा के सिकंदरा क्षेत्र में देखने को मिला, जहां वाइल्डलाइफ एसओएस की रैपिड रिस्पॉन्स यूनिट ने 8 फीट लंबे इंडियन रॉक पायथन और एक इंडियन वुल्फ स्नेक को सुरक्षित रेस्क्यू किया।
सिकंदरा में कचरे के ढेर के पास एक करीब 8 फीट लंबा अजगर प्लास्टिक की बोतलों और फेंके गए टेलीफोन के तार में बुरी तरह फंस गया था। निकलने की हर कोशिश में तार उसके शरीर में और धंसता जा रहा था, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया था। स्थानीय लोगों की सूचना पर वाइल्डलाइफ एसओएस की टीम मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद अजगर को तार और प्लास्टिक से मुक्त कराया। उसे तुरंत उपचार के लिए आगरा भालू संरक्षण केंद्र ले जाया गया।
केंद्र में पशु चिकित्सकों ने अजगर की सर्जरी कर उसके शरीर में धंसे तार और प्लास्टिक की बोतल निकाली। रेडियोग्राफिक जांच में उसकी हड्डियां सुरक्षित मिलीं, लेकिन शरीर पर कई गहरे घाव हैं। फिलहाल अजगर चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है। डॉक्टरों के अनुसार पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उसे उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया जाएगा।
इसी दौरान सिकंदरा की एक हाउसिंग कॉलोनी से दूसरा रेस्क्यू भी किया गया। यहां एक घर की वॉशिंग मशीन के भीतर इंडियन वुल्फ स्नेक छिपा हुआ मिला। परिवार में दहशत फैल गई। टीम ने मशीन को सावधानी से खोलकर सांप को सुरक्षित बाहर निकाला। उसे कोई चोट नहीं थी, इसलिए उसे तुरंत पास के जंगल में छोड़ दिया गया।
नेशनल चंबल सेंक्चुरी के डिप्टी कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट राजेश कुमार ने कहा कि जंगलों के आसपास फेंका गया कचरा वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा है। वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक कार्तिक सत्यनारायण ने लोगों से प्लास्टिक और अन्य कचरे का जिम्मेदारी से निस्तारण करने की अपील की।
संस्था ने बताया कि इंडियन रॉक पायथन आईयूसीएन की रेड लिस्ट में 'नियर थ्रेटेंड' श्रेणी में है और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-1 के तहत संरक्षित प्रजाति है।