वृंदावन में बेकाबू ई-रिक्शा और ऑटो का तांडव, प्रशासन की 'कुंभकर्णी नींद' से श्रद्धालुओं की जान जोखिम में
Gargachary Times
16 July 2026, 21:00
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Mathura
धर्मनगरी वृंदावन की संकरी गलियाँ और मुख्य मार्ग आज ई-रिक्शा और ऑटो चालकों की बेलगाम मनमानी के कारण 'यमलोक' का रूप धारण करते जा रहे हैं। गुरुवार को लोई बाजार स्थित एक बर्तन भंडार पर हुए हादसे ने प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। अनियंत्रित होकर दुकान में घुसे एक ऑटो की चपेट में आने से एक श्रद्धालु गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसके बाद से स्थानीय निवासियों और व्यापारियों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।
यह कोई इकलौती घटना नहीं है, बल्कि वृंदावन की सड़कों पर आए दिन ई-रिक्शा और ऑटो चालकों की लापरवाही श्रद्धालुओं और राहगीरों के लिए काल बनकर दौड़ रही है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि जिन ऑटो चालकों को मथुरा-वृंदावन के मुख्य मार्ग तक ही सीमित रहना चाहिए, वे अपनी धौंस जमाते हुए शहर के मुख्य बाजारों और तंग गलियों में भी वाहनों को घुसेड़ देते हैं, जिससे पहले से ही अस्त-व्यस्त यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाती है।
इसके अतिरिक्त, इन वाहनों में सवारियों की संख्या पर भी प्रशासन का कोई नियंत्रण नहीं है। ऑटो चालक क्षमता से अधिक सवारियाँ भरकर सड़कों पर फर्राटा भरते हैं, जो किसी भी समय एक बड़ी और जानलेवा दुर्घटना का कारण बन सकता है। आए दिन श्रद्धालुओं के साथ होती ऐसी दुर्घटनाएं यह स्पष्ट कर रही हैं कि प्रशासन की नाक के नीचे कानून-व्यवस्था को ठेंगा दिखाया जा रहा है।
लगातार शिकायतों के बावजूद ट्रैफिक विभाग और स्थानीय प्रशासन पूरी तरह 'कुंभकर्णी नींद' सोया हुआ है। ऐसा प्रतीत होता है कि जिम्मेदार अधिकारी अब किसी बड़ी जनहानि का इंतजार कर रहे हैं। न तो इन ई-रिक्शा और ऑटो के संचालन के लिए कोई ठोस नीति है और न ही यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कोई सख्त कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन की इस 'अंधेर गर्दी' ने निवासियों का जीना दूभर कर दिया है। व्यापारियों और स्थानीय निवासियों ने चेताया है कि यदि समय रहते इन बेलगाम वाहनों पर रोक नहीं लगाई गई और यातायात व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया गया, तो प्रशासन को इसके गंभीर परिणामों के लिए तैयार रहना होगा।