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गिर्राज नगरी में गुरु शिष्य परंपरा का अनूठा पर्व मुड़िया महोउत्सव मनाया गया

Gargachary Times 29 July 2026, 21:16 53 views
Mathura
गिर्राज नगरी में गुरु शिष्य परंपरा का अनूठा पर्व मुड़िया महोउत्सव मनाया गया
गोवर्धन. गिरिराज नगरी में मुड़िया पूर्णिमा मेला सन 1558 से लगातार लगता चला आया है. इस साल 470वां मुड़िया महोउत्सव मनाया जायेगा। उत्तर प्रदेश सरकार ने मुड़िया मेला को सन 2009 में राजकीय मेला घोषित किया। समय बदलता गया मेला परमान चढ़ता गया.आज ब्रजभूमि के मेले को मिनी कुंभ कहा जाता है। मुड़िया पूर्णिमा पर गिरिराज नगरी में हर वर्ष लाखों श्रद्धालु आते हैं। परिक्रमा देते हैं। श्री कृष्ण चैतन्य महाप्रभु का ब्रज में आगमन हुआ। उस समय दिल्ली में मुगल शासन था। श्रीकृष्ण चैतन्य महाप्रभु के प्रमुख शिष्य श्री चैतन्य सम्प्रदाय के आचार्य श्री पाद सनातन गोस्वामी महाराज इस युग के नायक थे। सनातन गोस्वामी का जन्म सन 1488 ईसवी में पश्चिम बंगाल में हुआ था। पश्चिम बंगाल में मुगल बादशाह हुसैन के मंत्री रहे। लेकिन राजसी ठाट वाट में उनका मन नहीं लगा। तभी उन्हें श्री कृष्ण चैतन्य के दर्शन कर वैराग्य हो गया। वैभव को त्याग कर बनारस में चैतन्य महाप्रभु से दीक्षा प्राप्त की। 1515 ईसवी में श्रीधाम वृंदावन आए। सन 1526 में ईसवी में मदन मोहन की मूर्ति स्थापना की। सनातन गोस्वामी महाराज ने संस्कृत में विपुल ब्रज साहित्य की रचना की। वृद्धावस्था में चक्रलेश्वर महादेव मंदिर के पास झोपड़ी बनाकर रहने लगे। मानसी गंगा की परिक्रमा करते थे। एक बार बरसात का समय था , मानसी गंगा जल से भरी थी। मानसी गंगा के चारों तरफ झाड़ियां थी। मानसी गंगा के तट पर रहना मुश्किल हो रहा था। रात में जब सनातन सो गए। तो उनको सपने में भगवान शंकर ने दर्शन दिए। कहा कि सनातन तुम्हारे भजन से मुझे आनंद मिलता है। मुझे छोड़कर कही अन्य जगह न जाओ। तुम्हे कोई परेशानी नहीं होगी। कहते हैं कि आज भी उनकी कुटी में बारिश के दिनों कीट पतंगों का प्रकोप नहीं होता है। = गुरु पूर्णिमा से हुईं मुड़िया पूर्णिमा सन 1557 ईसवी से 42 वर्ष तक सनातन पाद गोस्वामी ने ब्रज वास किया। सनातन पाद गोस्वामी गुरु पूर्णिमा के दिन गोलोक वासी हो गए । सनातन पाद गोस्वामी सिर मुड़ा कर रहते थे। उन्हें ब्रजवासी मुड़िया बाबा भी कहा करते थे। जब उनका गोलोक गमन हो गया तो शिष्यों ने अपने सिर मुड़वाकर मानसी गंगा में स्नान कर परिक्रमा दी। तब से गुरु पूर्णिमा को गोवर्धन में मुड़िया पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है।
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