छात्रवृत्ति योजना में लापरवाही किसी भी स्तर पर नहीं होगी स्वीकार-जिलाधिकारी
Gargachary Times
7 August 2026, 20:17
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Mainpuri
मैनपुरी - जिलाधिकारी डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने पूर्वदशम् एवं दशमोत्तर छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना की समीक्षा के दौरान कहा कि छात्रवृत्ति केवल एक वित्तीय सहायता योजना नहीं बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों की शिक्षा को निरंतर बनाए रखने का महत्वपूर्ण माध्यम है, किसी भी पात्र विद्यार्थी को तकनीकी त्रुटि, संस्थागत लापरवाही अथवा विलंब के कारण छात्रवृत्ति से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि समाज कल्याण, माध्यमिक शिक्षा, उच्च शिक्षा, एन.आई.सी., विद्यालय एवं महाविद्यालय सभी मिलकर टीम भावना के साथ कार्य करें, किसी भी स्तर पर जिम्मेदारी दूसरे विभाग पर डालने की प्रवृत्ति स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होने छात्रवृत्ति पोर्टल पर मास्टर डाटा, संस्थानों की प्रोफाइल लॉकिंग, नवीनीकरण, नवीन आवेदन, बायोमेट्रिक सत्यापन एवं तकनीकी समस्याओं की समीक्षा करते हुए कहा कि सभी शिक्षण संस्थान अपने मास्टर डाटा को तत्काल अद्यतन करें, विद्यालय का नाम, पता, संचालित पाठ्यक्रम, प्रधानाचार्य का नाम, मोबाइल नंबर, ई-मेल, आधार विवरण तथा छात्रवृत्ति नोडल अधिकारी का विवरण पूर्णतः सही ढंग से भरा जाये, वर्तमान शैक्षिक सत्र में कार्यरत प्रधानाचार्य का ही विवरण पोर्टल पर दर्ज किया जाए, किसी भी स्थिति में पूर्व प्रधानाचार्य अथवा पुराने नोडल अधिकारी का नाम पोर्टल पर दर्ज न हो।
श्री त्रिपाठी ने कहा कि छात्रवृत्ति नोडल अधिकारी के रूप में केवल वरिष्ठ शिक्षक, अधिकृत प्रधानाध्यापक को ही नामित किया जाए, प्रत्येक विद्यालय, महाविद्यालय में छात्रवृत्ति स्वीकृति समिति का विधिवत गठन कर उसकी बैठक आयोजित की जाये, निरीक्षण, ऑडिट के दौरान समिति का गठन न पाये जाने पर संबंधित प्रधानाचार्य की जिम्मेदारी तय होगी। समीक्षा के दौरान पाया कि कई संस्थानों द्वारा अभी तक प्रोफाइल लॉकिंग एवं मास्टर डाटा अद्यतन का कार्य पूरा नहीं किया गया है, जिस पर उन्होने कहा कि सभी संस्थान अभियान चलाकर मास्टर डाटा, प्रोफाइल लॉकिंग, नवीनीकरण तथा नवीन आवेदन का कार्य पूरा करें, कक्षा-09 से 12 तक के विद्यार्थियों के साथ-साथ उच्च शिक्षा संस्थानों के पात्र विद्यार्थियों का कार्य भी निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण कराया जाए। उन्होंने छात्रवृत्ति संबंधी समस्याओं के त्वरित निस्तारण के लिए समाज कल्याण, एन.आई.सी. तथा संबंधित अधिकारियों का अलग व्हाट्सएप ग्रुप बनाने के निर्देश दिए ताकि तकनीकी समस्याओं का तत्काल समाधान हो सके। उन्होने कहा कि यदि कोई विद्यार्थी किसी शिक्षण संस्थान में अध्ययनरत है तो उसके छात्रवृत्ति आवेदन, आवश्यक अभिलेखों का सत्यापन, बैंक खाते की जानकारी, आधार सत्यापन एवं अन्य औपचारिकताओं को पूर्ण कराना संबंधित संस्था की जिम्मेदारी है, यह दायित्व विद्यार्थी का नहीं बल्कि शिक्षण संस्था का है।
जिलाधिकारी ने कहा कि कई बार विद्यार्थी बाद में शिकायत करते हैं कि उनका डाटा गलत भरा गया अथवा आवेदन निरस्त हो गया, उस समय सुधार की संभावना नहीं बचती और पूरा शैक्षिक वर्ष प्रभावित होता है, इसलिए प्रधानाचार्य स्वयं पूरी प्रक्रिया की नियमित निगरानी करें, कंप्यूटर ऑपरेटर के भरोसे कार्य न छोड़ें, अतिरिक्त कंप्यूटर ऑपरेटर, कॉमन सर्विस सेंटर, साइबर कैफे की सहायता लेकर छात्रवृत्ति सम्बन्धी डाटा समय से अपलोड करें। उन्होने कहा कि डुप्लिकेट एडमिशन, फर्जी नामांकन के मामलों को गंभीरता से लिया जाएगा, यदि छात्रवृत्ति पोर्टल पर दर्ज विद्यार्थी बायोमेट्रिक सत्यापन के लिए उपस्थित नहीं होते हैं तो ऐसे मामलों की जांच कर उन्हें फर्जी प्रवेश माना जाएगा, आवश्यकता पड़ने पर विश्वविद्यालय एवं कुलपति को पत्र लिखकर संबंधित संस्थानों के विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी, फर्जी नामांकन, छात्रवृत्ति प्राप्त करने के उद्देश्य से गलत जानकारी दर्ज करना गंभीर अनियमितता है और ऐसे मामलों में मान्यता निरस्तीकरण सहित कठोर कार्यवाही होगी। उन्होंने कहा कि किसी भी विद्यालय, महाविद्यालय की लॉगिन पर कोई भी आवेदन 15 दिन से अधिक लंबित न रहे, प्रत्येक आवेदन का समयबद्ध परीक्षण कर उसे अग्रसारित अथवा कारण सहित निरस्त किया जाए, अनावश्यक रूप से आवेदन लंबित रहने से प्रगति प्रभावित होती है तथा सीएम डैशबोर्ड पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।