अटल जी ने निष्कलंक और निष्कपट राजनीति को बढ़ाया आगे, उनके लिए राष्ट्रहित हमेशा रहा सर्वोपरि : सीएम योगी
Gargachary Times
16 August 2026, 21:00
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Lucknow
लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी ने भारतीय राजनीति में निष्कलंक और निष्कपट राजनीति को आगे बढ़ाया। उनके लिए राजनीति केवल सत्ता प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण, मूल्यों और आदर्शों का मार्ग थी। यही वजह है कि किसी भी दल या किसी भी पक्ष के लोग रहे हों, सभी ने अटल जी की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। अटल जी के लिए 'राष्ट्र प्रथम' केवल विचार नहीं, बल्कि उनके सार्वजनिक जीवन का आधार था। देशहित की बात आने पर उन्होंने दल के हित को भी तिलांजलि देकर राष्ट्र के पक्ष में निर्णय लिए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पं. अटल बिहारी वाजपेयी कन्वेंशन सेंटर में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की आठवीं पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा एवं साहित्य संध्या को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने अटल जी की स्मृतियों को नमन करते हुए प्रदेशवासियों की ओर से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के विचारों पर आधारित पुस्तिका का विमोचन भी किया।
उन्होंने कहा कि कारगिल युद्ध में दुनिया ने उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति देखी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कश्मीर में अनुच्छेद 370 समाप्त कर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और अटल जी के सपने को साकार किया गया। लखनऊ में अटल जी के नाम पर प्रदेश की पहली मेडिकल युनिवर्सिटी बनी और बलरामपुर में अब युद्धस्तर पर मेडिकल कॉलेज बन रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कांग्रेस के अभद्र और अशिष्ट आचरण तथा सेना पर उंगली उठाने पर जब सवाल खड़े होते हैं तो उनकी राष्ट्रनिष्ठा पर भी संदेह होने लगता है। पूरी दुनिया देख रही थी जब पाकिस्तान अमेरिका में गिड़गिड़ा रहा था और दुम दबाकर जान की भीख मांग रहा था।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज दल और गठबंधन बनते-टूटते हैं। क्षणिक स्वार्थ की सिद्धि न होने पर लोग पूरे ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने पर उतारू हो जाते हैं, लेकिन श्रद्धेय अटल जी ने एक बार नहीं, अनेक बार राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान बांग्लादेश में पाकिस्तान के अमानवीय अत्याचार के खिलाफ पूरे देश की एकता दिखनी चाहिए थी। उस समय अटल बिहारी वाजपेयी आगे आए और उन्होंने बांग्लादेश मुक्ति के पूरे अभियान का समर्थन किया।
आपातकाल के दौरान भी अटल जी ने दल से अधिक महत्वपूर्ण देश को माना
मुख्यमंत्री ने कहा कि आपातकाल के दौरान भी अटल जी ने दल से अधिक महत्वपूर्ण देश को माना। उन्होंने भारतीय जनसंघ का जनता पार्टी में विलय किया और देश में लोकतंत्र को पुनर्जीवित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चले आंदोलन में किसी दल की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका थी तो वह भारतीय जनसंघ की थी। जनसंघ ने उस पूरे अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लिया। जब भी देश को आवश्यकता पड़ी, अटल जी ने राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा। 1989 के बाद जब भारत की आर्थिक स्थिति डांवाडोल थी, तब सवाल था कि दुनिया के मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व और देश का पक्ष मजबूती से कौन रखेगा। नेता प्रतिपक्ष के रूप में अटल जी को यह दायित्व दिया गया। उनसे पूछा गया कि विपक्ष का काम तो सत्ता पक्ष पर आरोप-प्रत्यारोप करना है, ऐसे में आप भारत का प्रतिनिधित्व कैसे करेंगे? इस पर अटल जी ने कहा, "यह मेरे देश से जुड़ा मुद्दा होगा। वैश्विक मंच पर भारत के हित में जो बात होगी, मैं वही बात वहां कहूंगा।"
समन्वयवादी राजनीति को आगे बढ़ाने का काम श्रद्धेय अटल जी ने किया
उन्होंने कहा कि श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी ने नेता प्रतिपक्ष के रूप में भी दुनिया के मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए देशहित को सर्वोपरि रखा और भारत के हितों को संरक्षित करते हुए अपनी बात रखी। 1990 का दशक भारतीय राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहा। यह राजनीतिक अस्थिरता का दौर था। राजनीतिक अस्थिरता लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा और सुशासन के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा होती है। 1989 के बाद 1991, फिर 1996, 1998 और 1999 में लगातार चुनाव हुए। इस राजनीतिक अस्थिरता को स्थिरता में बदलकर समन्वयवादी राजनीति को आगे बढ़ाने का काम श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी ने किया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अटल जी की जन्मतिथि 25 दिसंबर को 'सुशासन दिवस' के रूप में मनाने का निर्णय लिया। अटल जी तीन बार भारत के प्रधानमंत्री रहे, पहले वे विदेश मंत्री भी रहे और अपनी निष्कलंक छवि के साथ देश को यशस्वी नेतृत्व दिया।
उन्होंने कहा कि कारगिल युद्ध के समय अटल जी को लेकर कहा जाता था कि वह कवि हृदय हैं, सहज और सरल हैं, क्या युद्ध लड़ पाएंगे? लेकिन अटल जी ने कारगिल युद्ध के दौरान अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय देकर दुनिया में भारत का लोहा मनवाया। उस समय अमेरिका के राष्ट्रपति बार-बार कहते थे कि एक बार अमेरिका आइए, भारत और पाकिस्तान मिलकर समाधान निकालें। इस पर अटल जी ने स्पष्ट कहा था, "मैं भारत तब तक नहीं छोड़ सकता, जब तक एक भी दुश्मन भारत की धरती पर, भारत की सीमा के अंदर रहेगा।"
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान दुम दबाकर कैसे जान की भीख मांगता था। अमेरिका के अंदर गिड़गिड़ा रहा था, यह दुनिया ने देखा है। कारगिल युद्ध के दौरान देश ने अटल जी की दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय भी देखा। देश में इंफ्रास्ट्रक्चर कैसा होना चाहिए, अन्य योजना कैसी होनी चाहिए और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए क्या किया जाना चाहिए, इन क्षेत्रों में अटल जी की महत्वपूर्ण देन रही। अटल जी ने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ की थी। कश्मीर में अनुच्छेद 370 और परमिट सिस्टम को समाप्त करने को लेकर आंदोलन चला था। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कश्मीर को अनुच्छेद 370 से मुक्त कर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और श्रद्धेय अटल जी के उस सपने को साकार किया गया है।
अटल जी के विचार आज भी प्रासंगिक
उन्होंने कहा कि अटल जी के विचार आज भी प्रासंगिक हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश सरकार ने उसी लखनऊ में, जिसने अटल जी को पांच बार सांसद चुना, 'राष्ट्र प्रेरणा स्थल' के रूप में उनकी स्मृतियों का जीवंत स्मारक बनाया है। प्रदेश की पहली मेडिकल युनिवर्सिटी श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर लखनऊ में स्थापित हो चुकी है। प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेज इससे संबद्ध हैं। अटल जी की प्रथम कर्मभूमि बलरामपुर में भी उनके नाम पर मेडिकल कॉलेज का निर्माण युद्धस्तर पर चल रहा है और नए सत्र से वहां प्रवेश प्रारंभ हो जाएंगे। अटल जी का पैतृक गांव आगरा जनपद के बटेश्वर में है। वहां उनकी भव्य प्रतिमा के साथ म्यूजियम और स्मारक के निर्माण का कार्य पूरा हो चुका है।
अटल जी की ख्याति एक राजनेता के साथ ही कवि, लेखक और साहित्यकार के रूप में भी रही है। उनकी पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में सुविख्यात कवि अशोक चक्रधर और सुप्रसिद्ध गायिका मालिनी अवस्थी उपस्थित हैं। उन्होंने दोनों का अभिनंदन करते हुए अटल जी की स्मृतियों को नमन किया।
उन्होंने कहा कि वर्ष में दो ऐसे अवसर आते हैं, जब अटल जी का स्मरण बड़े पैमाने पर किया जाता है। अटल बिहारी वाजपेयी फाउंडेशन के माध्यम से उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक लगातार इन कार्यक्रमों को आगे बढ़ा रहे हैं। आज ऐसे दृश्य भी देखने को मिलते हैं कि लोग अपने परिवार तक को भूल जाते हैं, इस प्रकार की खबरें भी सामने आती हैं। ऐसे श्रद्धेय नेता, जिन्होंने लखनऊ और देश को एक पहचान दी, उनकी स्मृतियों को इन कार्यक्रमों के माध्यम से नई ऊंचाइयां मिल रही हैं। उन्होंने इसके लिए उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और पूरे फाउंडेशन का हृदय से आभार जताया।
इस दौरान उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य, कार्यक्रम के आयोजक उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, कवि व साहित्यकार अशोक चक्रधर, प्रदेश सरकार में मंत्री चौधरी भूपेंद्र सिंह, दारा सिंह चौहान, दयाशंकर मिश्र 'दयालु', दयाशंकर सिंह, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल, सांसद अमरपाल मौर्य, सांसद बृजलाल, पूर्व सांसद अशोक बाजपेयी और श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी फाउंडेशन से जुड़े सभी पदाधिकारी उपस्थित थे।