छाता शुगर मिल: बजट के पहाड़ के बीच बदहाली और सुरक्षा पर सवाल
Gargachary Times
17 August 2026, 20:31
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Mathura
मथुरा। नारायण सिंह।
छाता की बंद पड़ी चीनी मिल को दोबारा शुरू करने की कवायद ने क्षेत्र के किसानों में उम्मीद जरूर जगाई है, लेकिन मिल परिसर की मौजूदा स्थिति कई सवाल भी खड़े कर रही है। एक तरफ सरकार नई चीनी मिल, डिस्टलरी और लॉजिस्टिक हब के लिए करोड़ों रुपये की योजनाएं आगे बढ़ा रही है, वहीं दूसरी ओर वर्षों से बंद पड़े पुराने परिसर की सुरक्षा, सफाई, रखरखाव और चोरी की घटनाओं को लेकर जवाबदेही का सवाल सामने है।
छाता चीनी मिल वर्ष 1978 में शुरू हुई थी और इसकी प्रारंभिक क्षमता 1250 टीसीडी थी। वर्ष 1994 में क्षमता बढ़ाकर 2500 टीसीडी की गई। वर्ष 2009 के आसपास मिल बंद हो गई। इसके बाद लंबे समय तक परिसर वीरान पड़ा रहा और मशीनरी का एक बड़ा हिस्सा दूसरी इकाइयों में भेजे जाने की जानकारी सामने आई।
मुख्यमंत्री की घोषणा से नई उम्मीद
छाता चीनी मिल को फिर से शुरू कराने का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक और किसान आंदोलनों के केंद्र में रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने इसे पुनर्जीवित करने की दिशा में कदम बढ़ाया। वर्ष 2023 में प्रदेश मंत्रिपरिषद ने छाता में नई 3000 टीसीडी क्षमता की चीनी मिल के साथ 60 केएलपीडी डिस्टलरी और लॉजिस्टिक हब-वेयरहाउसिंग कॉम्प्लेक्स की स्थापना को मंजूरी दी थी। उस समय पूरी परियोजना की अनुमानित लागत 47846.85 लाख रुपये यानी करीब 478.47 करोड़ रुपये बताई गई थी।
इसके बाद परियोजना के प्रथम चरण में करीब 551 करोड़ रुपये खर्च कर 3000 टीसीडी क्षमता का नया गन्ना पेराई संयंत्र स्थापित करने की बात सामने आई।
वर्ष 2025 के बजट में छाता चीनी मिल के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किए जाने की खबर सामने आई।
वहीं उत्तर प्रदेश के 2026-27 के आधिकारिक बजट दस्तावेज में छाता, मथुरा में नई चीनी मिल, आसवनी तथा लॉजिस्टिक हब-वेयरहाउसिंग कॉम्प्लेक्स के निर्माण के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान दर्ज है। यही राशि संबंधित मद में पूंजीगत परिव्यय और कर्ज दोनों स्थानों पर दर्ज दिखाई देती है।
करोड़ों की योजना, लेकिन पुराने परिसर का हिसाब कौन देगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नई परियोजना पर सैकड़ों करोड़ रुपये की योजनाएं बन चुकी हैं तो पुराने मिल परिसर की सुरक्षा और रखरखाव के लिए अब तक कितना धन खर्च हुआ?
मिल की जमीन और परिसंपत्तियां सार्वजनिक क्षेत्र की महत्वपूर्ण संपत्ति हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि—
- मिल बंद होने के बाद से सुरक्षा व्यवस्था पर वर्षवार कितना खर्च हुआ?
- चौकीदारों और सुरक्षा एजेंसी को कितनी धनराशि का भुगतान किया गया?
- परिसर की सफाई पर वर्षवार कितना खर्च हुआ?
- झाड़ियों की कटाई, कूड़ा उठाने और परिसर की सफाई के लिए कितने टेंडर हुए?
- सफाई और सुरक्षा के नाम पर जारी बिलों का वास्तविक भुगतान कितना हुआ?
- मिल परिसर से कितनी मशीनरी, लोहा या अन्य सामग्री गायब हुई?
- चोरी की शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई?
- चोरी में हुए नुकसान का आकलन किस अधिकारी ने किया?
- क्या किसी अधिकारी या कर्मचारी की जिम्मेदारी तय हुई?
इन सवालों का जवाब सामने आना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि बंद मिल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पहले भी घटनाएं सामने आई हैं। मई 2025 में पुलिस ने छाता शुगर मिल के पास संदिग्ध लोगों से मुठभेड़ की कार्रवाई की थी और पुलिस के अनुसार आरोपियों ने एक सुरक्षाकर्मी की हत्या के मामले में संलिप्तता स्वीकार की थी।
मुख्यमंत्री के दौरे और घोषणाओं से आज तक कितना बदला?
छाता मिल को लेकर मुख्यमंत्री स्तर से घोषणाएं और सरकार की योजनाएं सामने आती रही हैं। 2023 में नई मिल को मंजूरी मिली, 2024 में टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ी और 2025 में बजट में धनराशि का प्रावधान हुआ। 2026 में भी आधिकारिक बजट में 500 करोड़ रुपये की परियोजना मद दर्ज है।
लेकिन अब जनता यह जानना चाहती है कि घोषणा से लेकर निर्माण की वर्तमान स्थिति तक कितना पैसा खर्च हुआ और उसके बदले जमीन पर कितना काम दिखाई दे रहा है?
सरकार ने फरवरी 2026 में भी छाता शुगर मिल को इंटीग्रेटेड परिसर के रूप में विकसित किए जाने की बात कही थी।
किसानों को इंतजार, विभाग से हिसाब मांगने की जरूरत
छाता और आसपास के क्षेत्र में गन्ना किसानों के लिए चीनी मिल का दोबारा संचालन महज एक औद्योगिक परियोजना नहीं बल्कि रोजगार और कृषि अर्थव्यवस्था से जुड़ा विषय है। पुरानी मिल बंद होने के कारण क्षेत्र के किसानों को गन्ने की बिक्री के लिए अन्य मिलों पर निर्भर रहना पड़ा और कई किसानों ने गन्ने की खेती छोड़ने की बात भी सामने आई है।
ऐसे में अब जरूरत केवल नई मिल के निर्माण की घोषणा की नहीं बल्कि पुरानी मिल की संपत्ति, सुरक्षा, सफाई, चोरी और अब तक हुए प्रत्येक खर्च का सार्वजनिक ऑडिट कराने की है।
बड़ा सवाल
जब छाता शुगर मिल के पुनर्निर्माण के लिए सैकड़ों करोड़ रुपये की योजनाएं तैयार हो चुकी हैं, तो वर्षों तक बंद रहे पुराने परिसर की सुरक्षा और सफाई पर खर्च हुए धन का हिसाब जनता को कब मिलेगा?
क्या शासन मिल परिसर की परिसंपत्तियों की भौतिक सत्यापन रिपोर्ट, चोरी/गायब सामग्री की सूची, सुरक्षा एवं सफाई पर हुए वर्षवार खर्च और वर्तमान निर्माण कार्य की प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक करेगा?
यही वे सवाल हैं जिनका जवाब छाता के किसानों और आम जनता को चाहिए।