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लम्पी बीमारी से परेशान ग्रामीण, पशुपालकों ने रोकथाम तेज करने की उठाई मांग

Gargachary Times 21 August 2026, 20:45 36 views
Mathura
लम्पी बीमारी से परेशान ग्रामीण, पशुपालकों ने रोकथाम तेज करने की उठाई मांग
फरह। विकासखंड फरह के मेघपुर, पिपरौठ, रैपुरा जाट, दौलतपुर, ओल और बरारी समेत कई गांवों में लम्पी बीमारी के लक्षण सामने आने से पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है। पशुओं के शरीर पर गांठें पड़ने, बुखार और कमजोरी के साथ दूध उत्पादन में कमी आने से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बीमारी की रोकथाम के लिए गांव-गांव जांच, उपचार और टीकाकरण अभियान तेज करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से कई पशुओं में लम्पी जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं। इससे पशुओं की देखभाल और इलाज पर अतिरिक्त खर्च बढ़ गया है। बीमारी की वजह से दूध कम होने पर पशुपालन पर निर्भर परिवारों की रोजमर्रा की आय भी प्रभावित हो रही है। पशुपालकों ने प्रभावित पशुओं की समय पर जांच और उपचार के साथ गांवों में पशु चिकित्सा टीमों की नियमित निगरानी की मांग की है। किसानों के लिए पशुपालन आय का अहम जरिया है। पशु के बीमार होने पर एक ओर दूध उत्पादन घट जाता है, वहीं दूसरी ओर दवा और देखभाल का खर्च बढ़ जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि बीमारी पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो इसका असर पशुपालकों की आर्थिक स्थिति पर पड़ सकता है। उन्होंने विभाग से प्रभावित गांवों में निगरानी बढ़ाने और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है। पशु चिकित्सा अधिकारी फरह कामना दूबे ने बताया कि लम्पी से प्रभावित पशुओं का उपचार कराया जा रहा है। किसी गांव से बीमारी या संदिग्ध मामले की सूचना मिलने पर टीम को मौके पर भेजकर पशु की जांच और आवश्यक उपचार कराया जा रहा है। विभाग की ओर से रोकथाम के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। पशुपालकों को भी बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल सूचना देने और सावधानी बरतने के लिए जागरूक किया जा रहा है। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी नरेंद्र नारायण शुक्ला ने बताया कि लम्पी बीमारी वर्ष 2022 में भी सामने आई थी। वर्तमान में सूचना मिलने पर चिकित्सकों की टीमें मौके पर पहुंचकर पशुओं की जांच और उपचार कर रही हैं। उन्होंने पशुपालकों से अपील की कि संक्रमित पशु को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें और0 आसपास साफ-सफाई का विशेष ध्यान दें। उन्होंने पशुपालकों को नीम की पत्तियों का गुनगुना पानी तैयार कर पशु को नहलाने की सलाह दी और कहा कि बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर स्वयं इलाज करने के बजाय पशु चिकित्सक से संपर्क करें।
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