नेपाल में लाशों का ढेर, मुर्दाघर पड़े कम! पहचान के लिए अपनाया गया DNA तरीका
Gargachary Times
1 September 2026, 21:36
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International
नेपाल में बाढ़ के बाद सैकड़ों अज्ञात शवों को जलाने के बजाय दफनाया जा रहा है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि शवों के अवशेष सुरक्षित रहें और DNA जांच से पहचान कर परिजनों को सौंपे जा सकें।
दरअसल, पानी और कीचड़ में लंबे समय तक दबे रहने से शवों की हालत बहुत खराब हो चुकी है। कई शव पानी में फूल गए हैं और तेजी से सड़ रहे हैं। इससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो गया है।
दूसरी तरफ शवगृह और अस्थायी केंद्र भी शवों से भर चुके हैं। ऐसे में प्रशासन के लिए शवों को लंबे समय तक सुरक्षित रखना संभव नहीं है। यही वजह है कि अज्ञात शवों को सामूहिक कब्रों में दफनाया जा रहा है।
26 अगस्त को आई बाढ़ के बाद मौतों का आंकड़ा बढ़कर 1066 हो गया है। इनमें नेपाल में 1050 और तिब्बत में 16 लोगों की मौत हुई है। वहीं, 4400 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं।
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने कहा है कि बाढ़ के पीछे क्लाइमेट चेंज की बड़ी भूमिका है। उनके मुताबिक, हिमालयी क्षेत्र में तापमान 1.8 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है।
शाह ने कहा कि एक्सपर्ट्स बाढ़ की वजह बर्फ और हिमखंडों के बड़े हिस्से के टूटने को मान रहे हैं। क्लाइमेट चेंज से नेपाल जैसे देशों को झेलनी पड़ रही आपदाओं का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मजबूती से उठाना जरूरी है।
नेपाल के रसुवा और नुवाकोट जिलों के कई बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री की भारी कमी है। कुछ जगहों पर अब तक कोई मदद भी नहीं पहुंची है।
नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी NDRRMA के मुताबिक, रसुवा के उत्तरगया इलाके में टेंट की कमी है। लोगों को चावल, दाल और अन्य जरूरी खाद्य सामग्री की भी जरूरत है।
वहीं, कुछ इलाकों में शवों और मरे जानवरों से फैल रही बदबू रोकने के लिए कीटाणुनाशक और केमिकल की जरूरत है।
ढाडिंग जिले के कई हिस्सों में पीने के पानी की कमी है। बाढ़ में सड़कें और पुल टूटने से राहत टीमों की पहुंच अब भी मुश्किल बनी हुई है।