छत्तीसगढ़ कुंज में गूंजा भागवत कथा का अमृत
Gargachary Times
3 September 2026, 20:32
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Dharam
वृंदावन। पंचकोसीय परिक्रमा मार्ग स्थित छत्तीसगढ़ कुंज में श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव के अंतर्गत आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तृतीय दिवस कथा का वातावरण भक्तिमय रहा। कथा व्यास एवं छत्तीसगढ़ कुंज के महंत आचार्य रामचंद्र दास महाराज ने श्रीमद्भागवत के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन करते हुए भगवान श्रीकृष्ण के पृथ्वी पर अवतरण से पूर्व की दिव्य कथा का विस्तार से वर्णन किया।
कथा के दौरान आचार्य रामचंद्र दास महाराज ने बताया कि जब पृथ्वी पर अधर्म बढ़ने लगा और अत्याचारी शक्तियों के कारण साधु-संत एवं धर्मात्मा जन पीड़ित होने लगे, तब पृथ्वी ने गौ का रूप धारण कर देवताओं के समक्ष अपनी व्यथा प्रकट की। देवताओं ने भगवान श्रीहरि से प्रार्थना की और भगवान ने धर्म की पुनः स्थापना के लिए पृथ्वी पर अवतार लेने का आश्वासन दिया।
इसके पश्चात कथा में मथुरा के राजा उग्रसेन, उनके पुत्र कंस तथा देवकी-वसुदेव के प्रसंग का वर्णन हुआ। देवकी के विवाह के समय कंस स्वयं रथ चलाकर अपनी बहन देवकी और वसुदेव को विदा करने जा रहा था। उसी समय आकाशवाणी हुई कि देवकी की आठवीं संतान कंस के वध का कारण बनेगी। आकाशवाणी सुनते ही कंस का हृदय भय से भर गया और उसने देवकी तथा वसुदेव को कारागार में बंद कर दिया।
कथा व्यास ने बताया कि सत्ता, अहंकार और मृत्यु के भय ने कंस को इतना निर्दयी बना दिया कि उसने देवकी की एक-एक करके छह संतानों का वध कर दिया। सातवीं संतान के रूप में भगवान शेष के अंश बलराम जी के प्रकट होने का प्रसंग भी श्रद्धापूर्वक सुनाया गया। भगवान की योगमाया ने अपनी अद्भुत शक्ति से बलराम जी को देवकी के गर्भ से रोहिणी के गर्भ में स्थानांतरित कर दिया।
इसके बाद कथा में देवकी के गर्भ से स्वयं भगवान श्रीहरि के प्रकट होने का अत्यंत दिव्य प्रसंग सुनाया गया। कथा व्यास ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के अवतरण से पहले देवकी और वसुदेव ने भगवान का दिव्य चतुर्भुज स्वरूप देखा। भगवान ने उन्हें आश्वस्त किया कि वे पृथ्वी पर धर्म की रक्षा और भक्तों के कल्याण के लिए अवतरित हुए हैं।
आचार्य रामचंद्र दास महाराज ने कहा कि भगवान का अवतार किसी साधारण घटना का परिणाम नहीं, बल्कि धर्म की रक्षा और जीवों के कल्याण के लिए परमात्मा की दिव्य लीला है। जब संसार में अधर्म बढ़ता है और धर्म कमजोर पड़ता दिखाई देता है, तब भगवान अपनी योगमाया के माध्यम से भक्तों की रक्षा के लिए अवतरित होते हैं।
कथा व्यास ने श्रद्धालुओं को बताया कि श्रीकृष्ण जन्म की कथा केवल एक ऐतिहासिक या धार्मिक प्रसंग नहीं है, बल्कि यह संदेश देती है कि अंधकार कितना भी गहरा क्यों न हो, सत्य और धर्म का प्रकाश अवश्य प्रकट होता है। कंस के अत्याचार के बीच भगवान का अवतरण इसी आशा और विश्वास का प्रतीक है।
श्रीकृष्ण जन्म से पूर्व की कथा के प्रसंगों के दौरान श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। भजन-कीर्तन और भगवान के जयकारों से छत्तीसगढ़ कुंज का वातावरण गुंजायमान रहा। कथा के समापन पर संत-महात्माओं द्वारा आरती की गई तथा श्रद्धालुओं के कल्याण और विश्व शांति की कामना की गई।
श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन 1 सितंबर से 7 सितंबर तक किया जा रहा है। आगामी कथा में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का दिव्य एवं मनोहारी प्रसंग श्रद्धालुओं को श्रवण कराया जाएगा।