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फिरोजाबाद में 261 ग्राम पंचायत पुस्तकालयों से बदल रही तस्वीर, 85 से अधिक युवाओं का सरकारी व निजी सेवाओं में चयन

Gargachary Times 13 September 2026, 20:43 59 views
Firozabad
फिरोजाबाद में 261 ग्राम पंचायत पुस्तकालयों से बदल रही तस्वीर, 85 से अधिक युवाओं का सरकारी व निजी सेवाओं में चयन
फिरोजाबाद। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के “हर प्रतिभा को अवसर और हर गांव को संसाधन” के संकल्प को धरातल पर उतारने की दिशा में पंचायती राज विभाग द्वारा संचालित ग्राम पंचायत पुस्तकालय ग्रामीण युवाओं के लिए सफलता का नया आधार बन रहे हैं। गांव में ही आधुनिक अध्ययन सुविधाएं मिलने से अब युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ रहा है। जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा के विशेष प्रयासों से जनपद फिरोजाबाद में 261 ग्राम पंचायत पुस्तकालयों की स्थापना की जा चुकी है। इन पुस्तकालयों में अध्ययन करने वाले 85 से अधिक छात्र-छात्राओं का चयन उत्तर प्रदेश पुलिस, सेना, अर्धसैनिक बलों सहित सरकारी एवं निजी सेवाओं में हो चुका है।ग्राम पंचायत कंथरी, अरांव के अमित, दुष्यंत, मनीष, रंजीत राजपूत, अश्विनी और प्रसू का चयन सीआरपीएफ, उत्तर प्रदेश पुलिस, भारतीय वायुसेना और भारतीय नौसेना में हुआ है। इसी प्रकार ग्राम पंचायत नेपई, नारखी के पृथ्वी सिंह का भारतीय सेना तथा गिरीश कुमार का उत्तर प्रदेश पुलिस में चयन हुआ। ग्राम पंचायत ववायन, हाथवंत के अश्वनी कुमार और गौरव कुमार ने भी उत्तर प्रदेश पुलिस में सफलता हासिल की है। वहीं सुरैल नगला कांक्षी और भेंड़ी, जसराना से ज्योति शाक्य एवं शिवम कुमार का चयन उत्तर प्रदेश पुलिस में हुआ है। ग्राम पंचायत पुस्तकालयों को केवल पुस्तकों तक सीमित न रखते हुए आधुनिक स्मार्ट क्लासेस से भी जोड़ा गया है। इससे ग्रामीण युवा महंगी कोचिंग फीस और शहर में रहने-खाने के खर्च के बिना अपनी ग्राम पंचायत में ही सिविल सेवा, पुलिस, एसएससी सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी कर पा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, ग्राम पंचायत पुस्तकालयों की यह पहल ग्रामीण युवाओं को शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के साथ ही उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा के मार्गदर्शन और सहयोग से योजना के क्रियान्वयन को गति मिली है।गांवों में स्थापित इन पुस्तकालयों में पढ़ाई कर युवाओं की सफलता से ग्रामीण परिवारों में भी शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रति नई उम्मीद जगी है। पुस्तकालय अब महज अध्ययन केंद्र नहीं रह गए हैं, बल्कि ग्रामीण युवाओं के सपनों को उड़ान देने और उनके भविष्य को नई दिशा देने का माध्यम बनते जा रहे हैं।
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