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संस्कृति विश्वि में भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा पर बोले विशेषज्ञ

Gargachary Times 26 September 2026, 18:47 46 views
Education
संस्कृति विश्वि में भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा पर बोले विशेषज्ञ
मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग में 'भारतीय ज्ञान परंपरा के विविध आयाम' विषय पर एक दिवसीय विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की मुख्य वक्ता जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय की प्रो. सारिका शर्मा रहीं। कार्यक्रम का आयोजन शैक्षणिक अधिष्ठाता और शिक्षा विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. रेनू गुप्ता के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। अपने संबोधन में प्रो. रेनू गुप्ता ने कहा कि हमारे समाज में पाठ्यक्रम और शिक्षण संस्थान के बीच शिक्षक एक मुख्य कड़ी (सेतु) के रूप में भूमिका निभाते हैं। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा के पुरातन आयामों को आधुनिकीकरण से जोड़ने पर बल दिया। कार्यक्रम की शुरुआत में शिक्षा विभाग की प्रो. सरसिज घोष ने मुख्य वक्ता प्रो. सारिका शर्मा का अकादमिक परिचय सभी के सामने रखा। मुख्य वक्ता प्रो. सारिका शर्मा ने कहा कि भारतीय विरासत को केवल ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से देखने के बजाय, उसके पीछे छिपे वैज्ञानिक चिंतन, तकनीकी ज्ञान और व्यावहारिक अनुभवों को समझना बेहद जरूरी है। उन्होंने स्थापत्य कला का उदाहरण देते हुए कहा कि जब हम ऐतिहासिक स्मारकों को विज्ञान और इंजीनियरिंग के दृष्टिकोण से देखते हैं, तो भारतीय ज्ञान परंपरा के नए आयाम सामने आते हैं। भारतीय परंपरा में धातु विज्ञान, गणित, चिकित्सा, कृषि, जल प्रबंधन और खगोल विज्ञान का समृद्ध भंडार मौजूद है। प्राचीन भारतीय शिक्षा व्यवस्था पर चर्चा करते हुए प्रो. शर्मा ने कहा कि पुरातन काल में शिक्षा का उद्देश्य केवल पुस्तकीय ज्ञान नहीं, बल्कि जीवनोपयोगी कौशल विकसित करना था। उन्होंने वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में भी डिग्री के साथ-साथ समस्या-समाधान, प्रभावी संचार और व्यावहारिक कौशल को शामिल करने का आह्वान किया। परंपरागत कौशल को आधुनिकता और उद्यमिता से जोड़कर रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं। विशेषज्ञ वक्ताओं ने मुख्य रूप से इस बात पर जोर दिया कि भारतीय ज्ञान परंपरा को केवल अतीत की विरासत न मानकर वर्तमान और भविष्य के लिए उपयोगी ज्ञान-स्रोत के रूप में देखा जाना चाहिए। इससे नई पीढ़ी में शोध-प्रवृत्ति और वैज्ञानिक जिज्ञासा विकसित होगी। कार्यक्रम के अंतिम चरण में डॉ. अर्चना शर्मा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर शिक्षा विभाग के प्राध्यापक डॉ. तानिया चंदेल, डॉ. गोपाल राय, डॉ. प्रियंका, डॉ. हरिकृष्ण, श्री पुष्पेंद्र, डॉ. ज्योत्स्ना राठौड़, डॉ. विवेक शुक्ला, दीक्षा मैम, धृति मैम सहित विभाग के शोध छात्र और भारी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संयोजन संस्कृति स्कूल आफ एजूकेशन की विभागाध्यक्ष डा. सरस्वती घोष ने किया।
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