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धनबल के सामने वोने साबित हो रहे हैं स्वस्थ प्रजातंत्र के दावे

Gargachary Times 1 October 2026, 19:42 44 views
Dholpur
धनबल के सामने वोने साबित हो रहे हैं स्वस्थ प्रजातंत्र के दावे
नगर निकाय एवं पंचायती चुनाव लोकतंत्र की रीड हैं यह चुनाव स्थानीय स्तर पर विकास स्वच्छता शिक्षा चिकित्सा एवं बुनियादी सुविधाओं से सीधे जुड़े होते हैं लेकिन पिछले कई वर्षों से इन चुनाव में पैसे की शक्ति का बढ़ता दुरुपयोग लोकतंत्र की जड़ों को खोखला कर रहा है जो उम्मीदवार धनवल के सहारे जीत हासिल करते हैं उनके खिलाफ सख्त एवं प्रभावी कदम उठाना अब समय की सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है पैसे के बल पर जीत का मतलब सिर्फ बड़े खर्चे से चुनाव लड़ना नहीं है इसमें मतदाताओं को नगद शराब या अन्य प्रलोभन देकर वोट खरीदना झूठे वादे करके प्रभावित करना और निर्वाचन आयोग की खर्च सीमा का खुला उल्लंघन शामिल है राजस्थान में पिछले दिनों संपन्न हुए चुनाव में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां उम्मीदवार लाखों करोड़ों रुपए खर्च करके जीत कर पहुंचे हैं इससे योग्य उम्मीदवार एवं जन सेवा की भावना रखने वाले उम्मीदवार किनारे हो जाते हैं परिणाम स्वरुप स्थानीय शासन में भ्रष्टाचार एवं विकास कार्यक्रम आने में इतना बढ़ती है पैसे की शक्ति से जीते हुए प्रतिनिधियों का असर पूरे सिस्टम पर पड़ता है कोई अक्सर अपने खर्च की भरपाई अवैध तरीकों से करते हैं ठीक है परमिट एवं सरकारी योजनाओं में आने में टाइम बढ़ाती हैं आम नागरिक को सही सेवा नहीं मिलती तथा लोकतंत्र के मूल सिद्धांत वोट के अधिकार पर कोठरागत होता है जब वोट पैसे से खरीद जाने लगे तो गरीब एवं मध्यम वर्ग के मतदाताओं का विश्वास टूटने लगता है युवा पीढ़ी विषेशकर योग्य उम्मीदवार राजनीति से दूर होते जाते हैं तथा व्यवस्था के प्रति निराशा बढ़ती है इस समस्या से निपटने के लिए केवल कागजी घोड़े दौड़ाने से अब तक समस्या का हाल यथार्थ के धरातल पर नहीं खोजा जा सका है तथा फिलहाल कोई सकारात्मक परिणाम देखने को नहीं मिले स्थिति उसे समय और सोचे हो जाती है जब मतदाताओं द्वारा बताया गया उम्मीदवार लोग एवं फायदे के लिए सभी सिद्धांतों को तेलांजलि देकर किसी भी डाल को समर्थन देकर मतदाताओं के साथ धोखा देता है तथा वाटर के पास इसका कोई विकल्प भी उपलब्ध नहीं है इस परंपरा की शुरुआत पहले बड़े नेताओं ने की है जिसका प्रभाव नीचे तक साफ तौर पर देखा जा सकता है हालांकन्निया अनुसार आयोग के दिशा निर्देशों का उल्लंघन करने पर प्रत्याशियों पर ₹2000 का जुर्माना तथा 6 वर्ष तक चुनाव से अयोग्य घोषित करने का प्रावधान है चुनाव आयोग ने जिला परिषद सदस्य के लिए अधिकतम खर्च की राशि 3 लाख पंचायत समिति सदस्य के लिए डेढ़ लाख तथा सरपंच पद के लिए एक लाख खर्च की सीमा तय की है इसके अलावा भी कई नियम कानून निर्धारित हैं इसका अनुपालन सरकार्यों की सीमित रह गया है वास्तविक स्थिति इससे पूरी तरह उलट दिखाई देती है परिणाम स्वरूप राजनीति अब सौदेबाजी का रूप ले रही है जो प्रजातंत्र के लिए बेहद खतरनाक संकेत माने जा सकते हैं स्थानीय चुनाव में धनबल के प्रयोग पर पाबंदी लगाना केवल एक कानूनी सुधार नहीं बल्कि हमारे लोकतंत्र को जिंदा रखने की एक अनिवार्य शर्त है स्वच्छ एवं निष्पक्ष चुनाव भी एक मजबूत राष्ट्र की आधारशिला होते हैं
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