संतों की वाणी समाज में जगाती है समरसता, 2047 तक विकसित राष्ट्र बनेगा भारत: ओम बिरला
Gargachary Times
28 October 2026, 19:43
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Lucknow
लखनऊ: संतों की वाणी समाज में समरसता, सद्भाव और मानवीय मूल्यों को मजबूत करती है। संत कबीर साहब की शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं और समाज को समानता एवं विवेक का संदेश देती हैं। यह बात लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बुधवार को लखीमपुर खीरी में संत असंगदेव जी महाराज के 60वें अवतरण दिवस पर आयोजित कबीर महोत्सव एवं कबीर स्मृति भवन के भूमि पूजन समारोह में कही। उन्होंने कबीर स्मृति भवन का शिलान्यास कर संत परंपरा के सामाजिक एवं आध्यात्मिक योगदान की सराहना की।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि संत कबीर साहब ने अपनी निर्भीक वाणी के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों, पाखंड और जातिगत भेदभाव पर प्रहार किया। उनकी शिक्षाएं समानता, विवेक और मानवीय मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा देती हैं। लोकतंत्र में विचारों की भिन्नता स्वाभाविक है, लेकिन सहमति और असहमति दोनों का सम्मान जरूरी है। कबीर की वाणी संयम, मर्यादा और विवेक के साथ अपनी बात रखने का संदेश देती है।
उन्होंने संत असंगदेव जी महाराज के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि संतों का सान्निध्य व्यक्ति को नैतिकता और संयम के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। गांव-गांव तक कबीर साहब के विचारों और जीवन दर्शन को पहुंचाने का कार्य समाज में सकारात्मक बदलाव का आधार है।